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पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी कोरोना के मामलों को छिपा रही हैं?

डॉक्टर क्या कह रहे हैं?

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पश्चिम बंगाल सरकार पर आरोप हैं. कम टेस्टिंग और कम रिपोर्टिंग के. (तस्वीर : PTI)
पश्चिम बंगाल. यहां के कोरोना मरीज़ों के आंकड़ों पर सवाल उठ रहे हैं. ममता बनर्जी सरकार पर आरोप है आंकड़े छिपाने का. कहा जा रहा है कि सरकार कोरोना के सम्भावित मरीज़ों की जांच नहीं करवा रही है. साथ ही मरीज़ों के आँकड़ों को कम करके दिखा रही है.
ऐसा कहने के कई कारण हैं. आरोप हैं. और आंकड़े हैं. सबसे पहले रूख करिए एक वेबसाइट का. covid19india.org. यहां पर भारत के कोरोनावायरस के आंकड़े हैं. स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा दिए गए. इस डेटा को राज्यवार बांटा गया है. फिर राज्यवार डेटा को जिलावार बांटा गया है. सबकुछ है. यहां पर जब आप पश्चिम बंगाल के टैब पर आयेंगे तो आपको 392 कोरोना के केस मिलेंगे. इस ख़बर के लिखे जाने तक.
वेबसाइट बता रही है कि लगभग 365 केस अज्ञात इलाक़ों से आए हैं, वेबसाइट बता रही है कि लगभग 365 केस अज्ञात इलाक़ों से आए हैं,

