'फैसला' सरकार का ही था. ये बात रिज़र्व बैंक ने 22 दिसंबर को बाकायदा लिखित में संसद की 'डिपार्टमेंट रिलेटेड कमिटी ऑफ़ फाइनांस' को बताई थी.
नोटबंदी का फैसला किसका था, जानने के लिए अक्कड़-बक्कड़ करें?
सरकार ने RBI कहा था, RBI ने सरकार का नाम लिया.
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पिक्चर: Reuters
एटीएम की लाइन में लगे लोगों से लेकर संसद में हंगामा कर रहे विपक्ष तक सबको दो महीनों से एक चीज़ का जवाब चाहिए था. नोटबंदी का फैसला अच्छा या बुरा जैसा भी हो, लिया किसने था? रिज़र्व बैंक ने? या भारत सरकार ने? अब एक और जवाब आ गया है.
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भारत सरकार ने रिज़र्व बैंक को 7 नवम्बर को 'सलाह' दी थी कि नकली नोट, टेरर फाइनेंसिंग और काले धन से निपटने के लिए बैंक को 1000 और 500 के नोटों को चलन से बाहर करने के बारे में 'सोचना' चाहिए.
- रिज़र्व बैंक के कमिटी को भेजे नोट का हिस्सा
चूंकि सरकार ने इस मसले पर बैंक से जल्द से जल्द कुछ करने को कहा था, सरकार की 'सलाह' पर राय-मशविरा करने के लिए रिज़र्व बैंक का सेंट्रल बोर्ड अगले ही दिन मिला और 'विचार-विमर्श' के बाद ये तय पाया गया कि 500 और 1000 के नोटों का 'लीगल टेंडर स्टेटस' तुरंत ख़त्म कर दिया जाए. इसके बाद रिज़र्व बैंक ने सरकार को हरी झंडी दिखा दी और प्रधानमंत्री ने 8 तारीख की शाम को नोटबंदी का ऐलान कर दिया.
8 नवम्बर को नोटबंदी का ऐलान करते प्रधानमंत्री मोदी
अब तक इस बारे में सिर्फ इतनी जानकारी थी कि फैसला रिज़र्व बैंक का है और सरकारी मशीनरी ने उस पर अमल किया. रिज़र्व बैंक ने इस से जुड़ी RTI एप्लीकेशन का जवाब देने से भी इनकार कर दिया था. इस नोट में जिस तरह 'पड़ोसी देश' और 'काला-धन' शब्द इस्तेमाल किए गए हैं, उस से ये नोट इन मुद्दों पर सरकार की आधिकारिक लाइन के काफी करीब लगता है.
रिज़र्व बैंक के भेजे नोट में और भी कई बातें गौरतलब हैं:
1. रिज़र्व बैंक ने इस नोट में सिलसिलेवार तरीके से बताया है कि 2000 का नोट लाने का फैसला कैसे लिया गया. अक्टूबर 2014 से रिज़र्व बैंक सरकार को नए 'हाई-डिनॉमिनेशन' नोट लाने के बारे में लिख रहा था. इस साल 18 मई 2016 को सरकार ने 2000 के नोट लाने के लिए हामी भरी और जून से करेंसी प्रेस को नए नोट छपने की तैयारी करने को कहा गया था.
2. नोटबंदी के ऐलान के वक़्त के लिए रिज़र्व बैंक ऐसा मौका चाहता था, जब चलन से बाहर किए जा रहे नोटों का ताज़ा छपा स्टॉक 'क्रिटिकल मिनिमम' पर हो.
3. नोटबंदी का ऐलान जब हुआ, तब बंद किए जा रहे नोटों का महज़ 6 फ़ीसदी नए नोटों की शक्ल में रिज़र्व बैंक के पास था. बावजूद इसके, बैंक ने 8 नवंबर की तारीख को नए नोटबंदी के हिसाब से 'ऑपरच्यून' (बिलकुल सही मौके पर) बताया है.
4. बैंक जानता था कि एक तय समय में चलन से बाहर हुए सभी नोटों के बदले नए नोट देना संभव नहीं भी हो सकता है.
5. रिज़र्व बैंक पहले से उम्मीद कर रहा था कि इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट के ज़रिए करेंसी की कमी से पैदा हुई मुश्किल कुछ कम होगी.

इंडियन एक्सप्रेस के हवाले से खबर है कि मोइली की अध्यक्षता में कमेटी 18 जनवरी को फिर मिल रही है. इस दिन वहां रिज़र्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल के साथ वित्त मंत्रालय के अफसर भी होंगे. साथ ही SBI, पंजाब नेशनल बैंक, ओरिएंटल बैंक ऑफ़ कॉमर्स के लोग भी होंगे. इन सभी को कमेटी के सामने नोटबंदी के असर पर बयान देना है.
सरकार ने रिजर्व बैंक पर डाली थी फैसले की जिम्मेदारी
रिज़र्व बैंक के इस नोट के मीडिया में आने से सरकार की परेशानी बढ़ना तय है क्योंकि 16 तारीख को केंद्रीय कोयला मंत्री पीयूष गोयल ने राज्य सभा में कहा था कि नोटबंदी का फैसला रिज़र्व बैंक बोर्ड का था. कैबिनेट ने इस पर सिर्फ हामी भरी थी. एक केंद्रीय मंत्री का संसद में बयान सरकार का आधिकारिक बयान समझा गया. अब रिज़र्व बैंक का एक संसद समिति को दिया लिखित बयान इसके ठीक उलट सामने आया है. सरकार इस बात पर फिलहाल चुप है.
ये भी देखें:
https://www.youtube.com/watch?v=VxyWLrrE1W4
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