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ईरान के इस्फहान में बेहद गहरी सुरंगों में अब भी 'जिंदा' है ट्रंप का सबसे बड़ा डर

ईरान के पास अब भी परमाणु बम बनाने की क्षमता बची हुई है. अमेरिका और इजरायल ने महीने भर से ज्यादा समय तक चले युद्ध में लगातार ईरानी न्यूक्लियर फैसिलिटीज को निशाना बनाया. लेकिन फिर भी ईरान के पास परमाणु बम बनाने के लिए काफी मात्रा में एनरिच्ड यूरेनियम मौजूद है.

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अमेरिका ने पिछले साल नतांज में ईरान के न्यूक्लिर फैसिलिटी पर हमला किया था. (फाइल फोटो- Reuters)

अमेरिका और इजरायल ने ईरान के न्यूक्लियर फैसिलिटीज पर ताबड़तोड़ हमले किए. दावा किया कि ईरान का न्यूक्लियर प्रोग्राम नष्ट कर दिया गया. लेकिन इन दावों के बीच आई एक रिपोर्ट इसके उलट कहानी बताती है. इसमें बताया गया है कि ईरान के पास अब भी वो तमाम संसाधन बचे हुए हैं, जिनसे परमाणु बम बनाया जा सकता है.

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द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी हमलों में ईरान के न्यूक्लियर लैब्स और रिसर्च सेंटर्स को भारी नुकसान पहुंचा है. येलोकेक बनाने का सेंटर भी डैमेज हो गया. येलोकेक कच्चा माल होता है, जिससे यूरेनियम संवर्धन (Enrichment) किया जाता है. लेकिन एक्सपर्ट्स की मानें तो ईरान के पास अब भी सेंट्रीफ्यूज और अंडरग्राउंड ठिकाने मौजूद हैं, जहां वो यूरेनियम को न्यूक्लियर वेपन बनाने के लिए एनरिच कर सकता है.

रिपोर्ट कहती है कि ईरान ने 'वेपन्स ग्रेड यूरेनियम' के स्टोरेज को अमेरिका और इजरायल के हमले से बचा लिया है. संयुक्त राष्ट्र संघ की न्यूक्लियर एजेंसी के मुताबिक, ईरान के पास लगभग 1000 पाउंड (करीब 450 किलो) हाई एनरिच्ड यूरेनियम मौजूद है. इसका आधा हिस्सा इस्फहान की न्यूक्लियर साइट के नीचे बनी एक बेहद गहरी सुरंग में ताबूतों में बंद कर सुरक्षित रखा गया है.

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ईरान के पास नतांज न्यूक्लियर फैसिलिटी के पास पिकैक्स पहाड़ी में भी एक अंडरग्राउंड सुरंग होने का दावा किया जा रहा है. यहां तक अमेरिका के विध्वंसक हथियारों की भी पहुंच नहीं है. ईरान यहां से अपना न्यूक्लिर प्रोग्राम ऑपरेट कर सकता है.

जून 2025 में अमेरिका और इजरायल ने ईरान के न्यूक्लिर प्रोग्राम को नष्ट करने के लिए 12 दिनों का हवाई अभियान (ऑपरेशन राइजिंग) चलाया था. ये 13 से 24 जून तक चला था. इसके तहत ईरान के न्यूक्लियर फैसिलिटीज पर हमला किया गया था. ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम को सबसे ज्यादा डैमैज इस अभियान से हुआ था. इस अभियान के दौरान अमेरिका ने फोर्डो और नतांज में मौजूद यूरेनियम एनरिचमेंट साइट पर 'मैसिव ऑर्डिनेंस पेनिट्रेटर बम' गिराया था. वहीं 'टॉमहॉक' मिसाइलों का इस्तेमाल करके इस्फहान में न्यूक्लियर प्रोग्राम के लिए इस्तेमाल किए जाने वाली इमारतों को ध्वस्त कर दिया था.

ईरान के पास अभी भी परमाणु बम बनाने लायक संसाधन बचे हैं. लेकिन इसमें बड़ी बाधा एक्सपर्टीज की है. ईरान ने पहले कभी भी न्यूक्लियर वेपन बनाया नहीं है. दूसरी तरफ इजरायल और अमेरिका ने ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम से जुड़ी खुफिया जानकारियां जुटा ली हैं. ऐसे में ईरान के लिए गुपचुप तरीके से न्यूक्लियर वेपन बना पाना मुश्किल होगा. 

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