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48 घंटे में 'काऊ हग डे' मनाने की अपील वापस ले ली गई

बोर्ड ने पहले 'वैलेंटाइन डे' के दिन 'काऊ हग डे' मनाने की अपील की थी.

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काऊ हग डे मनाने की अपील वापस. (फोटो: इंडिया टुडे)

सरकार ने 14 फरवरी को काऊ हग डे मनाने की अपील वापस ले ली है. एनिमल वेलफेयर बोर्ड (AWB) ने पहले कहा था कि वैलेंटाइन डे के दिन Cow Hug day सेलिब्रेट किया जाए. इसे लेकर अच्छी खासी चर्चा हुई थी. कई लोगों ने बोर्ड के कदम की आलोचना की थी. वहीं कई ने इसका समर्थन किया था. बोर्ड ने अपील वापस करने के संबंध में एक नोटिस भी जारी किया है.

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इससे पहले जब बोर्ड ने वैलेंटाइन डे के लिए दिन काऊ हग डे मनाने की अपील की थी, तो उस समय भी एक नोटिस जारी किया था. उस नोटिस में बोर्ड ने लिखा था,

हम सभी जानते हैं कि गाय भारतीय संस्कृति और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है. हमारे जीवन को बनाए रखती है. पशु धन और जैव विविधता का प्रतिनिधित्व करती है. मां की तरह इसकी पौष्टिक प्रकृति के कारण इसे 'कामधेनु' और 'गौ माता' के रूप में जाना जाता है, जो मानवता को सभी धन प्रदान करती है.

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इससे पहले काऊ हग डे को लेकर मोदी सरकार में मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री ने कहा था कि गाय माता है और इसकी सेवा करनी चाहिए. उन्होंने कहा था कि आखिर काऊ हग डे मनाने में परेशानी क्या है. उन्होंने कहा था कि 14 फरवरी प्रेम का दिन है, इसलिए गाय से प्रेम करें.

इधर यूपी सरकार में कैबिनेट मंत्री धर्मपाल सिंह ने कहा था कि लोग 14 फरवरी को गाय को नमन करें और गाय को कुछ खिलाएं. उन्होंने कहा था कि गाय हमारी माता है और गाय के मूत्र में गंगा मैया बसती हैं और गोबर में लक्ष्मी का वास है.

वहीं TMC सांसद सांतनु सेन ने आरोप लगाया था कि असली मुद्दों को भटकाने के लिए नकली हिंदूवाद और नकली देशभक्ति का इस्तेमाल किया जा रहा है. इधर कांग्रेस सांसद रजनी पाटिल ने कहा था कि वो एक किसान परिवार से हैं और हर दिन अपनी गाय को गले लगाती हैं. उन्होंने कहा था कि काऊ हग डे केवल बेरोजगारी, अडानी, महंगाई और आतंकवाद जैसे मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए है. 

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