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खामेनेई की मौत के बाद ईरान के स्लीपर सेल एक्टिव हुए? अमेरिका की बेचैनी बढ़ी

Iran Sleeper Cells in US: अमेरिकी अलर्ट का कहना है कि ट्रांसमिशन का मकसद इंटरनेट या मोबाइल नेटवर्क का इस्तेमाल किए बिना गुप्त तरीके से काम करने वालों या स्पीलर सेल को निर्देश देने के लिए था. ऐसे में सुरक्षा निगरानी बढ़ाने को कहा गया है.

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अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हमले में अली खामेनेई की मौत हो गई थी. (फाइल फोटो: ITG)

ईरान के मिसाइल और ड्रोन के बाद अमेरिका को एक नया डर सताने लगा है. पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत के बाद ईरान के स्लीपर सेल नेटवर्क के एक्टिव होने का डर. अमेरिका के हाथ कुछ ट्रांसमिशन लगे हैं, जिसमें ऐसा अनुमान जताया गया कि कि ईरान अलग-अलग देशों में फैले अपने स्लीपर सेल एक्टिव कर रहा है. इस मामले में अमेरिका की फेडरल सरकार ने लॉ एनफोर्समेंट एजेंसियों को अलर्ट भेजा है.

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इस अलर्ट को देखने वाली अमेरिकी न्यूज साइट ABC News ने अपनी खबर में लिखा कि सुप्रीम लीडर की मौत के तुरंत बाद ट्रांसमिशन सिग्नल को डिटेक्ट किया गया. अमेरिकी इंटेलिेजेंस ने कहा कि शायद यह एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन ईरान से आया है. यह देश के बाहर 'स्लीपर एसेट्स' के लिए 'एक ऑपरेशनल ट्रिगर' का काम कर सकता है.

अलर्ट में कहा गया,

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‘हो सकता है कि ट्रांसमिशन ओरिजिनल देश (ईरान) के बाहर काम कर रहे पहले से मौजूद स्लीपर एसेट्स को एक्टिवेट करने या निर्देश देने के लिए हो.’

ये ट्रांसमिशन एन्कोडेड था. अमेरिकी एजेंसियों का मानना है कि ये ट्रांसमिशन 'सीक्रेट रिसीवर्स' के लिए था, जिनके पास इसका एन्क्रिप्शन था. यह ऐसा मैसेज था जिसका मकसद इंटरनेट या मोबाइल नेटवर्क का इस्तेमाल किए बिना गुप्त तरीके से काम करने वालों या स्पीलर सेल को निर्देश देने के लिए था. अलर्ट में कहा गया कि ट्रांसमिशन की असल बातों का अभी पता नहीं चला है. लेकिन इसमें हालात के मुताबिक जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया गया है.

अलर्ट में साफ शब्दों में इस बात का खुलासा है कि "किसी खास जगह से कोई ऑपरेशनल खतरा नहीं है," लेकिन यह लॉ एनफोर्समेंट एजेंसियों को संदिग्ध रेडियो-फ्रीक्वेंसी एक्टिविटी पर अपनी मॉनिटरिंग बढ़ाने का निर्देश भी देता है.

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यह खुफिया जानकारी ऐसे समय में आई जब अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जंग जारी है. तेहरान में तेल डिपो पर हमलों के बाद इजरायल ने लेबनान के बेरूत में हिज्बुल्लाह के इंफ्रास्ट्रक्चर पर नए हमले किए. ईरान ने जवाब में इजरायल और वेस्ट एशियाई मुल्कों में अमेरिकी सेना की मेजबानी करने वाले देशों को निशाना बनाकर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं.

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