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क्या बला है ये 'बिट कॉइन' जो कैशलेस इकॉनमी में भी काला धन जमा करा देती है

आज एक सिक्का 45 हज़ार का है, जो 2018 में 6 लाख का हो जाएगा.

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फोटो - thelallantop
आपको लगता है कि गूगल को सब पता है. दुनिया में जो ऊपरवाले से न मिले वो गूगल पर ढूंढ़ने से मिल जाता है. मगर खुद गूगल का कहना है कि वो इंटरनेट के एक प्रतिशत हिस्से को ही सर्च कर पाता है. बाकी के 99 प्रतिशत में कई चीज़े हैं जो आम इंटरनेट की पहुंच से दूर है. इसी में से एक है बिट कॉइन.


 

आखिर है क्या बिट कॉइन

बिट कॉइन एक डी सेंट्रलाइज़ क्रिप्टोग्राफिक डिजिटल करेंसी है. इसका सबसे ज़्यादा इस्तेमाल दुनिया भर में एक देश से दूसरे देश में पैसा भेजने में होता है. इस पर किसी भी सरकार या बैंक का नियंत्रण नहीं है तो इसके ट्रांजैक्शन बहुत ही सस्ते हैं. एक बिट कॉइन लेन-देन में लगभग 2 रुपए की फीस देनी पड़ती है वहीं एक सामान्य बैंक खाते के ट्रांसफर में 5 से 30 प्रतिशत तक कमीशन देना पड़ता है.

कैसे बना और ज़रूरत क्या है

बिट कॉइन की शुरुआत 'सतोषी अकीमोतो ने की थी. ये सतोषी अकीमोतो कौन हैं ठीक-ठीक कोई नहीं जानता, मगर 2010 में उन्होंने बिट कॉइन की शुरुआत ये दिखाने के लिए की थी कि बिना पारंपरिक करेंसी के भी लेन देन किया जा सकता है. इस डी सेंट्रलाइज़्ड सिस्टम को बनाने का उद्देश्य आपके पैसे पर सरकारी दखल को रोकना था. मतलब आपके बैंक में जमा पैसे को सरकार किसी और को लोन न दे पाए और वो इसे लेकर भाग न जाए इसकी पूरी गारंटी.

कोई क्यों खरीदे बिट कॉइन

दुनिया में माइक्रो सॉफ्ट जैसी कंपनियां बिट कॉइन में पेमेंट ले रही हैं. गूगल भी इसमें इनवेस्ट कर रहा है. जब इसकी शुरुआत हुई थी तो 1,000 बिट कॉइन में एक पित्ज़ा खरीदा गया था आज एक बिट कॉइन लगभग 45 हज़ार रुपए का है जिसके बारे में कुछ संस्थाओं का अनुमान है कि ये 2018 तक लगभग 6 लाख रुपए का हो जाएगा.

बिट कॉइन का र्ई-वॉलेट
बिट कॉइन का र्ई-वॉलेट
इसकी कीमत के पीछे डिमांड और सप्लाई का बेसिक नियम काम कर रहा है. बिट कॉइन डिजिटल करेंसी ज़रूर है मगर उसकी माइनिंग करनी पड़ती है. ठीक वैसे ही जैसे सोने की होती है. दुनिया भर में अलग-अलग जगह पर माइनिंग ब्लॉक्स लगाए जाते हैं. दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में फैले शौकिया हैकर्स इन माइंस को चलाते हैं.
एक माइनिंग ब्लॉक में बड़े-बड़े सर्वर वाली ऐसी मशीने लगी होती हैं जो आपने शायद हॉलीवुड फिल्मों में ही देखी हों. ये माइनर्स दुनिया भर में हो रहे बिट कॉइन के लेन देन का किसी क्लर्क की तरह हिसाब रखते हैं और इसके बदले में इन्हें बिट कॉइन दिये जाते हैं.
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बिट कॉइन माइनिंग फार्म

बिट कॉइन की इस माइन से हर 4 साल में निकलने वाले बिट कॉइन की गिनती आधी रह जाती है और 125 साल बाद दुनिया में बिट कॉइन बनना बंद हो जाएंगे. मतलब मांग बढ़ती जा रही है और सप्लाई खत्म होती जा रही है. कल अगर दुनिया को 500 बिट कॉइन चाहिए होंगे तो मिल 250 ही रहे होंगे. और जब 1000 की मांग होगी तो 125 ही मिलेंगे.
शुरू से अब तक बिट कॉइन की कीमत
शुरू से अब तक बिट कॉइन की कीमत

