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चीलों पर भी पड़ा रूस-यूक्रेन युद्ध का असर, वैज्ञानिकों ने बताईं परेशान करने वाली बातें

शोधकर्ताओं ने फरवरी 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद इन चीलों के साथ GPS चिप्स जोड़ी थीं. युद्ध के चलते इन चीलों ने यूक्रेन से जाने का अपना रास्ता बदल दिया

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रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते बेलारूस पहुंचने के लिए चीलों को अधिक यात्रा करनी पड़ी. (तस्वीर-सोशल मीडिया)

रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते चीलों ने यूक्रेन से होते हुए बेलारूस जाने के अपने रास्ते बदल (Russia-Ukraine War Eagles Migration) दिए. वैज्ञानिकों का कहना है कि इन शिकारी पक्षियों को ऐसा इसलिए करना पड़ा क्योंकि युद्ध के चलते उनके रहने के स्थान तबाह हो गए. वैज्ञानिकों ने बताया कि यह तथ्य दिखाता है कि कैसे इस तरह के संघर्ष वन्य जीवों और पर्यावरण पर खतरनाक असर डालते हैं.

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ये जानकारी करेंट बॉयालजी नाम के जर्नल में छपी है. जिन शोधकर्ताओं ने इस अध्ययन पर काम किया है, वो एस्टोनिया यूनिवर्सिटी ऑफ लाइफ साइंसेज और ब्रिटिश ट्रस्ट फॉर ऑर्निथोलॉजी से संबंध रखते हैं. इस अध्ययन में जिन चीलों की बात की गई है, उन्हें ग्रेटर स्पॉटेड ईगल्स कहा जाता है.

शोधकर्ताओं ने फरवरी 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद इन चीलों के साथ GPS चिप्स जोड़ी थीं. शोधकर्ताओं को पता चला कि ये चील हर वसंत में ग्रीस और दक्षिणी सूडान के एक वर्षावन से यूक्रेन के रास्ते बेलारूस पहुंचते हैं. बेलारूस पहुंचकर ये प्रजनन करते हैं. वैज्ञानिकों को पता चला कि रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते इन चीलों ने यूक्रेन से जाने का अपना रास्ता बदल दिया.

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वैज्ञानिकों को ये भी पता चला कि ग्रीस और सूडान से आते समय ये चील कुछ समय के लिए यूक्रेन में रुकते थे. युद्ध के चलते इनमें से कई चीलों ने या तो यूक्रेन में रुकना पूरी तरह से बंद कर दिया और या फिर बहुत ही कम समय के लिए रुके. इस अध्ययन से जुड़े एक शोधकर्ता ने बताया,

“रूस-यूक्रेन युद्ध ने लोगों और पर्यावरण पर बहुत बुरा असर डाला. हमारा अध्ययन बताता है कि कैसे इस तरह के संघर्ष वन्य जीवों पर असर डालते हैं.”

अध्ययन में आगे बताया गया है कि रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते इन चीलों को अतिरिक्त यात्रा करनी पड़ी. औसत स्तर पर इन पक्षियों को 85 किलोमीटर अधिक यात्रा करनी पड़ी. इन बदलावों के चलते उन्हें बेलारूस पहुंचने में अधिक समय लगा और उन्हें अधिक ऊर्जा खर्च करनी पड़ी, जिसका नकारात्मक असर पड़ा. ग्रेटर स्पॉटेड ईगल्स को संकटग्रस्त पक्षियों की कैटेगरी में रखा गया है. इस संबंध में एक शोधकर्ता ने बताया,

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"ग्रेटर स्पॉटेड ईगल्स को संकटग्रस्त पक्षियों की कैटेगरी में रखा गया है. ऐसे में अगर उनकी प्रजनन प्रक्रिया पर किसी भी तरह का असर पड़ता है तो ये काफी चिंताजनक है."

वैज्ञानिकों का कहना है कि जिन भी चीलों के साथ GPS चिप्स जोड़ी गई थीं, वो भले ही सुरक्षित हैं लेकिन रूस-यूक्रेन युद्ध ने उनकी प्रजनन क्षमता पर असर डाला है.

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