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धारदार एपिसोड 2 : आज़ादी. मगर किस से?

सरदार खान ढूंढ लाये हैं वो असल वजहें जिनसे आज़ादी मांग रहे थे जेएनयू के छात्र. वीडियो देखें.

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फोटो - thelallantop
देश में दो चीज़ों का शोर है. क्रिकेट और आज़ादी. क्रिकेट का क्या है? अभी खतम हो जायेगा. आज़ादी की गूँज रहेगी. आज़ादी अचानक से ही डिमांड में आ गयी. कर्ट्सी कन्हैया, उमर ख़ालिद, वकील्स, मंत्रीज़, साध्वीज़, योगीज़ ऐंड खेर्स! एक और है जो आज़ादी को दूर तक पहुंचा रहा है - टीवी. टीवी वो भी केबिल वाली. काहे से दूरदर्शन पे सब कुछ एक्स्ट्रा-स्वीट चल रहा होता है. तो अब हुआ ये कि जहाँ केबिल टीवी नहीं है, वहां लोह समझ नहीं पा रहे हैं कि आखिर ये कौन सी आज़ादी है जो मांगी जा रही है? ये वीडियो उन लोगों को ध्यान में रखकर बनाया गया है. उन सभी लोगों को ये समझाया जाएगा कि आखिर असल मुद्दा है क्या और किस बात से आज़ादी चाहिए इन सभी लोगों को. अब कहोगे कि जहां केबिल नहीं पहुंच रहा है वहां फेसबुक और यूट्यूब कैसे पहुंचेगा? तो भइय्या, मेरे रंगीले रतन, नूरे नज़र इतना सीरियसली काहे लेते हो हमारी बात को. इस वीडियो को भी न लेना. क्यूंकि हम बनाते वक़्त भी सीरियस नहीं थे. वीडियो देखो यार: https://www.youtube.com/watch?v=c5QdCpR9WHc&feature=youtu.be

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