अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के चलते शेयर मार्केट में निवेश करने वालों को तगड़ा झटका लगा है. युद्ध शुरू होने की तारीख( 27 फरवरी) से लेकर अब तक शेयर बाजार के निवेशकों के 27 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा डूब चुके हैं. ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से भारत के शेयर बाजारों (बीएसई-एनएसई) में करीब 6 परसेंट की गिरावट आ चुकी है. इस दौरान बंबई शेयर बाजार का सूचकांक सेंसेक्स करीब 5000 अंक गिरा है. गुरुवार 12 मार्च को जब हम यह स्टोरी लिख रहे थे (सुबह 10.30 बजे के आसपास) तब भी बांबे स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स करीब 500 अंकों की गिरावट के साथ कारोबार कर रहा था. इससे पहले आज जब बाजार खुला तो इससे भी ज्यादा गिरावट देखने को मिली.
ईरान जंग के बाद शेयर बाजार में डूबे 27 लाख करोड़, अपने पैसे सेफ रखने के लिए ये काम करें
अमेरिका-ईरान-इजरायल युद्ध के चलते शेयर मार्केट में निवेश करने वालों को तगड़ा झटका लगा है. ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से भारत के शेयर बाजार करीब 5 परसेंट गिर चुके हैं. ऐसे में आपको क्या करना चाहिए? जानकारों ने सब बताया.
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मनीकंट्रोल की एक रिपोर्ट बताती है कि गुरुवार को 9 बजकर 17 मिनट के आसपास बांबे स्टॉक एक्सचेंज का संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 946 अंक लुढ़ककर 75,918 अंक पर आ गया. इसी तरह से नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 50 296 अंक की गिरावट के साथ 23,571 अंक पर आ गया. 11 मार्च को भी शेयर बाजार में भारी गिरावट आई थी. कल सेंसेक्स 1,342 अंक और निफ्टी लगभग 395 अंक गिरकर बंद हुआ था.
निवेशकों के 27 लाख करोड़ स्वाहा!पश्चिम एशिया में जब से लड़ाई शुरू हुई है तब से शेयर बाजार के निवेशकों को तगड़ी चोट पहुंची है. करीब दो हफ्ते में ही शेयर बाजार के निवेशकों को करीब 27 लाख 50 हजार करोड़ की चपत लगी है. स्टॉक एक्सचेंजों के आंकड़ों से पता चलता है कि 27 फरवरी को जब शेयर बाजार हुआ था तो बांबे स्टॉक एक्सचेंज कुल मार्केट कैप करीब 463 लाख 50 हजार करोड़ रुपये के आसपास था. वहीं बिजनेस स्टैंडर्ड की एक खबर के मुताबिक 12 मार्च को सुबह 9 बजकर 42 मिनट के आसपास बीएसई में लिस्टेड कंपनियों का मार्केट 436 लाख करोड़ रुपये था.
मार्केट कैप शेयर बाजार में लिस्टेड कंपनियों का कुल वैल्यू को कहा जाता है. हालांकि शेयर बाजार में नोशनल लॉस होता है. शेयर बाजार में Notional Loss वह नुकसान होता है जो कागज पर दिखता है, लेकिन वास्तव में तब तक नहीं होता जब तक आप शेयर बेच नहीं देते. इस तरह से अगर बाजार चढ़ा तो निवेशकों के नुकसान की भरपाई भी हो जाएगी लेकिन और गिरा तो तगड़ा नुकसान भी उठाना पड़ सकता है.
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क्यों गिर रहा शेयर बाजार?जानकारों का कहना है कि शेयर बाजारों में गिरावट की कई वजहें हैं. लेकिन फिलहाल शेयर बाजार में जारी गिरावट की सबसे बड़ी वजह है कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आना. 10 मार्च को इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल का दाम करीब 120 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया था. 11 मार्च को क्रूड में कुछ नरमी आई थी और भाव 100 डॉलर के नीचे आ गया था लेकिन 12 मार्च को फिर क्रूड का दाम 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया है.
