नौ साल पहले मुन्नी के पति ने उसे छोड़ दिया था. वजह थी मुन्नी की पीरियड्स से जुड़ी समस्या (Delhi Footpath Women Periods). उसे महीने में 20-20 दिनों तक महावारी होती है. 32 साल की मुन्नी बताती है कि पति ने छोड़ते वक्त उससे कहा था- महीने में 20 दिन गंदे खून में ही सनी रहोगी तो मुझे सुख कब दोगी? आज वो दिल्ली के फुटपाथ पर फूल बेचकर गुजारा करती है. पीरियड्स की समस्या के चलते मुन्नी आठ-दस दिन ही काम कर पाती है.
'महीने भर तक माहवारी, इलाज के पैसे नहीं', दिल्ली की इन कामकाजी महिलाओं का दर्द कोई नहीं सुनता
Delhi Female Labour Problems: बिहार के मधुबनी और पटना से आए कुछ परिवारों ने दिल्ली के एक मेट्रो स्टेशन के नीचे आसरा लिया है. वो वहां शहद बेचकर, लकड़ी काटकर गुजारा करते हैं. उनका कोई घर नही है. महिलाएं मेट्रो के पास बने बाथरूम का इस्तेमाल करती हैं.


आजतक से जुड़ी राधा कुमारी ने दिल्ली के फुटपाथ पर कामकाजी महिलाओं से जुड़ी ग्राउंड रिपोर्ट तैयार की है. मुन्नी के पास बैठी एक महिला ने राधा को बताया,
बेचारी...महीने में 15-20 दिन दर्द में रहती है. कभी-कभी तो एक महीना भी हो जाता है. पति भी छोड़ गया. ना कमा पाती है. ना सही से खा पाती है. हम लोग भी कितनी ही मदद करें. महीने पहले मुन्नी की तबीयत बहुत खराब हो गई थी. महीना भर हो गया लेकिन'खून गिरना' रुका नहीं. जब हालत बहुत खराब हुई तो वो लोग उसे सरकारी अस्पताल ले गए. अस्पताल वालों ने एक महीने की दवाई देकर वापस भेज दिया.
मुन्नी ने बताया कि दवा खत्म होने के बाद फिर से वही समस्या शुरू हो गई. वो दोबारा अस्पताल गई तो डॉक्टरों ने अल्ट्रासाउंड कराने की बात कही और फिर मामला टालते रहे. मु्न्नी ने कहा,
हम सड़क पर रहने वालों की कोई नहीं सुनता. प्राइवेट अस्पताल से अल्ट्रासाउंड कराने के पैसे नहीं. ज्यादा दिनों तक खून बहता है तो कपड़ा भी कम पड़ जाता है फिर दूसरी महिलाओं से मांग लेती हूं.
11-12 साल की दिखने वाली मुन्नी की भतीजी मुस्कान बताती है,
जब पीरियड्स आते हैं तो कमजोरी लगती है. कमर टूटती है. हाथ-पैर झन-झन करते हैं. मैं तो फूल भी नहीं बेच पाती. बस पड़ी रहती हूं. पांच-सात दिन तक होते हैं लेकिन मेरी बुआ को 20-20 दिन, एक-एक महीने होता ही रहता है.
बिहार के मधुबनी और पटना से आए कुछ परिवारों ने दिल्ली के एक मेट्रो स्टेशन के नीचे आसरा लिया है. वो वहां शहद बेचकर, लकड़ी काटकर गुजारा करते हैं. उनका कोई घर नही है. महिलाएं मेट्रो के पास बने बाथरूम का इस्तेमाल करती हैं. पीरियड्स के दौरान कपड़ा इस्तेमाल करने के जोखिमों पर सवाल एक महिला ने कहा,
ये सब अमीरों के चोंचले हैं. जब से पीरियड्स आने शुरू हुए तब से मैं तो कपड़ा ही ले रही हूं. मुझे तो कुछ ना हुआ. साफ कपड़ा लेते हैं, कुछ नहीं होता.
उन महिलाओं के लिए सैनिटरी पैड इस्तेमाल करना लग्जरी जैसा है. एक-दो बार किसी ने दे दिया तो इस्तेमाल कर लिया. दर्द के लिए दवा ले लेती हैं.
डॉक्टरों का क्या कहना?पीरियड्स में कपड़े के इस्तेमाल और दर्द की दवा लेने पर फोर्टिस हॉस्पिटल, कल्याण, मुंबई में स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. सुषमा तोमर ने आजतक से कहा,
हर बार पेनकिलर्स लेना बिल्कुल भी सही नहीं. पीरियड्स की शुरुआत में गर्भाशय में सिकुड़न होती है जिससे हल्का दर्द होना सामान्य बात है. इस दौरान मांसपेशियों को राहत देने के लिए हॉट फर्मेंटेशन (हीट थेरेपी) का इस्तेमाल होना चाहिए. लेकिन फिर भी दर्द रहता है तो किसी डॉक्टर को दिखाना चाहिए. पुराने कपड़े लेने से इंफेक्शन हो सकता है लेकिन अगर कोई सैनिटरी नैपकिन नहीं खरीद पा रहा तो वो कपड़ों का इस्तेमाल कर सकता है. बशर्ते कि कपड़े साफ हों और समय-समय पर बदला जाए.
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भारी या लंबे समय तक पीरियड्स होने की समस्या को मेनोरेजिया (Menorrhagia) कहते हैं. डॉक्टर बताती हैं कि सोनोग्राफी, हार्मोन और ब्लड रिपोर्ट के बाद इसका इलाज किया जा सकता है.
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