भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने इलेक्टोरल बॉन्ड केस में सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दाखिल किया है. बताया है कि इलेक्टोरल बॉन्ड से जुड़ा सारा डेटा चुनाव आयोग को सौंप दिया गया है. ये हलफनामा SBI के मुख्य प्रबंध निदेशक (CMD) दिनेश खारा ने दाखिल किया है. उन्होंने बताया है कि 12 मार्च को इलेक्टोरल बॉन्ड की खरीद, बिक्री और खरीदारों के नाम सहित इससे जुड़ी सारी जानकारी चुनाव आयोग को सौंप दी गई है (SBI gives details of 22,217 electoral bonds bought from April 2019 to Feb 2024).
इलेक्टोरल बॉन्ड पर SBI ने SC से कहा- 'जो बॉन्ड कैश नहीं हुए, उनका पैसा PM रिलीफ फंड में डाल दिया'
Electoral Bond को लेकर SBI के CMD दिनेश खारा (Dinesh Khara) ने Supreme Court में एक हलफनामा दाखिल किया है. इसमें उन्होंने कोर्ट को बॉन्ड से जुड़ी जानकारी Election Commission को सौंपने की बात बताई है. और क्या-क्या बता दिया?

इंडिया टुडे से जुड़ीं कनु सारदा और शृष्टि ओझा की एक रिपोर्ट के मुताबिक SBI ने कहा है कि एक सीलबंद लिफाफे में एक पेनड्राइव और दो पीडीएफ फाइल के जरिए जानकारी चुनाव आयोग को सौंपी गई है. ये पूरी जानकारी पासवर्ड से सुरक्षित की गई है. यानी कोई भी फाइल बिना पासवर्ड के नहीं खुलेगी.
SBI ने कोर्ट को इलेक्टोरल बॉन्ड से जुड़े कुछ आंकड़े भी बताए हैं. बैंक के मुताबिक 1 अप्रैल, 2019 से 15 फरवरी, 2024 तक कुल 22,217 इलेक्टोरल बॉन्ड बिके हैं. इनमें से 22,030 को राजनीतिक पार्टियों भुना लिया. SBI के अनुसार जिन 187 चुनावी बांड की राशि को पार्टियों द्वारा 15 दिनों की वैधता अवधि के भीतर भुनाया नहीं गया था, उनके पैसों को पीएम रिलीफ फंड (प्रधानमंत्री राहत कोष) में भेज दिया गया था.
साल 2019 में सरकार की इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम की वैधता को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी. 15 फरवरी, 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम को असंवैधानिक करार देते हुए रद्द कर दिया था. कोर्ट ने कहा था कि इलेक्टोरल बॉन्ड को गोपनीय रखना संविधान के अनुच्छेद 19(1) और सूचना के अधिकार का उल्लंघन है.
कोर्ट ने SBI से 6 मार्च, 2024 तक इलेक्टोरल बॉन्ड से जुड़ी सारी डिटेल, चुनाव आयोग के पास जमा करने को कहा था. इस पर SBI ने कोर्ट से 30 जून तक का समय मांगा. लेकिन, सुप्रीम कोर्ट ने बैंक को ये मोहलत देने से मना कर दिया. सर्वोच्च अदालत की पांच जजों वाली बेंच ने SBI से हर हाल में 12 मार्च तक सारी डिटेल चुनाव आयोग को सौंपने को कहा. बेंच ने चुनाव आयोग को भी आदेश दिया कि वो SBI से मिली सारी डिटेल 15 मार्च को शाम 5 बजे तक अपनी वेबसाइट पर अपलोड करे.
Electoral bond लाया क्यों गया था?साल 2018 में केंद्र सरकार इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम लेकर आई थी. इलेक्टोरल बॉन्ड को लागू करने के पीछे मोदी सरकार का मत था कि इससे राजनीतिक फंडिंग में पारदर्शिता बढ़ेगी और साफ-सुथरा धन आएगा. इसमें व्यक्ति, कॉरपोरेट और संस्थाएं बॉन्ड खरीदकर राजनीतिक दलों को चंदे के रूप में देती थीं और राजनीतिक दल इस बॉन्ड को बैंक में भुनाकर रकम हासिल करते थे.
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भारतीय स्टेट बैंक की 29 शाखाओं को इलेक्टोरल बॉन्ड जारी करने और और उसे भुनाने के लिए अधिकृत किया गया था. हालांकि आरोप लगते रहे हैं कि योजना मनी लॉन्ड्रिंग या काले धन को सफेद करने के लिए इस्तेमाल हो रही थी.
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