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'गलती बोर्ड की, कॉपी रीचेक के पैसे क्यों दें?' छात्रों ने सवाल उठाया, 'ग्रेस मार्क' भी मांगा

स्टूडेंट्स को अब हायर एजुकेशन के लिए कहीं न कहीं अप्लाई करना होता है. उन्हें इंजीनियरिंग, मेडिकल, कॉमर्स और देश से बाहर की यूनिवर्सिटी/कॉलेज में दाखिला लेना होता है. लेकिन वो स्कैन्ड आंसर शीट, वेरिफिकेशन के रिजल्ट और री-इवैल्यूएशन के परिणामों के इंतजार में है.

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स्टूडेंट्स ने CBSE की फीस लेने वाली बात पर विरोध जताया है (PHOTO-X)

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  • छात्रों ने सीबीएसई से ग्रेस मार्क्स देने और वेरिफिकेशन व री-इवैल्यूएशन की फीस माफ करने की मांग की है, क्योंकि उन्हें नए ऑन स्क्रीन मार्किंग सिस्टम से कम अंक मिले हैं।
  • छात्रों की मांगों का कारण है कि आंसर शीट स्कैनिंग और मूल्यांकन में त्रुटि के चलते कई अंकों में कमी आई है, जिससे उनके उच्च शिक्षा में दाखिले पर असर पड़ रहा है।
  • इस विवाद के कारण छात्र एडमिशन प्रक्रिया में देरी से आगे की पढ़ाई प्रभावित हो सकती है, जिससे वे वित्तीय बोझ और समय की हानि का सामना कर रहे हैं।

देश भर में स्टूडेंट्स सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) से एक मांग कर रहे हैं. पहला ये कि उन्हें ग्रेस मार्क्स दिए जाएं. दूसरा, वेरिफिकेशन और री-इवैल्यूएशन की फीस माफ की जाए. स्टूडेंट्स का कहना है कि सीबीएसई के नए ऑन स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम की वजह से उनके नंबर कम आए हैं. साथ ही कई आंसर चेक ही नहीं हुए. आंसर कॉपी का एक्सेस मिलने में भी देरी हुई. जाहिर है कि परीक्षा में मिले नंबर्स के आधार पर ही छात्रों को आगे की पढ़ाई के लिए एडमिशन मिलता है. ऐसे में एक तरह से सीबीएसई की ‘गड़बड़ी’ से प्रभावित छात्र बोर्ड से मुआवजा मांग रहे हैं.   

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एडमिशन पर लटकी तलवार 

स्टूडेंट्स की इन मांगों के पीछे कुछ बहुत ही वाजिब कारण गिनाए जा रहे हैं. सबसे अहम ये है कि स्टूडेंट्स को अब हायर एजुकेशन के लिए कहीं न कहीं अप्लाई करना होगा. उन्हें इंजीनियरिंग, मेडिकल, कॉमर्स और देश से बाहर की यूनिवर्सिटी या कॉलेज में दाखिला लेना होता है. लेकिन स्टूडेंट्स स्कैन्ड आंसर शीट, वेरिफिकेशन के रिजल्ट और री-इवैल्यूएशन के रिजल्ट के इंतजार में हैं. बताया गया कि यूनिवर्सिटी या कॉलेज को सीबीएसई के विवाद और गड़बड़ी से कोई मतलब नहीं. एडमिशन के लिए वो अपनी डेट आगे नहीं बढ़ाएंगे. इससे स्टूडेंट्स का पूरा एक साल बर्बाद हो सकता है.

कई स्टूडेंट्स का कहना है कि उन्हें ऐसी ‘गलती’ के पैसे देने के लिए मजबूर न किया जाए, जिसकी वजह सीबीएसई का खुद का इवैल्यूएशन प्रोसेस है. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक सीबीएसई को 5 जून तक वेरिफिकेशन और री-इवैल्यूएशन के लिए लगभग 60 हजार आवेदन मिले हैं. दिल्ली की एक स्टूडेंट अनन्या शर्मा कहती हैं, 

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हम कोई फ्री के नंबर नहीं मांग रहे. हम सिर्फ निष्पक्षता की मांग कर रहे हैं. अगर स्कैनिंग या इवैल्युएशन में कोई दिक्कत है, तो उसे ढूंढने के लिए स्टूडेंट्स पैसे क्यों देंगे. हम में से कई लोगों की एडमिशन की डेट तो पहले ही निकल चुकी है. 

बच्चे-पेरेंट्स सब परेशान, कब जागेगी सरकार

सोशल मीडिया स्टूडेंट्स अपनी आंसर शीट के स्क्रीनशॉट, मार्क्स की तुलना और री-इवैल्युएशन के आवेदन साझा कर रहे हैं. न्याय की मांग करने वाले हैशटैग तेजी से वायरल होतो जा रहे हैं. वहीं पेरेंट्स एसोसिएशंस का कहना है कि यह मुद्दा अब केवल किसी की पर्सनल शिकायतों तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे इवैल्युएशन सिस्टम पर ही सवाल उठा रहा है. खासकर साइंस के स्टूडेंट्स के लिए यह मामला और गंभीर हो गया है. क्योंकि जेईई और दूसरी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे कई स्टूडेंट्स ने कहा कि फिजिक्स, केमिस्ट्री या मैथ्स में दो से पांच अंकों का अंतर भी एलिजिबिलिटी, मेरिट रैंकिंग और काउंसलिंग को प्रभावित कर सकता है.

स्टूडेंट्स और पेरेंट्स ने इस मुद्दे से जुड़े वित्तीय बोझ की ओर भी इशारा किया है. हालांकि सीबीएसई ने शुल्क कम कर दिया है, लेकिन कई परिवारों का कहना है कि यदि शिकायतें इवैल्युशन संबंधी समस्याओं से जुड़ी हैं तो कोई भी शुल्क अनुचित है.

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