सुप्रीम कोर्ट ने 27 जुलाई को कहा है कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन का अधिकार संविधान के तहत "पूरी तरह से संरक्षित" है. साथ ही इस बात पर जोर दिया कि केवल आंदोलन होने के कारण लाठीचार्ज नहीं किया जा सकता है. 20 जुलाई को ‘चलो संसद’ मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया गया. इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं दायर की गईं. इन याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने ये बात कही.
'प्रदर्शन करेंगे तो लाठीचार्ज कर दोगे?', सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस एक्शन पर लगाई फटकार
Supreme court on lathicharge: सुप्रीम कोर्ट ने 27 जुलाई को यह स्पष्ट कर दिया कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन का अधिकार संविधान से मिला है. अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि केवल आंदोलन होने के कारण लाठीचार्ज नहीं किया जा सकता है.

लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, चीफ जस्टिस ऑफ़ इंडिया सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच याचिकाओं की सुनवाई कर रही थी. अदालत ने यह भी माना कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई की जांच होनी चाहिए. साथ ही, कहा कि देश भर में प्रदर्शन को संभालने के लिए एक जैसे नियम होने चाहिए.
CJI सूर्यकांत ने क्या कहा?सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने कहा,
‘भारत का संविधान नागरिकों को ये अधिकार देता है कि वो शांतिपूर्ण प्रोटेस्ट कर सकते हैं. जब तक प्रोटेस्ट शांतिपूर्ण है और पूरी तरह से कानून के दायरे में है तब तक उनपर बल का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है. अगर बल का इस्तेमाल किया गया है तो इसकी स्वतंत्र जांच होगी. ये सिर्फ दिल्ली की बात नहीं है. केवल आंदोलन हो रहा है इस वजह से लाठीचार्ज नहीं किया जा सकता है.’
कोर्ट ने 20 जुलाई के मार्च के दौरान घायल हुए पुलिसकर्मियों को भी सुनवाई के दौरान उपस्थित रहने को कहा है. अदालत मंगलवार यानी 28 जुलाई को सभी याचिकाओं पर सुनवाई करेगी. इसमें दिल्ली समेत दूसरे शहरों में हुए प्रदर्शन के दौरान लाठीचार्ज की याचिकाएं भी शामिल हैं.
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वकील चांद कुरैशी एक याचिका लेकर कोर्ट में पेश हुए. याचिका में मांग की गई कि कोर्ट पुलिस एक्शन की जांच करे. साथ ही भीड़ को कंट्रोल करने के लिए सादे कपड़ों में सुरक्षा बल की तैनाती पर बैन लगाया जाए. एक और याचिका दिल्ली पुलिस कमिश्नर और दिल्ली सरकार के खिलाफ दायर की गई है. कहा गया कि संविधान के अनुच्छेद 14, 19(1)(a), 19(1)(b), 19(1)(d) और 21 के तहत नागरिकों के मौलिक अधिकार का हनन हुआ है.
विपक्षी नेता राहुल गांधी ने भी दिल्ली पुलिस पर आरोप लगाया कि ‘चलो संसद’ मार्च के दौरान पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया है. जबकि दिल्ली पुलिस ने इन आरोपों से साफ इनकार किया है. एक याचिका में आरोप लगाया गया कि बिहार के सिवान जिले में प्रदर्शन के दौरान AK-47 गन का इस्तेमाल किया गया है.
वीडियो: CJP प्रदर्शन में लाठीचार्ज का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, क्या बोले CJI सूर्यकांत?













