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'अमेरिका से तेल खरीदो, नहीं तो होर्मुज... ', जंग के बीच ट्रंप ने दूसरा ही खेल खेल दिया

Strait of Hormuz के बंद होने से अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump को एक फायदा नजर आ रहा है. दुनिया के सामने उन्होंने तीन विकल्प रखे. वहां से हट जाओ या ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ खुद खुलवा लो. तीसरा ऑप्शन भी दिया है उन्होंने.

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डॉनल्ड ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर तीन विकल्प रखे है. (फाइल फोटो: इंडिया टुडे)

पश्चिम एशिया में चल रही जंग की वजह से ईरान ने ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ बंद कर दिया. तेल और गैस की कीमतें बढ़ीं तो अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने NATO देशों से मदद की गुहार लगाई. मदद तो नहीं मिली, लेकिन ‘कारोबारी’ ट्रंप को इसमें एक मौका जरूर नजर आ गया. दुनिया के सामने उन्होंने तीन विकल्प रखे. वहां से हट जाओ या ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ खुद खुलवा लो. एक तीसरा ऑप्शन भी है. अमेरिका से सीधे तेल और गैस खरीदो.

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डॉनल्ड ट्रंप ने गुरुवार, 2 अप्रैल को राष्ट्र के नाम संबोधन दिया. इस दौरान ट्रंप ने ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को लेकर अपनी सारी योजनाएं साफ कर दीं. सीधा सा हिसाब है कि अगर यह रास्ता बंद रहता है, तो एशिया और यूरोप के खरीदार अमेरिका की तरफ रुख कर सकते हैं. इसका मतलब है कि ट्रंप प्रशासन को जबरदस्त फायदा हो सकता है. होर्मुज के ब्लॉक होने से जहाजों की आवाजाही ठप हो गई है. सप्लाई रुकने से दुनिया के कई देशों में कच्चे तेल और लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) का संकट खड़ा हो गया है. रणनीतिक रूप से बेहद अहम समुद्री रास्ता है. दुनिया का लगभग 20 फीसदी तेल इसी रास्ते से गुजरता है. 

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, डॉनल्ड ट्रंप के भाषण का एक अहम हिस्सा इस बात पर केंद्रित था कि उनकी लीडरशिप में अमेरिका किस तरह तेल और गैस का सबसे बड़ा उत्पादक बन गया है. ट्रंप ने कहा,

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"मेरा एक सुझाव है. पहला, यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ़ अमेरिका से तेल खरीदें. हमारे पास इसकी कोई कमी नहीं है. हमारे पास बहुत सारा तेल है. और दूसरा, थोड़ी हिम्मत जुटाएं. यह काम पहले ही कर लेना चाहिए था. होर्मुज स्ट्रेट में जाएं, उसे अपने कब्जे में लें, उसकी सुरक्षा करें और उसका इस्तेमाल अपने लिए करें."

इससे कुछ हद तक यह समझ आता है कि ट्रंप अचानक अपने उस प्रपोजल से पीछे क्यों हट गए हैं, जिसमें होर्मुज स्ट्रेट से तेल टैंकरों को अमेरिकन नेवी की सुरक्षा में ले जाने की बात कही थी. ट्रंप इस बात से अच्छी तरह वाकिफ़ हैं कि अगर होर्मुज में लंबे समय तक रुकावट बनी रही, तो दुनिया के पास बहुत कम विकल्प बचेंगे. उस कमी को पूरा करने के लिए अमेरिका का कच्चा तेल और गैस तो है ही. सबसे अहम बात यह है कि अमेरिका का तेल एशिया तक 'केप ऑफ गुड होप' के रास्ते से पहुंचाया जाता है, जिसमें ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ की जरूरत नहीं पड़ती.

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अमेरिका के पास जो तेल है, उसमें वेनेजुएला की हिस्सेदारी को भी नहीं भूला जा सकता. वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है. निकोलस मादुरो के पकड़े जाने के बाद, ट्रंप ने देश की तेल बिक्री और उससे होने वाली कमाई पर कंट्रोल कर लिया है. फरवरी में अमेरिका को वेनेजुएला से 80 मिलियन बैरल से ज्यादा तेल मिला.

हालांकि, ऐसा भी नहीं है कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप होर्मुज संकट पर हार मान लेंगे और मुस्कुराते हुए चले जाएंगे. तेल की कीमत दुनिया भर में तय होती है. इसलिए किसी भी रुकावट का, खासकर गल्फ में, पूरे मार्केट पर असर पड़ेगा. 

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होर्मुज संकट पर 35 देशों की बैठक, अमेरिका शामिल नहीं

डॉनल्ड ट्रंप की ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ पर बयानबाजी के बीच, ब्रिटेन ने 35 देशों की वर्चुअल बैठक बुलाई है. दिलचस्प बात यह है कि अमेरिका इनमें शामिल नहीं होगा. प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने कहा है कि इस बैठक में 35 देश मिलकर यह तय करेंगे कि कौन-कौन से कूटनीतिक और राजनीतिक कदम उठाए जा सकते हैं, ताकि समुद्री रास्ते को फिर से खोला जा सके, फंसे हुए जहाजों और नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और जरूरी सामानों की आवाजाही फिर से शुरू हो सके.

वीडियो: ट्रंप का 19 म‍िनट का भाषण, स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज पर क्या दावे कर गए?

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