इजरायल और लेबनान आखिरकार जंग रोकने को तैयार हो गए हैं. दोनों देश सीजफायर के लिए सहमत हो गए हैं. बीते कुछ दिनों से अमेरिका के वाशिंगटन डीसी में दोनों देशों के बीच शांति वार्ता चल रही थी. अमेरिका में जारी बयान के मुताबिक जो समझौता हुआ है, उसके तहत ईरान समर्थित हथियारबंद गुट हिजबुल्लाह भी इजरायल के खिलाफ जंग रोकेगा. साथ ही वो अपने सभी लड़ाकों को लेबनान के साउथ लिटानी सेक्टर से भी पीछे हटाएगा.
इजरायल-लेबनान सीजफायर के लिए राजी हो गए, अब ईरान-अमेरिका समझौता हो जाएगा?
अमेरिका में हुई इस डील के मुताबिक इजरायल के खिलाफ ईरान समर्थित हथियारबंद गुट हिजबुल्लाह जंग रोक देगा. साथ ही वो अपने सभी लड़ाकों को लेबनान के साउथ लिटानी सेक्टर से भी पीछे हटाएगा.


रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक दोनों पक्षों ने शांति वार्ता के बाद एक साझा बयान जारी किया है. इस बयान में कहा गया,
'अमेरिका के गाइडेंस में दोनों पक्षों ने सीजफायर पर सहमति बना ली है. समझौते के मुताबिक अमेरिका की देखरेख में पायलट जोन बनाए जाएंगे. साथ ही वहां पर मौजूद नॉन स्टेट एक्टर (जैसे हिजबुल्लाह) को वहां से हटना होगा. इसके बाद सिर्फ लेबनान की सेना ही उस जगह का कंट्रोल लेगी.
ये पहला मौका नहीं है जब इजरायल और लेबनान ने जंग रोकने की बात कही हो. इससे पहले अप्रैल 2025 में भी इजरायल और लेबनान ने दुश्मनी खत्म करने और जंग रोकने पर सहमति जताई थी. बाद में इस समझौते माने सीजफायर को मई में आगे भी बढ़ाया गया था, लेकिन फिर भी हिंसा जारी रही. हर दिन किसी न किसी हमले और झड़प की खबर आती रही. लेबनान के सिक्योरिटी एजेंसियों से जुड़े सूत्रों ने रॉयटर्स को बताया कि 3 जून को भी को साउथ लेबनान में इजरायली ड्रोन हमलों में कम से कम छह लोग मारे गए. साथ ही राजधानी बेरूत के साउथ में भी एक कार को निशाना बनाया गया. वहीं इजरायल का कहना है कि उस पर भी हमले हुए हैं. उसने कहा कि उसने एक दुश्मन एयरक्राफ्ट को अपनी सीमा में आने से रोका, जिसे शायद हिज्बुल्लाह ने ही दागा था.
सीजफायर समझौते के बाद पीछे हटा इजरायलअमेरिका में हुई शांति वार्ता के बाद आखिरकार इजरायली सेना पीछे हटने लगी है. 1 जून को हुई बातचीत के बाद इजरायल ने साउथ लेबनान से अपनी सेना को पीछे हटाना शुरू कर दिया है. साथ ही हिज्बुल्लाह ने भी इजरायल पर हमले रोक दिए हैं. इजरायल ने मार्च 2026 में हिज्बुल्लाह का पीछा करते हुए साउथ लेबनान में घुसने की बात कही थी.
दूसरी ओर अमेरिका-ईरान के सीजफायर में भी ईरान ने लेबनान से जुड़ी एक शर्त रखी है. ईरान ने कहा है कि वह समझौते पर तब तक सहमत नहीं होगा जब तक कि सीजफायर में लेबनान भी शामिल न हो. यही वजह है कि अमेरिका ने लेबनान में सीजफायर करवाने में अहम भूमिका निभाई है.
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