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कुत्तों के लिए बन रहे QR कोड वाले स्पेशल 'आधार कार्ड', वजह भी पता चल गई है

कुत्तों वाले ये ID कार्ड 'पॉफ्रेंड' नाम के NGO की एक खास पहल के तहत बनाए जा रहा हैं. ये NGO पूरे भारत में आवारा जानवरों की देखभाल और सुरक्षा के लिए काम करता है.

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कुत्तों की सुरक्षा के लिए खास पहल (सांकेतिक फोटो- आजतक)

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  • दिल्ली में स्ट्रीट डॉग्स के लिए QR कोड वाले खास ID कार्ड बनाए जा रहे हैं, जिनमें कुत्तों की नाम, इमरजेंसी कॉन्टैक्ट, वैक्सीनेशन रिकॉर्ड और देखभाल करने वालों की जानकारी शामिल है।
  • इन ID कार्ड्स को बनाने की पृष्ठभूमि में कुत्तों के खो जाने की समस्याओं से निपटना है ताकि उन्हें उनकी देखभाल करने वालों से आसानी से मिलाया जा सके, जिससे उनका सुरक्षा काफ़ी बेहतर हो।
  • भारत के विभिन्न हिस्सों में अब तक 6370 कुत्तों को टैग बांटे जा चुके हैं और इस साल कार्ड वितरण को दस गुना बढ़ाने की योजना है, जिससे खोए हुए कुत्तों को जल्द खोजने में मदद मिलेगी।

दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में स्ट्रीट डॉग्स के लिए QR कोड वाले खास ID कार्ड बनाए जा रहे हैं. अब आप सोच रहे होंगे कि कुत्तों को भला ID कार्ड की क्या जरूरत है? दरअसल, इन कार्ड्स में कुत्तों की जरूरी डीटेल्स शामिल हैं. जैसे नाम, इमरजेंसी कॉन्टैक्ट, वैक्सीनेशन रिकॉर्ड और उनको फीड करने वालों/देखभाल करने वालों की डीटेल्स (Dogs QR Code based ID Card). ताकि खोए हुए कुत्तों को उनकी देखभाल करने वालों से आसानी से दोबारा मिलवाया जा सके. दिल्ली में ही नहीं देश के अलग-अलग कोनों में अब तक 6350 कुत्तों के लिए ये स्पेशल टैग बनाए जा चुके हैं. 

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इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, 27 अप्रैल को दिल्ली एयरपोर्ट के टर्मिनल नंबर वन और इंडिया गेट जैसी अलग-अलग लोकेशन पर 100 कुत्तों को ये कार्ड पहनाए गए.

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फोटो- X/@pawfriend_in

कुत्तों वाले ये ID कार्ड 'पॉफ्रेंड' नाम के NGO की एक खास पहल के तहत बनाए जा रहा हैं. ये NGO देश में आवारा जानवरों की देखभाल और सुरक्षा के लिए काम करता है. पॉफ्रेंड के फाउंडर अक्षय रिडलान ने बताया कि वो अब तक देश भर में 6370 टैग बांट चुके हैं और इस साल डिस्ट्रिब्यूशन को दस गुना बढ़ाने की प्लानिंग कर रहे हैं.

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फोटो- X/@pawfriend_in

पॉफ्रेंड में दिल्ली ब्रांच की हेड प्रिया चोपड़ा बताती हैं कि इस पहल का मकसद कुत्तों की सुरक्षा को बढ़ाना है. बोलीं,

ये दिल्ली के सभी एनिमल लवर्स के लिए खुशी का पल है क्योंकि हम अपने प्यारे साथियों के लिए एक सुरक्षित भारत की ओर बढ़ रहे हैं. हमारी कम्युनिटी का एक कुत्ता ब्राउनी लापता हो गया था लेकिन Pawfriend.in के QR टैग की मदद से वो अगले ही दिन हमें मिल गया.

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एनिमल राइट्स एक्टिविस्ट मानवी राय ने बताया कि ये टैग प्यारे जानवरों के लिए जरूरत के वक्त लाइफलाइन के तौर पर काम करेंगे. पिछले साल जुलाई में पहल के तहत मुंबई एयरपोर्ट के पास भी 20 कुत्तों के लिए ये खास ID कार्ड बनाए गए थे. अक्टूबर में खड़गपुर में भी 100 कुत्तों को टैग बांटे गए. 

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