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दिल्ली में स्कूल और सरकारी दफ्तर बंद, वजह कोरोना नहीं प्रदूषण है

सुप्रीम कोर्ट ने दो दिन के लॉकडाउन का सुझाव दिया था.

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दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण के चलते मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने सभी स्कूलों और दफ़तरों को एक हफ्ते के लिए बंद कर दिया है (साभार: आजतक)
दिल्ली में प्रदूषण से बिगड़े हालात को देखते हुए केजरीवाल सरकार ने एक हफ्ते के लिए स्कूलों को बंद कर दिया है. सोमवार, 15 नवंबर से अगले एक हफ्ते के लिए स्कूल बंद रहेंगे. हालांकि ऑनलाइन क्लास चलती रहेगी. वहीं 14 से 17 नवंबर तक कंस्ट्रक्शन एक्टिविटी पर रोक लगा दी गई है. एक हफ्ते तक दिल्ली के सरकारी दफ्तर बंद रहेंगे, लेकिन वर्क फ्रॉम होम चलता रहेगा. वहीं प्राइवेट ऑफिसों को भी वर्क फ्रॉम होम के लिए कहा गया है.ये फैसले प्रदूषण के मामले में की गई इमरजेंसी मीटिंग में किए गए. मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इन फैसलों जानकारी दी. उन्होंने कहा कि हम संपूर्ण लॉकडाउन के तौर तरीकों पर भी विचार कर रहे हैं. केजरीवाल ने कहा,
सुप्रीम कोर्ट से बीच-बीच में ये सुझाव निकाल के आ रहा था कि क्या दिल्ली को कंपली लॉकडाउन किया जा सकता है, अगर बहुत ज्यादा हालात खराब हो जाते हैं तो. उस पर हम वर्कआउट कर रहें हैं कि उस लॉकडाउन के क्या मायने होंगे, अभी लगा नहीं रहे हैं. हम एक प्रस्ताव बना रहे हैं, उसको हम सुप्रीम कोर्ट के सामने रखेंगे. अगर ऐसा-ऐसा होता है तो, केंद्र और सारी एजेंसियों से डिस्कस करेंगे, क्योंकि ये बहुत एक्सट्रीम स्टेप होगा. तो हम केंद्र सरकार को विश्वास में लेकर, सीपीसीबी को विश्वास में लेकर, अगर ऐसे हालात बढ़ते हैं तो दिल्ली के अंदर सारे प्राइवेट वाहन, कन्स्ट्रक्शन का काम और इंडस्ट्रियां बंद की जा सकती है. ये प्रस्ताव हम कोर्ट के सामने रखेंगे, ये चार निर्णय मोटे तौर पर लिए गए.
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार से जल्द से जल्द कोई असरदार कदम उठाने के लिए कहा था. सुप्रीम कोर्ट का कहना था कि अगर जल्दी स्थिति नहीं सुधरती है तो दिल्ली सरकार को दो दिन का लॉकडाउन लगाना चाहिए. इंडिया टुडे के मुताबिक दिल्ली की हवा में लगातार बढ़ते प्रदूषण से परेशान होकर 17 साल के छात्र आदित्य दुबे ने सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की थी. सुप्रीम कोर्ट की स्पेशल बेंच इन याचिका की सुनवाई कर रही है. इस बेंच में मुख्य न्यायधीश  एन. वी. रम्मना, जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़, और जस्टिस सूर्यकांत शामिल हैं. शनिवार को याचिका की सुनवाई करते हुए जस्टिस रम्मना ने दिल्ली की हवा में लगातार बढ़ते प्रदूषण पर अपनी चिंता जताई है. जस्टिस रम्मना ने कहा,
"हालत कितने बिगड़ गए हैं ये हम सबने देख ही लिया है. अब हम अपने घरों में भी मास्क पहनने के लिए मजबूर हैं."  
जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा,
समस्या की गंभीरता के बारे में देखिए.कोरोना के बाद स्कूल खोले गए हैं. छोटे बच्चे घर से 7 बजे स्कूल जाते हैं. अब आप सभी बच्चों को स्कूल जाते और उनके फेफड़ों को प्रदूषण के संपर्क में आते हुए देख रहे हैं क्या आपने स्थिति पर प्रतिक्रिया दी है? यह दिल्ली सरकार के अंतर्गत आता है.
कोर्ट में केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और दिल्ली सरकार के वकील राहुल मेहरा ने कोर्ट के सामने कई दलीलें पेश की. तुषार मेहता ने कहा कि
"केंद्र, राज्य, बाकी एजेंसियां सब अपने स्तर पर जूझ रहे हैं. पारली जलाने की इस समस्या से निपटने के लिए कुछ कदम उठाए जा सकते हैं जिनकी लिस्ट हमने कोर्ट में दाखिल की है."
तुषार मेहता की इस दलील पर सीजेआई रम्मना ने पूछा,
"आप मामले को इस तरह से पेश कर रहे हैं जैसे कि इस स्थिति के लिए सिर्फ किसान ही जिम्मेदार हैं, किसानों के पराली जलाने से  प्रदूषण सिर्फ 40 प्रतिशत बढ़ा है. पटाखों और वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर आप क्या कहेंगे." 
कोर्ट ने दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण पर काबू पाने के लिए सरकार से तुरंत कार्रवाई करने के लिए कहा. साथ ही अगर हालात में सुधार नजर नहीं आता है तो दिल्ली सरकार को कोर्ट ने दो दिन का लॉकडाउन लगाने का सुझाव दिया. सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार, 15 नवंबर तक के लिए सुनवाई स्थगित कर दी. कोर्ट ने केंद्र और सभी राज्यों को प्रदूषण काम करने के लिए आपातकालीन मीटिंग करने की सलाह दी. साथ ही इस मीटिंग में लिए गए फैसले से सुप्रीम कोर्ट को अवगत कराने के लिए कहा है.

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