The Lallantop

मायावती और अखिलेश ने यूपी के मुसलमानों से क्यों कहा कि कांग्रेस को वोट मत देना?

इस पर चुनाव आयोग के भी कान खड़े हो गए हैं.

Advertisement
post-main-image
अखिलेश और माया 2018 के लोकसभा उपचुनावों के दौरान साथ आए थे.
लोकसभा चुनाव के लिए पहले चरण में 11 अप्रैल को मतदान है. वोटिंग से तीन दिन पहले 7 अप्रैल को यूपी में पहली बार गठबंधन ने संयुक्त रैली की. सपा-बसपा और आरएलडी के नेताओं ने सहारनपुर के देवबंद से बीजेपी और कांग्रेस दोनों पर हमला बोला. बीएसपी प्रमुख मायावती ने यूपी के मुसलमानों से कहा कि अपना वोट बंटने न दें. कांग्रेस को वोट देकर अपना कीमती वोट बर्बाद न होने दें. मायावती ने कहा-
वेस्टर्न यूपी में, खासकर सहारनपुर, मेरठ, मुरादाबाद और बरेली मंडल में मुस्लिम समाज की आबादी बहुत ज्यादा है. इस चुनाव में मुस्लिम समाज के लोगों को मैं सावधान करना चाहती हूं. आप लोगों को भी मालूम है कि पूरे उत्तर प्रदेश में कांग्रेस पार्टी इस लायक नहीं है कि बीजेपी को टक्कर दे सके. गठबंधन ही इस लायक है कि वो बीजेपी को टक्कर दे सके. कांग्रेस ने ऐसे उम्मीदवारों को टिकट दिया है जिससे बीजेपी को फायदा पहुंचे. मैं मुस्लिम समाज के लोगों से कहना चाहती हूं कि सहारनपुर लोकसभा सीट पर हमने बहुत पहले अपने प्रत्याशी का टिकट फाइनल कर दिया था. कांग्रेस ने बाद में किया.
मायावती आगे बोलीं-
मैं मुस्लिम समाज के लोगों से कहना चाहती हूं कि आप लोगों को अपना वोट बांटना नहीं है. आप लोगों को अपना वोट एकजुट होकर बीएसपी-सपा और आरएलडी के उम्मीदवार को देना है. मैं मुस्लिम समाज के लोगों से कहना चाहती हूं कि आप लोगों को भावनाओं में बहकर, यार दोस्तों के चक्कर में आकर वोट को बंटने नहीं देना है. बीजेपी को हराने के लिए अपना वोट गठबंधन के उम्मीदवार को देना है. मुस्लिम समाज के लोगों से मेरी यही अपील है.
मुस्लिमों से वोट मांग कर घिरीं मायावती
गठबंधन की पहली रैली ही विवादों में घिर गई है. मायावती के मुसलमानों से वोट मांगने को लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्य चुनाव आयुक्त लक्कु वेंकटेश्वरलू ने स्थानीय प्रशासन से रिपोर्ट मांगी है. कुछ दिन पहले चुनाव आयोग ने कहा था कि कोई भी उम्मीदवार या नेता जाति- धर्म और आस्था के नाम पर वोट या समर्थन नहीं मांगेगा. आयोग ने कहा था कि यह आचार संहिता का उल्लंघन होगा. ऐसा करने पर संबंधित नेता के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.
रैली के दौरान मंच पर गठबंधन के सभी बड़े नेता मौजूद रहे.
रैली के दौरान मंच पर गठबंधन के सभी बड़े नेता मौजूद रहे.

इन सीटों पर मुस्लिम मतदाता प्रभावी
पश्चिमी यूपी की कई लोकसभा सीटों पर मुस्लिम मतदाता निर्णायक भूमिका में है. यही वजह है कि गठबंधन ने कई मुस्लिम उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है. कैराना सीट पर 26%, मेरठ सीट पर 31%, बागपत सीट पर 20%, मुजफ्फरनगर सीट पर 31%, सहारनपुर सीट पर 38 %, गाजियाबाद सीट पर 19 % और बिजनौर सीट पर करीब 38 फीसदी मुसलमान हैं. वहीं गौतमबुद्धनगर सीट पर 14 फीसदी मुस्लिम मतदाता हैं.


चीनी मिलों के बंद होने से गन्ना किसानों को हो रहा है नुकसान

Advertisement
Advertisement