बाहुबली का अलग क्रेज़ चला था. पहली ऐसी फ़िल्म जिसने बॉक्सऑफ़िस पर हज़ार करोड़ रुपए से ज़्यादा की कमाई की. ये फ़िल्म हमारे देश की गीता, कुरान जैसी हो गई है. कैसे? वो ऐसे कि इसके खिलाफ़ लोग एक शब्द सुनने को तैयार नहीं होते. लेकिन अपनी ब्रेन सर्जरी के वक़्त भी स्क्रीन पर बाहुबली देखना? ये थोड़ा ज़्यादा हो गया.
'बाहुबली' फिल्म फिर से ख़बरों में है, वजह बड़ी प्यारी है
इस बार मामला पैसे नहीं, पुण्य कमाने का है.

रोज़ ख़बर सुनने को मिलती है कि देश में मेडिकल सेवाओं की क्या दुर्गती हो रही है. रिपोर्ट्स सामने आती हैं कि डॉक्टर्स की लापरवाही के चलते मरीज़ की जान गई. बॉम्बे टाइम्स ने इन सबसे बिलकुल हटके एक रिपोर्ट छापी है. ये घटना आंध्र प्रदेश के गुंटूर शहर की है. 43 साल की नर्स विनया कुमारी को ब्रेन ट्यूमर डिटेक्ट हुआ था. 21 सितंबर को उसे अस्पताल में भरती कराया गया. यहां उसकी जोखिम भरी ब्रेन सर्जरी होनी थी.
सर्जरी के वक़्त बहुत ज़रूरी था कि विनया होश में रहे. डॉक्टरों ने स्क्रीन पर 'बाहुबली' चला दी. पूरी सर्जरी विनया ये फ़िल्म देखती रही. ब्रेन सर्जरी सफल रही और इसे 'बाहुबली ब्रेन सर्जरी' नाम दिया गया.
इन न्यूरोसर्जन्स में से एक हैं डॉक्टर श्रीनिवास. उन्होंने बताया, 'इस सर्जरी में ज़रूरी था कि मरीज़ होश में रहे. इस फ़िल्म ने ऐसा करने में हमारी मदद की. मरीज़ सर्जरी के वक़्त एक बार भी नहीं घबराई. विनया ने फ़िल्म एंजॉय करने के साथ-साथ गाने भी गुनगुनाए.'
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