वो लिखते हैं-
23 साल आर्मी में और 4 साल कॉरपोरेट में काम करने के बाद मुझे अब सिर्फ जॉब नहीं चाहिए था. NSDC से जुड़ने के बाद मुझे स्किल इंडिया और उड़ान की जिम्मेदारी दी गई. जितने भी स्किल सेंटर खुलने थे, उसकी जांच करना और रेटिंग देने की जिम्मेदारी मेरी थी. दूसरी जिम्मेदारी कश्मीर के नौजवानों के लिए उड़ान सेवा थी.अजय कुमार ने लिंक्डइन पर एक पोस्ट में आरोप लगाया है कि केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने उनको गालियां दी हैं. अजय कुमार ने जो आरोप लगाए हैं, वो हम आपको पढ़वा रहे हैं. उन्होंने लिखा है-
घटना एक साल पहले की है. दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में स्कील इंडिया का कार्यक्रम था. मुझे उस कार्यक्रम में नहीं जाना था. लेकिन केंद्रीय मंत्री के ऑफिस से फोन आया कि मुझे वहां रहना है. धर्मेंद्र प्रधान अपने किसी खास व्यक्ति के लिए स्किल सेंटर को मान्यता दिलवाना चाहते थे. मैंने मंत्रालय के नियमों का हवाला देते हुए ऐसा करने से इनकार कर दिया. मैंने कहा कि आपका मौखिक आदेश लागू नहीं हो सकता. इसके बाद वह आपा खो बैठे. उन्होंने मुझे सबके सामने गालियां देनी शुरू कर दी. सबके सामने ही उन्होंने मुझे बर्खास्त करने की भी धमकी दी. जब ये सब हो रहा था, कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय के संयुक्त सचिव राजेश अग्रवाल मौजूद थे. राष्ट्रीय कौशल विकास निगम के प्रबंधन निदेशक मनीष कुमार भी थे. किसी ने कुछ नहीं कहा.अजय कुमार ने आगे लिखा है-
मंत्री जब मुझे गालियां दे रहे थे तो वह शायद मेरा आर्मी बैकग्राउंड भूल गए थे. लेकिन आर्मी में रहने के दौरान हमने सेल्फ रिस्पेक्ट सीखी है. मैंने मंत्री से कहा कि आप अपने शब्दों पर ध्यान दीजिए. मैंने सिर्फ गाइडलाइन का पालन किया है. उन्होंने (धर्मेंद्र प्रधान) गालियां देते हुए मुझे बर्खास्त करने की धमकी दी. रात का समय था. देर हो चुकी थी. उन्होंने एनएसडीसी के एमडी को निर्देश दिया कि बर्खास्तगी पर उन्हें अगली सुबह पूरी रिपोर्ट दी जाए.अजय कुमार लिखते हैं-
अगली सुबह मंत्री को बताया गया कि अजय कुमार ने कुछ भी गलत नहीं किया है. इसके बाद मुझ पर इस्तीफे के लिए दबाव बनाया गया. ऐसा नहीं करने पर देख लेने की धमकी दी गई. परिवार को देख लेने की धमकी दी गई.अजय कुमार लिखते हैं-
एमडी ने मुझसे कहा कि एक लाइन का इस्तीफा लिख दीजिए. यह मंत्री को संतुष्ट करने के लिए काफी होगा. मैंने अपनी पत्नी से बात की. उन्होंने मुझसे कहा कि लिखित में कुछ भी देना मतलब अपने पीठ में छूरा घोंपने जैसा होगा. मैं भविष्य के संकट से अवगत था लेकिन मुझे अब भी सिस्टम में भरोसा था.अजय कुमार के मुताबिक उन्होंने अपने इस्तीफे में लिखा-
'सर मैं सेना का आदमी हूं. मैं आप पर वैसा ही विश्वास दिखा रहा हूं जैसा मैंने युद्ध के दौरान अपने कमांडरों में दिखाया था.'अगली शाम मुझे NSDC के MD मनीष कुमार ने सूचित किया कि मेरा इस्तीफा मेरी इच्छा के अनुसार स्वीकार कर लिया गया है और मुझे 31 जुलाई 2018 तक रिलीव कर दिया जाएगा. NSDC में यह मेरा अंतिम दिन था.
इस घटना के 9 महीने बाद अजय कुमार ने पब्लिक प्लेटफॉर्म पर इसका जिक्र किया है. उन्होंने बताया कि स्कfल इंडिया छोड़ने के बाद उन्हें चार नौकरियों के प्रस्ताव मिले, लेकिन लेकिन उन्होंने हर जगह NSDC छोड़ने का वही कारण बताया जो उनके साथ हुआ था. जैसे ही इस घटना के बारे में कंपनियों को पता चलता, वे जॉब देने से पीछे हट जाती थीं. अजय कुमार ने 22 अप्रैल को सार्वजनिक रूप से अपनी बात रखी. अजय कुमार के गंभीर आरोपों पर धर्मेंद्र प्रधान के मीडिया कंसलटेंट हर्ष रावत का कहना है कि इन आरोपों में कोई सच्चाई नहीं है. वहीं नेशनल स्किल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (NSDC) की ओर से आरोपों पर जवाब आया है.
संस्थान का कहना है कि
कुछ न्यूज पोर्टल ने एनएसडीसी के पूर्व कर्मचारी के बेबुनियाद आरोपों को प्रकाशित किया. इससे संस्थान चिंतित है. ऐसा लगता है कि ये आरोप व्यक्ति विशेष की छवि खराब करने के लिए लगाए गए हैं. एनएसडीसी एक सम्मानित संस्था है, जो अपनी बेहतर एचआर पॉलिसी और कॉरपोरेट गवर्नेंस के लिए जाना जाता है. पूर्व कर्मचारी की ओर से किसी व्यक्ति विशेष की छवि को खराब करने के लिए लगाए गए बेबुनियाद आरोपों को एनएसडीसी खारिज करता है. आरोप लगाने वाले पूर्व कर्मचारी ने प्रोफेशनल सलाह मानने की बजाय खुद ही इस्तीफा दिया था.संस्थान का आगे कहना है कि
एनएसडीसी स्कील इंडिया मिशन को आगे बढ़ाने के लिए कमिटेड है. टारगेट पूरा करने के लिए समय-समय पर हम उसकी समीक्षा करते रहते हैं. कर्मचारियों के प्रदर्शन की जांच करना मॉनिटरिंग प्रोसेस का हिस्सा है. आरोप लगाने वाले कर्मचारी प्रोसेस से संतुष्ट नहीं थे. यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि ये सारी बातें पब्लिक डोमेन मे नहीं आईं. हम ये भी उम्मीद करते हैं कि किसी के गंभीर आरोपों को, जो किसी की छवि को नुकसान पहुंचाते हैं, छापने से पहले हमारी प्रतिक्रिया या सफाई का इंतजार करना चाहिए था. एनएसडीस एक नॉट फॉर प्रॉफिट कंपनी है. 2009 से यह स्कील डेवलपमेंट के लिए काम कर रही है. कंपनी में 230 कर्मचारी हैं. हम अपने सभी स्टेक होल्डर्स के साथ पार्टनरशिप के लिए कमिटेड हैं.
'बाड़मेर रिफाइनरी में नौकरियां हैं, लेकिन यहां के कॉलेज कोर्स ही नहीं पढ़ाते'