दुबई के जाने-माने बैकिंग समूह एमिरेट्स एनबीडी में वेल्थ मैनेजर धर्मेश भाटिया का कहना है कि कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और जियो पॉलिटिकल टेंशन की वजह से दुनियाभर के बाजारों को गिरावट बढ़ी है. इसके अलावा विदेशी निवेशक भारत के शेयर बाजार से पैसा निकाल रहे हैं. मनीकंट्रोल की एक खबर के मुताबिक विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने लगातार 9 कारोबार दिनों तक 6,267 करोड़ रुपये कीमत के शेयर बेच डाले हैं.
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निवेशकों को क्या करना चाहिए?शेयर बाजार में जारी भारी गिरावट के चलते निवेशक परेशान हैं. अब सोच रहे हैं कि मौजूदा हालात में अब क्या करना चाहिए और किस तरह की रणनीति बनानी चाहिए कि नुकसान से बच सकें. कौन से शेयर खरीदने चाहिए? युद्ध के इस दौर में किन सेक्टर से कमाई की जा सकती है? इन सब बातों को समझने के लिए हमने एक्सपर्ट्स से बात की.
कोलकाता स्थित ब्रोकरेज फर्म पीएचडी कैपिटल के फाउंडर और सीईओ प्रदीप हल्दर ने लल्लनटॉप से बातचीत में कहा कि बाजार में जारी भारी उठापटक को देखते हुए मौजूदा निवेशकों के लिए बेहतर यही है कि वे पैसे बचाकर रखें और ऐसी कंपनियों में पैसा लगाएं जिनकी बुनियाद मजबूत है. उनकी सलाह है कि निवेशक ब्लू-चिप कंपनियों में निवेश पर ध्यान केंद्रित करें.
इसके अलावा उनका कहना है कि एक ही बार में सारा पैसा शेयर बाजार निवेश करने के बजाय धीरे-धीरे निवेश करें. उनका ये भी कहना है कि बाजार में अभी जोखिम बना हुआ है क्योंकि जब भी बाजार में तेजी आएगी तो निवेशक शेयर बेचना शुरू कर सकते हैं. इससे बाजार और गिरने का खतरा बना हुआ है. निफ्टी की बात करें तो इसका महत्वपूर्ण सपोर्ट जोन लगभग 21,880- 21,900 है. इससे पहले कोई बड़ा सपोर्ट ज़ोन नहीं है. अगर वैश्विक हालात सुधरते हैं, तो बाजार तेजी से रिकवर भी कर सकता है. उनका कहना है कि अगर निफ्टी 24,300 का लेवल तोड़ता है तो आगे तेजी दिख सकती है.
प्रदीप हल्दर की सलाह है कि फॉर्मा कंपनियों और ‘अपस्ट्रीम ऑयल प्रोड्यूसर’ में दांव लगाना चाहिए. अपस्ट्रील ऑयल प्रोड्यूसर वे कंपनियां हैं जो कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की खोज और उत्पादन का काम करती हैं. उनका कहना है कि इस सेक्टर से जुड़ी कंपनियों जैसे कि ONGC और ऑयल इंडिया के शेयर खरीद सकते हैं. वहीं दवा कंपनियों में उन्होंने ल्यूपिन में निवेश की सलाह दी है.
ब्रोकरेज फर्म प्रॉफिटमार्ट सिक्योरिटीज के डायरेक्टर अविनाश गोरक्षकर ने लल्लनटॉप से बातचीत में कहा," जब तक पश्चिम एशिया में तनाव जारी रहेगा भारत के शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है. अगर युद्ध इस महीने के आखिर तक खत्म हो जाता है तो स्थिति काबू में आ सकती है. लेकिन जिस तरह से तनाव बढ़ रहा है उससे लगता है कि युद्ध जल्द थमने की संभवना कम है. अगर यह अप्रैल के बाद तक खिंचता है तो कंपनियों के मुनाफे पर दबाव बढ़ सकता है और इससे महंगाई बढ़ने का खतरा भी पैदा हो सकता है. "
इसके अलावा विदेशी निवेशक शेयर बाजार से पैसा निकाल रहे हैं उससे रुपया और कमजोर होगा. इस वजह से भारत का ट्रेड बैलेंस बिगड़ सकता है. उनका कहना है कि कुल मिलाकर बाजार में अभी अस्थिरता बनी रह सकती है और बाजार में गिरावट बढ़ सकती है. निफ्टी 50 के लिए 23,500 एक अहम स्तर माना जा रहा है . उनका कहना है कि जब तक भू-राजनीतिक हालात में सुधार नहीं होता, तब तक ऊपर की तेजी सीमित रह सकती है.
