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कोवैक्सीन पर WHO से भारत को मिल रही है तारीख-पे-तारीख

WHO से इमरजेंसी अप्रूवल का मामला फिर लटक गया है.

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भारत में बनी कोवैक्सीन को WHO की तरफ से इमरजेंसी इस्तेमाल की मंजूरी मिल गई है फाइल फोटो)
स्वदेसी कोरोना वैक्सीन कोवैक्सीन (Covaxin) को विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की तरफ से आपातकालीन उपयोग के लिए हरी झंडी देने का मामला सुलझ नहीं पा रहा है. WHO के एक तकनीकी सलाहकार समूह ने कोवैक्सीन को मंजूरी देने की अर्जी पर मंगलवार को समीक्षा की. पहले कहा गया कि अगर कंपनी के दावों से संतुष्टि होती है तो अगले 24 घंटों के भीतर सिफारिश की जा सकती है. हालांकि रात को WHO ने कोवैक्सीन बनाने वाली कंपनी भारत बायोटेक से अतिरिक्त जानकारी की मांग कर डाली. WHO ने फिर मांगी अतिरिक्त जानकारी कोवैक्सीन को डब्लूएचओ की तरफ से फिलहाल तारीख पर तारीख ही मिल रही है. WHO के तकनीकी सलाहकार समूह ने अब कोवैक्सीन को लेकर किए गए परीक्षणों के संबंध में भारत बायोटेक से अतिरिक्त जानकारी मांगी है. यह जानकारी खासतौर पर वैक्सीन के फाइनल रिस्क-बेनेफिट असेस्मेंट से संबंधित है. बता दें कि ये असेसमेंट मान्यता देने का फाइनल चरण माना जाता है. ये अतिरिक्त जानकारी मिलने पर अब 3 नवंबर को बैठक में कोवैक्सीन को आपात इस्तेमाल की मंजूरी देने पर फिर से विचार किया जाएगा. ये जानकारी खुद डब्लूएचओ की चीफ साइंटिस्ट सौम्या स्वामिनाथन ने ट्वीट करके दी. उन्होंने लिखा,
"WHO के इंडिपेंडेंट तकनीकी सलाहकार ग्रुप की मीटिंग हुई, इसमें भारत बायोटेक से पूरी दुनिया में कोवैक्सीन के इमरजेंसी इस्तेमाल के अप्रूवल के लिए अतिरिक्त जानकारी मांगी गई है. अगर जल्द ही डाटा मिल जाता है तो 3 नवंबर को फिर से असेसमेंट किया जाएगा."
कंपनी को है जल्दी अप्रूवल की उम्मीद कोवैक्सीन बनाने वाली हैदराबाद स्थित भारत बायोटेक कंपनी ने टीके को आपातकालीन उपयोग सूची (EUL) में शामिल करने के लिए 19 अप्रैल को WHO को डेटा उपलब्ध कराया था. तब WHO के एक प्रवक्ता ने कहा था कि यदि समिति संतुष्ट होती है तो हम अगले 24 घंटों के भीतर किसी सिफारिश की उम्मीद करते हैं. कंपनी को उम्मीद थी कि जल्द ही अप्रूवल मिल जाएगा. लेकिन मामला टल गया. उसके बाद 26 अक्टूबर को भी कहा गया कि अगले 24 घंटे में मंजूरी पर विचार करेंगे. लेकिन फिर से भारत बायोटेक से डाटा मांग लिया गया है. WHO अब तक कोरोना के टीकों के लिए फाइज़र-बायोएनटेक, एस्ट्राजेनेका, जॉनसन एंड जॉनसन, मॉडर्ना और सिनोफार्मा कंपनियों की बनाई वैक्सीन को इमरजेंसी इस्तेमाल का अप्रूवल दे चुका है. डब्लूएचओ के एक शीर्ष अधिकारी ने मीडिया से कहा था कि किसी भी वैक्सीन के इस्तेमाल यूज की मंजूरी देने से पहले उसका पूरी तरह से मूल्यांकन करना जरूरी होता है. इसकी सिफारिश की प्रक्रिया में कभी-कभी अधिक समय लग सकता है. इसके लिए उनका कहना था कि विश्व को सही सलाह ही दी जानी चाहिए, भले ही इसमें एक दो सप्ताह अधिक लग जाएं.

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