Spain removes ambassador from Israel: स्पेन ने इजरायल से अपने राजदूत को वापस बुला लिया है. बुधवार, 11 मार्च को स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज (Pedro Sánchez) की सरकार की ओर से जारी गजट में कहा गया कि 10 मार्च 2026 को मंत्रिपरिषद की बैठक में विदेश मंत्री के प्रस्ताव पर चर्चा हुई. जिसके बाद ये फैसला लिया गया कि तेल अवीव (इजरायल की राजधानी) से स्पेन के राजदूत आना मारिया सालोमोन पेरेज़ को वापस बुला लिया जाए. इस सरकारी पत्र में पेरेज की नियुक्ति को समाप्त करने का आदेश दिया गया है.
ईरान युद्ध: स्पेन ने फिर दिखाई 'स्पाइन', इजरायल से अपने राजदूत को वापस बुलाया
Spain removes ambassador from Israel: स्पेन की सरकार ने ये फैसला ऐसे वक्त में लिया है, जब इजरायल और ईरान के बीच सैन्य संघर्ष चल रहा है.


अल जजीरा ने रॉयटर्स के हवाले से बताया कि इजरायल में फिलहाल स्पेन के दूतावास का कामकाज एक ‘चार्ज द’अफेयर’ यानी कार्यवाहक राजनयिक करेंगे.
स्पेन की सरकार ने ये फैसला ऐसे वक्त में लिया है, जब इजरायल और ईरान के बीच सैन्य संघर्ष चल रहा है. स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने कई मौकों पर इस युद्ध की निंदा की है. उन्होंने ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों को ‘अनुचित’ और ‘खतरनाक’ सैन्य हस्तक्षेप बताया. एक टीवी संबोधन में सांचेज ने कहा कि स्पेन की सरकार की स्थिति को तीन शब्दों में कहा जा सकता है- ‘युद्ध को ना’ (No to war).
अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सांचेज ने लिखा कि वो अमेरिका और इजराइल की ईरान पर एकतरफा सैन्य कार्रवाई को अस्वीकार करते हैं. यह कदम हालात को और भड़काता है और अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को ज्यादा अनिश्चित और टकरावपूर्ण बनाता है.
अमेरिका को सैन्य अड्डा देने से इनकार कियासांचेज यूरोप के उन गिने-चुने नेताओं में हैं जिन्होंने अमेरिका और इजरायल की ईरान पर हमले की कड़े शब्दों में और खुली आलोचना की है. इसके लिए वह डॉनल्ड ट्रंप का ‘कोपभाजन’ भी बने. बीते दिनों सांचेज ने अमेरिका को स्पेन के रोटा और मोरोन में मौजूद संयुक्त नौसैनिक और हवाई अड्डे का इस्तेमाल ईरान युद्ध में करने देने से रोक दिया था. इससे भड़के ट्रंप ने स्पेन के साथ हर तरह का व्यापार बंद करने की धमकी दी लेकिन सांचेज ने फिर भी अपना स्टैंड नहीं बदला.
दरअसल, अमेरिकी सेना दक्षिणी स्पेन में रोटा नेवल स्टेशन (Naval Station Rota) और मोरोन एयरबेस (Morón Air Base) का उपयोग संयुक्त सैन्य अभ्यास के लिए करती है. ये व्यवस्था 1953 में फ्रांसिस्को फ्रैंको (Francisco Franco) के शासनकाल में हुए एक समझौते के तहत शुरू हुई थी.
उन्होंने इसके जवाब में कहा कि ‘हम किसी ऐसी चीज में शामिल नहीं होने जा रहे हैं, जो दुनिया के लिए बुरा है और हमारे मूल्यों और हितों के विपरीत भी है. वो भी किसी बदले की कार्रवाई के डर से.’
'2003 वाली गलती नहीं करेंगे'अपने एक एक्स पोस्ट में सांचेज ने कहा कि ‘यूरोप और स्पेन पहले भी ऐसे नाजुक दौर से गुजर चुके हैं. साल 2003 में कुछ गैर-जिम्मेदार नेताओं ने हमें मिडिल-ईस्ट में एक अवैध युद्ध में घसीट लिया था. इससे केवल असुरक्षा और पीड़ा ही मिली. उस समय हमारी प्रतिक्रिया वही होनी चाहिए जो आज है. अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन से इनकार करना. इस भ्रम को ‘ना’ करना कि हम बमों से दुनिया की समस्याओं का समाधान कर सकते हैं. अतीत की गलतियों को दोहराने को से इनकार. युद्ध से इनकार.’
साल 2003 के ईराक युद्ध में स्पेन के तत्कालीन प्रधानमंत्री जोसे मारिया अजनार (José María Aznar) ने अमेरिका का खुलकर समर्थन किया था. उन्होंने इराक में स्पेनिश सैनिक भी भेजे थे. इसका स्पेन में बड़े पैमाने पर विरोध हुआ था.
गाजा में इजरायल के हमले के भी विरोधीबता दें कि पेड्रो सांचेज ने इससे पहले गाजा में इजरायल के सैन्य अभियानों और जनवरी 2026 में वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार करने की अमेरिकी कार्रवाई की भी जमकर आलोचना की है.
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