कई विशेषज्ञों का कहना है कि लंबी अवधि के निवेशकों को फिलहाल शेयर बाजार में निवेश करते समय अनुशासित रहना चाहिए. ब्रोकरेज फर्म जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के मुख्य निवेश रणनीतिकार वीके विजयकुमार कहते हैं, “इतिहास गवाह है कि युद्धों और भू-राजनीतिक तनावों का बाजारों पर असर आमतौर पर कुछ दिन ही रहता है. इसलिए निवेशकों को शेयर बेचने की जल्दबाजी नहीं दिखानी चाहिए.” विजयकुमार के मुताबिक हाल ही में बाजार में आई गिरावट ने कई लार्ज-कैप शेयरों को खरीदने लायक स्तर पर ला दिया है. इन शेयरों की वैल्यूएशन पहले के मुकाबले बाजिव स्तर पर आ गई है. उनका कहना है कि बैकिंग एवं फाइनेंस सेक्टर, ऑटोमोबाइल, फार्मास्यूटिकल्स और डिफेंस सेक्टर लंबी अवधि में बढ़िया मुनाफा देते रहेंगे.
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वहीं, ब्रोकरेज फर्म एक्सिस एसेट मैनेजमेंट के अनुसार, “अमेरिका-ईरान-इजराइल युद्ध एक गंभीर भू-राजनीतिक घटना है, लेकिन भारतीय निवेशकों के लिए यह पहली घटना नहीं है." एक्सिस एसेट मैनेजमेंट ने आगे कहा कि कुछ दिन तक रुपये के कमजोर होने और तेल की कीमतों में तेजी की वजह से भारतीय शेयर बाजारों में गिरावट आ सकती है. फर्म ने निवेशकों को घबराहट के दौर में शेयर न बेचने की सलाह दी है. कंपनी का कहना है कि जिन लोगों ने इससे पहले राजनीतिक तनावों के दौर के समय जब भी शेयर बेचे थे, वे बाद में बाजार में आई तेजी का फायदा लेने से चूक गए थे.
कोटक इन्वेस्टमेंट एडवाइजर्स ने कहा कि निवेशकों को सलाह दी है कि मौजूदा माहौल में बड़े प्राइवेट बैंक, टेलीकॉम कंपनियों के शेयरों, हेल्थ और मेटल जैसे सेक्टरों में निवेश पर फोकस करना चाहिए. ब्रोकरेज फर्म ICICI Direct ने बैंकिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर की कंपनियों, कैपिटल गुड़्स, सीमेंट, ऑटोमोबाइल कंपनियों के शेयरों में निवेश की सलाह दी है. कंपनी का कहना है कि युद्ध के दौर में ये क्षेत्र काफी सुरक्षित नजर आ रहे हैं. फर्म का कहना है कि भारत में खपत वाली चीजों के कारोबार से जुड़ी कंपनियों के शेयर खरीदे जा सकते हैं.
म्यूचुअल फंड (SIP) जारी रखें या बंद करें?बाजार के जानकारों का कहना है कि जब भी शेयर बाजार गिरता है तो म्यूचुअल फंड (एमएफ) की एसआईपी में निवेश काफी फायदेमंद हो जाता है. पीएचडी कैपिटल के सीईओ प्रदीप हल्दर का कहना है कि निवेशकों को अपने सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) को जारी रखना चाहिए. उनका कहना है कि फिलहाल कम कीमत पर यूनिट मिलेंगी और जब बाजार में तेजी लौटेगी तो इसका फायदा मिलेगा. बाजार के कई और जानकार भी शेयर बाजार में जारी मौजूदा उतार-चढ़ाव के दौरान एसआईपी (SIP) को न रोकने की सलाह दे रहे हैं.
बता दें कि शेयर बाजार में अस्थिरता के बावजूद, म्यूचुअल फंड निवेशकों ने पिछले कई महीनों में म्यूचुअल फंड योजनाओं में भारी निवेश किया है. इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक अकेले एसआईपी के माध्यम से हर महीने 20,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश हुआ है.
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