अब यहां पर ये सोचना सही है कि पश्चिम बंगाल के ये सभी लगभग 400 के केस राज्य के सभी 23 जिलों में बंटे होंगे. लेकिन ऐसा है नहीं. इस वेबसाइट पर कुल 9 जिलों के आंकड़े ही हैं. और इन 9 जिलों के आंकड़ों का योग मिलाकर बनता है 27. और बाक़ी के 365 केस के सोर्स अज्ञात हैं. मतलब वे कहां-किस जिले से आए, इसकी कोई जानकारी नहीं मिलती है. वेबसाइट पर कहा जा रहा है कि इस बारे में राज्य सरकार के बुलेटिन का इंतज़ार किया जा रहा है.
और हेल्थ बुलेटिन क्या कह रहा है? 21 अप्रैल को जारी हुआ हेल्थ बुलेटिन कहता है कि राज्य में अब तक कुल मिलाकर 362 केस सामने आए हैं. इनमें से 274 अब तक ऐक्टिव हैं. 73 को डिस्चार्ज किया जा चुका है, जबकि 15 की मौत हो चुकी है. ट्रैकर से अलग आंकड़े. और यहां भी जिलावार आंकड़ों का कोई ज़िक्र नहीं.
यहां पर एक और बात साफ़ होती है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय बताता है कि पश्चिम बंगाल में कुल 392 मामले हैं, जबकि राज्य सरकार 362 का दावा करती है. दोनों में लगभग 30 कोरोना मामलों का अंतर है.
हालांकि ममता बनर्जी की सरकार पर सिर्फ़ आंकड़ों ने ही नहीं, विपक्षियों ने, जांच करने वाली एजेंसियों ने भी सवाल उठाए हैं. विपक्षी कौन? भाजपा. आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने ट्विटर पर बताया कि पश्चिम बंगाल सरकार रोज़ाना हेल्थ बुलेटिन जारी ही नहीं कर रही है. ये ट्वीट 6 अप्रैल को किया गया था. बात अमित मालवीय के ट्वीट से अलग ले जायें. पश्चिम बंगाल सरकार की वेबसाइट पर इन तीन दिनों — यानी 2, 3 और 5 अप्रैल — के हेल्थ बुलेटिन ग़ायब मिल रहे हैं.
इसके अलावा PTI के हवाले से छपी ख़बर की मानें तो ICMR की टेस्टिंग लैब ने भी पश्चिम बंगाल सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं. National Institute of Cholera and Enteric Diseases (NICED). कोलकाता में है. ICMR का नोडल टेस्टिंग सेंटर है. कहा है कि राज्य सरकार जांच के लिए बेहद कम सैम्पल भेज रही है.
यहां की डायरेक्टर डॉ. शांता दत्ता ने 19 अप्रैल को PTI को दिए अपने बयान में कहा,
“बीते हफ़्ते हमें रोज़ाना 20 से भी कम सैम्पल मिल रहे थे. जांच के लिए कितने सैम्पल भेजे जाएँगे, इसका भी निर्धारण राज्य सरकार कर रही है. ऐसे में अगर वो और सैम्पल भेजते हैं तो हम और जांच कर सकते हैं. लेकिन मेरा सोचना है कि मानकों के अनुसार सैम्पल नहीं लिए जा रहे हैं. इसलिए पूरे बंगाल में कोरोना केस की जांच बहुत कम हो रही है.”
इसके कुछ दिनों पहले ममता बनर्जी ने बयान दिया कि टेस्ट किट की कमी है. लेकिन डॉ. शांता दत्ता ने बताया कि ICMR ने NICED को 42,500 टेस्ट किट भेजे हुए हैं. और टेस्ट किट की किसी तरह की कोई कमी नहीं है.
डॉक्टर क्या कहते हैं?
डॉक्टर दबी ज़ुबान में राज्य सरकार पर आरोप लगा रहे हैं. आंकड़े छिपाने के आरोप. कम टेस्टिंग करने के आरोप. कोलकाता के एक डॉक्टर ने PTI से बताया,
“राज्य सरकार को जांच की संख्या तुरंत बढ़ा देनी चाहिए. अब तो ये दिख रहा है कि बहुत सारे मरीज़ों में कोरोना के कोई लक्षण ही नहीं दिख रहे हैं. ऐसे में केवल जांच से ही मरीज़ों की सही संख्या पकड़ में आ सकती है.”
डॉक्टर ने ये भी कहा कि जिस तरह से चुप कराकर मामले को ठंडे बस्ते में डाला जा रहा है, उससे स्थितियां और ख़राब होंगी. सरकारी हेल्थ बुलेटिन ख़ुद कहता है. राज्य में कोरोना के अब तक महज़ 6182 टेस्ट हुए हैं. लेकिन डॉक्टर साहब की “चुप कराने” की बात का क्या मतलब है? इस बारे में सिलीगुड़ी के हेरिटेज हॉस्पिटल के एक डॉक्टर लल्लनटॉप से बताते हैं. कहते हैं,
“तरीक़ा तो ये है कि एक भी पेशेंट मिलने पर हम उसकी कांटैक्ट ट्रेसिंग करें, और सम्पर्क में आए लोगों की जांच करें. लेकिन यहां पर एक भी मामला आ रहा है तो वो मामला सीधे मुख्यमंत्री तक जाता है. और मुख्यमंत्री तय करती हैं कि इसे रिपोर्ट करना है या नहीं करना है. ठीक से जांच और ठीक से जांच को रिपोर्ट किया जाए, तो और अधिक मामले सामने आ जायेंगे.”
सरकार का क्या पक्ष है?
पश्चिम बंगाल सरकार के चीफ सेक्रेटरी राजीव सिन्हा ने बताया कि टेस्ट्स की संख्या कम इसलिए है क्योंकि ICMR द्वारा जिन लैबों को स्वीकृति दी जाती है, वे ही लैब कोरोना की जांच कर सकती हैं. और ऐसी लैब की संख्या कम है. जैसे-जैसे स्वीकृति मिलती जाती है, हम जांच का दायरा बढ़ाते जाते हैं. तृणमूल कांग्रेस से राज्यसभा सांसद डेरेक ओब्रायन ने कहा,
“पश्चिम बंगाल में कोरोना के केस इसलिए कम हैं क्योंकि यहां की सरकार ने मेहनत की है. हमने कड़ी मेहनत की है. और हमने कोरोना की जांच और मरीज़ों की पहचान करने की कार्रवाई एकदम शुरुआती दिनों में ही शुरू कर दी थी.”
तृणमूल कांग्रेस के साथ पश्चिम बंगाल में लगे हुए प्रशांत किशोर ने भी लल्लनटॉप से बातचीत में बताया कि सरकार पूरी तैयारी और पूरे मानकों का ध्यान देते हुए काम कर रही है.
लेकिन कुछ सवालों के जवाब अब भी अनुत्तरित हैं. वो ये कि तीन दिन हेल्थ बुलेटिन क्यों नहीं आए? जिलावार आंकड़े क्यों नहीं? और अज्ञात सोर्स कौन-से हैं, जहां से सबसे अधिक मामले दर्ज किए जा रहे हैं? जवाब आता है, तो लल्लनटॉप के पाठकों और दर्शकों से भी हम साझा करेंगे.
कोरोना ट्रैकर :

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