इंसान की सभ्यता विकसित होने से पहले समूचे यूरोप पर इनका राज था. बॉडी ऐसी थी कि दूर से दौड़ते देखकर रूह कांप जाए. शिकार करने से पहले आदमी सौ बार सोचता. लेकिन आदमी से खतरनाक जानवर कोई है कहां. जब वो हाथी को कंट्रोल कर लेता है तो उसको करना कौन मुश्किल था. पक्का यकीन मानो, अगर आज डायनोसोर होते तो वो भी अगले छोटे पंजों पर झुककर सलाम बजाते. गौरतलब है कि लास्ट औरॉक फीमेल थी. 1624 में पोलैंड में मरी. उसके बाद कोई न हुआ उस खानदान का. लास्कॉक्स, फ्रांस की गुफाओं में ये पेंटिंग्स जैसी बनी हैं. जैसी अपने अजंता एलोरा में. ये डिजाइन तकरीबन 17 हजार साल पुराने हैं. और शक्ल से लग रहे हैं कि औरॉक के हैं.
दोबारा ब्रीडिंग
2008 में ईकॉलजिस्ट रोनॉल्ड गोडरी ने 'टौरल प्रोग्राम' शुरू किया. यूरोप के बरबाद होते ईको सिस्टम को फिर से बहाल करने की जिम्मेदारी उठाने के लिए. अपने प्लान के बारे में रोनॉल्ड एकदम पक्के थे. "हमको एक शाकाहारी प्राणी चाहिए. बड़ा सा. वो घूमे और चरे. हमारे दिमाग में सबसे पहला खयाल आया औरॉक का." तो इसके लिए शुरुआत DNA भिड़ाने से हुई. औरॉक के ज़ीन वाले वंशज मिल गए स्पेन, पुर्तगाल, पोलैंड और इटली जैसे देशों से. आनुवंशिकी स्पेशलिस्ट्स ने सलाह दी कि एकदम करीबी खानदान वालों के ज़ीन मिलाओ. ताकि एकदम ओरिजनल प्राणी तैयार हो सके. जैसे मेरोनेसा गाय है. ये काफी हद तक औरॉक से मिलती जुलती है. साइज कम है लेकिन बॉडी की बनावट और सींगें वैसी ही हैं.
ये वैज्ञानिक इस प्रोग्राम के चौथे स्टेप पर हैं. उम्मीद है कि 2025 तक ये प्रोजेक्ट पूरा हो जाएगा. और यूरोप के खेतों में हाथी जैसी गायें चरती मिलेंगी. हो सकता है कि हमारे हरयाणे में भी कोई सेर निकल आए जो औरॉक को इंडिया ले आए. फिर हमारे देश में भी गौमाता सात फिट ऊंची होंगी. ये वीडियो देखकर औरॉक को अच्छे से समझ सकते हो. https://www.youtube.com/watch?v=sSgPbP21wCE ये भी पढ़ें: जलीकट्टू से कम नहीं हैं ये जानवरों से होने वाले खूनी खेल













