25 मई को पूर्वी दिल्ली के न्यू बोर्न बेबी केयर नर्सिंग होम में आग लग गई थी. जिसमें 7 नवजात बच्चों की मौत हो गई. इस मामले में दिल्ली पुलिस की जांच में सामने आया है कि 31 मार्च को ही नर्सिंग होम की परमिट खत्म हो गया था. दिल्ली सरकार के हेल्थ डिपार्टमेंट से नर्सिंग होम को 31 मार्च तक की ही परमिशन मिली थी.
ना परमिट, ना फायर NOC...ये है 7 बच्चों की मौत के जिम्मेदार अस्पताल की असलियत!
25 मई को पूर्वी दिल्ली के न्यू बोर्न बेबी केयर अस्पताल में आग लग गई थी. जिसमें 7 नवजात बच्चों की मौत हो गई. इस अस्पताल के मालिक डॉ नवीन खिची पर पहले भी इलाज के दौरान एक नवजात बच्चे को नुकसान पहुंचाने का आरोप है. और उस समय उनका अस्पताल भी रजिस्टर्ड नहीं था.

जांच में आगे पता चला है कि नर्सिंग होम को सिर्फ 5 बेड की परमिशन थी जबकि एक साथ 25-30 बच्चों को भर्ती किया जा रहा था. इसके अलावा नर्सिंग होम में 5 बेड के हिसाब से ही ऑक्सीजन सिलेंडर होने चाहिए थे. लेकिन हादसे के बाद नर्सिंग होम से 32 ऑक्सीजन सिलेंडर बरामद हुए हैं. जांच में ये भी सामने आया है कि नर्सिंग होम के पास फायर NOC भी नहीं था.
इस अस्पताल के मालिक डॉ नवीन खिची का आपराधिक लापरवाही का इतिहास रहा है. उन पर पहले भी इलाज के दौरान एक नवजात बच्चे को नुकसान पहुंचाने का आरोप है. और हैरान करने वाली बात ये है कि जब उनके अस्पताल पर ये आरोप लगे थे उस समय उनका अस्पताल भी रजिस्टर्ड नहीं था.
उत्तर प्रदेश के हाथरस के एक कपल ने इस मामले में FIR दर्ज कराया था. जिन्होंने अपने नवजात शिशु को बेबी केयर अस्पताल में भर्ती कराया था. उनका आरोप था कि इलाज के दौरान बच्चे के बायें हाथ में फ्रैक्चर आ गया था. इसका पता लगाने के लिए कपल ने सीसीटीवी फुटेज हासिल की. और देखा कि एक नर्स नवजात को पीट रही है. इसकी शिकायत लेकर जब वे खिची के पास गए तो उन्होंने कथित तौर पर उन्हें धमकाया.
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, 2021 में खिंची के खिलाफ आईपीसी की धारा 325 (किसी व्यक्ति को जानबूझकर गंभीर चोट पहुंचाने के अपराध के लिए सजा), 506 (आपराधिक धमकी के लिए सजा) और 34 (सामान्य इरादे से कई लोगों द्वारा किए गए कार्य) और किशोर न्याय अधिनियम की धारा 75 (बच्चे पर नियंत्रण रखने वाला कोई भी व्यक्ति बच्चे पर हमला करता है, उसे छोड़ देता है, उसके साथ दुर्व्यवहार करता है या जानबूझकर उसकी उपेक्षा करता है) के तहत मामला दर्ज किया गया था.
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जांच के दौरान, 2021 में यह पता लगा कि अस्पताल दिल्ली नर्सिंग होम एक्ट के तहत रजिस्टर्ड नहीं था. जिसके अनुसार राष्ट्रीय राजधानी के सभी अस्पताल और नर्सिंग होम को कुछ मानकों को पूरा करना और आधिकारिक रजिस्ट्रेशन करवाना जरूरी है. हालांकि अधिकारियों द्वारा फाइन लगाए जाने के बाद यह मामला सुलझ गया. और फाइन भरने के बाद फिर से नर्सिंग होम में नियमित इलाज शुरू हो गया था.
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