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USAID से अमेरिका में 1,600 कर्मचारियों की छंटनी, दुनियाभर से कुछ को छोड़कर सभी को छुट्टी में भेजा गया

Trump firing 1,600 USAID Employees in US: USAID के कर्मचारियों को ईमेल भेजा गया है. इस ईमेल में कहा गया है कि USAID के ‘वर्कफ़ोर्स में कमी’ की कोशिश की जा रही है. इसी के तहत लगभग 1,600 कर्मचारियों की छंटनी की जाएगी.

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क़रीब 1,600 कर्मचारियों को निकाला जा रहा है. (फ़ोटो - AP)

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप (Donald Trump) यूनाइटेड स्टेट्स एजेंसी फॉर इंटरनेशनल डेवलपमेंट यानी USAID को लेकर लगातार हमलावर हैं. इस बीच, ट्रंप प्रशासन ने अमेरिका में USAID के क़रीब 1,600 पदों को ख़त्म करने की घोषणा की है. साथ ही, दुनियाभर में USAID के कुछ कर्मचारियों को छोड़कर बाक़ी सभी को छुट्टी में भेजने का फ़ैसला किया गया है. हालांकि, इन कर्मचारियों को उनकी सैलरी मिलती रहेगी.

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इसे लेकर USAID के कर्मचारियों को एक ईमेल भेजा गया है. इस ईमेल में कहा गया है कि USAID के ‘वर्कफ़ोर्स में कमी’ की कोशिश की जा रही है. इसी के तहत लगभग 1,600 कर्मचारियों की छंटनी की जाएगी. तमाम न्यूज़ एजेंसिस और मीडिया संस्थानों ने इस कर्मचारियों के ईमेल को देखकर, इस छंटनी की पुष्टि की है.

मसलन, न्यूज़ एजेंसी रॉयटर्स ने निकाले जा रहे कर्मचारियों में से एक को भेजे गए ईमेल के बारे में बताया. रॉयटर्स के मुताबिक़, इस ईमेल में लिखा था,

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USAID के वर्कफ़ोर्स में कटौती हो रही है. आपको बताते हुए खेद हो रहा है कि इस कार्रवाई से आप भी प्रभावित हैं. जिन लोगों को ये नोट मिला है, उन्हें 24 अप्रैल से फेडरल सर्विस से निकाल दिया जाएगा.

एक और उदाहरण से समझिए. न्यूज़ एजेंसी AP ने एक कर्मचारी के ईमेल का हवाला देते हुए बताया,

23 फरवरी, 2025 को रात 11:59 बजे से, ज़रूरी कामों के लिए सेलेक्ट किये गए कर्मचारियों को छोड़कर, सभी USAID कर्मियों को ग्लोबली प्रशासनिक छुट्टी पर रखा जाएगा.

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लेकिन एक पेच इसमें भी है. अभी तक ये स्पष्ट नहीं हो पाया है कि इन ‘ज़रूरी कामों के लिए सेलेक्ट किये गए कर्मचारियों’ में कितने लोग शामिल रहेंगे. माने, मोटा-माटी बात ये कि कितने कर्मचारियों को छुट्टी पर नहीं भेजा जाएगा.

हालांकि, USAID डिप्टी एडमिनिस्ट्रेटर पीट मारको का कहना है कि USAID के कर्मचारियों और उनके परिवारों की विदेश यात्रा की व्यवस्था की ज़रूरत होगी. इसके लिए 600 अमेरिकी कर्मचारी वहां मौजूद रहेंगे.

ये फ़ैसला अमेरिकी फेडरल जज से USAID के वर्कफ़ोर्स में कमी को लेकर हरी झंडी मिलने के बाद लिया गया है. इससे पहले, डॉनल्ड ट्रम्प ने हज़ारों USAID कर्मचारियों को नौकरी से निकालने की कोशिश की थी. लेकिन उन्हें कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ा. कई पूर्व अधिकारियों ने इसे लेकर अमेरिकी कोर्ट में याचिका दायर की. 

मांग की गई कि सरकार की इस योजना को रोके रखा जाए. लेकिन अमेरिकी जज कार्ल निकोल्स ने इन मांगों को ख़ारिज कर दिया. उन्होंने 21 फ़रवरी के फ़ैसला सुनाया कि ये रोक स्थायी नहीं होगी. बताते चलें, अरबपति एलन मस्क के सरकारी सक्षमता विभाग (DOGE) का नेतृत्व करते हैं. ये DOGE लंबे समय से USAID को ख़त्म करने की कोशिश में है. 

लेकिन कई लोग मानते हैं कि USAID के ज़रिए अमेरिका, विदेशों में प्रभाव रखता है. ये लोग USAID को अमेरिकी ‘सॉफ़्ट पावर’ का एक महत्वपूर्ण हथियार मानते हैं. उनका कहना होता है कि अमेरिकी विदेशी सहायता के लिए USAID, डिलीवर का एक सिस्टम है.

ये भी पढ़ें - USAID फंडिंग के पैसे से खेला भारत में हुआ या कहीं और?

भारत में बवाल

बीते दिनों ख़बर आई कि अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने भारत को मिलने वाली 21 मिलियन डॉलर की सहायता रोक दी है. इस पर BJP और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया. लेकिन फिर इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट आई. इसमें बताया गया कि ये पैसे भारत के लिए नहीं, बल्कि बांग्लादेश के लिए अलॉट हुए थे. 

बाद में अमेरिका के प्रतिष्ठित अखबार वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट में भी यही बात कही गई. इस रिपोर्ट में दावा किया गया कि भारत को ऐसी कोई फंडिंग नहीं की जा रही है. रिपोर्ट में कहा गया कि ट्रंप ने भारत को दी जाने वाली जिस सहायता का जिक्र किया था, ऐसे किसी भी कार्यक्रम का कोई रिकॉर्ड नहीं है.

वीडियो: USAID: भारत को 21 मिलियन डॉलर देने पर वाशिंगटन पोस्ट का बड़ा खुलासा, क्या Donald Trump ने झूठ बोला?

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