फायदे क्या है

बिट कॉइन के बड़े फायदे हैं. एक जगह से दूसरी जगह भेजना बहुत आसान है. वहीं सरकार और बैंकों के टैक्स के झंझट से मुक्ति रहती है. ऊपर से बिट कॉइन के खोने का डर भी नहीं है. बिट कॉइन से हुए लेनदेन का हिसाब भी किसी को देना नहीं पड़ता. (वैसे आपको अपने अकाउंट को हैकर्स से बचाने और पासवर्ड को याद रखने जैसी सावधानियां रखनी पड़ती हैं)
बिट कॉइन का पर्स
बिट कॉइन का पर्स

नुकसान और खतरे

बिट कॉइन के फायदे ही उसके नुकसान हैं. एक वेब ब्राउज़र होता है टॉर. टॉर में या टॉर को सपोर्ट करने वाले ब्राउज़र में वो वेबसाइट्स खोली जा सकती हैं जिन्हें सरकारों ने आपके देश में प्रतिबंधित कर रखा है या सामान्य रूप से आप अपने  ब्राउज़र पर जिन्हें नहीं खोल सकते हैं. इसके अलावा इस्तेमाल करने वाले की लोकेशन और हिस्ट्री का भी पता नहीं चलता है. इसी टॉर  का इस्तेमाल आप डार्क वेब खोलने के लिए कर सकते हैं. डार्क वेब की वेबसाइट .COM की जगह .onion जैसे एक्सटेशन वाली होती हैं. इनमें सिल्करोड नाम की वेबसाइट से सबसे प्रसिद्ध है. सिल्करोड जैसी वेबसाइट्स पर दुनिया भर के ड्रग्स, चाइल्ड सेक्स खरीद जाता है. फ्लेश ट्रेडिंग (ऊंचे स्तर पर देह व्यापार) होता है. इससे किसी भी देश में हथियार डिलीवर करवा दिए जाते हैं और इसकी ट्रैकिंग ‘लगभग’ असंभव है. इस पूरी खरीदारी में सबसे ज़्यादा लेनदेन बिट कॉइन से होता है. इसी वजह से दुनिया भर की सरकारें बिटकॉइन को कानूनी मान्यता देने में एक मत नहीं हैं.
सिल्करोड 2.0
सिल्करोड 2.0

वैसे आपको एक बात और बता दें कि जहां सिल्करोड 2.0 (फिलहाल सिल्करोड 3.0 ) को अमेरिका ने 2014 में बंद करवा दिया था और वो टॉर को भी शक की निगाहों से देखती है. इसकी शुरुआत भी अमेरिका ने ही की थी.

हिंदुस्तान में बिट कॉइन

रघुराम राजन ने अपने कार्यकाल में स्पष्ट किया था कि बिट कॉइन को भारत सरकार और रिजर्व बैंक करेंसी नहीं मानता है मगर इसका इस्तेमाल गैर कानूनी नहीं है. पिछले साल सरकारी एजेंसियों ने ड्रग व्यापार में इस्तेमाल के चलते 500 बिट कॉइन (तब कीमत 2.5 करोड़) फ्रीज़ किए थे. इसके अलावा बिट कॉइन से जुड़ी ठगी, चिट फंड और हैकिंग जैसी घटनाएं भी हुई हैं.
लास वेगास कसीनो में बिट कॉइन एटीएम
लास वेगास कसीनो में बिट कॉइन एटीएम
निचोड़ ये है कि बिट कॉइन सैद्धांतिक रूप से मुद्रा की एक बिल्कुल नई व्यवस्था है और इसके काम करने के ढंग और इसके भविष्य के बारे में कई सारी बातें अभी भी साफ नहीं हैं. एक तरफ तो ये कैशलेस और ग्लोबल फ्री इकॉनमी को बढ़ावा देती है साथ ही आतंकवाद और ड्रग्स के कारोबार में भी इसका बड़ा इस्तेमाल होता है. तो इसके बारे में कोई एक राय देना सही नहीं होगा. मगर एक आम इंटरनेट इस्तेमाल करने वाले का इससे दूर रहना ही फायदेमंद है.

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