अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे ताजा संघर्ष के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने अब साफ-साफ कहा है कि ईरान के साथ सीजफायर समझौता खत्म हो गया है. तुर्किए में नाटो शिखर सम्मेलन में बोलते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने गुस्से में ईरानी नेताओं को ‘नीच और बीमार’ तक बता दिया. उन्होंने कहा कि वे अब तेहरान के साथ कोई बातचीत नहीं करना चाहते.
'ईरान के नेता नीच और बीमार मानसिकता वाले', ये बोल ट्रंप ने सीजफायर खत्म होने का ऐलान किया
अमेरिका और ईरान एक बार फिर से आमने-सामने आ गए हैं. स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में तीन जहाजों को निशाना बनाए जाने के बाद अमेरिका ने ईरान में बड़े पैमाने पर हमला किया है. इन हमलों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान के सात सीजफायर समझौता खत्म हो गया है.


इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, तीन हफ्ते पहले अमेरिका और ईरान ने सीजफायर को लेकर मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) साइन किया था. इसके तहत 60 दिनों के भीतर समझौते को अंतिम रूप देने की बात हुई थी. राष्ट्रपति ट्रंप ने MoU के सवाल पर कहा,
मैं अब ईरान से कोई संबंध नहीं रखना चाहता.
अमेरिकी राष्ट्रपति के इस बयान के बाद से तेल की कीमतों में 3 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी हो गई है. हालांकि ग्राउंड लेवल पर इसका क्या असर होगा, ये अभी क्लियर नहीं है.
कुछ ही हफ्ते पहले अमेरिका और ईरान ने युद्ध खत्म करने के समझौते पर साइन किया था. लेकिन अब इस समझौते का टिक पाना मुश्किल लग रहा है. ईरान स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पर अपने कंट्रोल का फायदा लेना चाहता है, जबकि अमेरिका को ये मंजूर नहीं है. ग्लोबल एनर्जी का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा हॉर्मुज के रास्ते जाता है.
8 जुलाई को अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरानी नेतृत्व को कोसने में कोई कसर नहीं छोड़ी. उन्होंने कहा,
वे नीच और बीमार मानसिकता वाले लोग हैं. वे क्रूर और हिंसक लोग हैं. अगर उनके पास परमाणु हथियार होता तो वे उसका भी इस्तेमाल करने से नहीं चूकते.
'बातचीत समय की बर्बादी'
ईरानी नेतृत्व को खरी-खोटी सुनाने के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि दोनों पक्षों के वार्ताकार समझौते पर बात जारी रख सकते हैं. फिर उन्होंने इस कोशिश को समय की बर्बादी भी बता दिया. उन्होंने कहा,
सनकी लोगों से बातचीत करने से कुछ हासिल नहीं होगा. मैं अपने वार्ताकारों से बात करूंगा. मेरी राय में उनसे बातचीत करना समय की बर्बादी है. वे झूठे हैं.
इससे पहले ईरानी विदेश मंत्रालय ने भी समझौते को लेकर कड़ा रुख अपनाया था. उनकी ओर से कहा गया कि अमेरिकी हमलों ने युद्ध खत्म करने के समझौते के मूल तत्व को ही प्रभावहीन बना दिया है.
अमेरिका और ईरान के बीच हवाई हमले
7 जुलाई को अमेरिका ने ईरान पर बड़े पैमाने पर अटैक किया. जिससे मिडिल ईस्ट में पिछले कुछ दिनों की शांति खत्म हो गई. अमेरिका ने ईरान की तेल बिक्री पर भी फिर से बैन लगा दिया है. एक अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि अमेरिका ने ईरान के 80 से ज्यादा सैनिक ठिकानों को टारगेट करके हमले किए हैं. उन्होंने बताया कि मई के बाद से ये अमेरिका का ईरान पर किया गया सबसे बड़ा अटैक है.
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ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई का अंतिम संस्कार समारोह हफ्ते भर चला. इस दौरान सर्विलांस सिस्टम, मिसाइल फैसिलिटीज और बंदरगाहों को अमेरिका ने निशाना बनाया. 6 जुलाई की रात बंदर अब्बास, सिरिक और केशम द्वीप पर भी विस्फोट की आवाजें सुनी गईं.
अमेरिका ने बताया कि ये हमले स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से गुजर रहे तीन कमर्शियल जहाजों पर ईरान के हमले के जवाब में किए गए थे. 6 जुलाई को जिन जहाजों पर अटैक हुआ उनमें 'अल-रेकाय्यात' भी शामिल था. ये जहाज ओमान के तट से होते हुए भारत जा रहा था.
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