नाम- प्रियेशआईटी सेक्टर में नौकरी करने वालों को पता होगा, एक टर्म होता है, बेंच. बेंच उन टीम मेंबर को कहते हैं जिनके पास काम नहीं होता है. लेकिन वह कंपनी के हिस्सा होते हैं. एवरेज टाइम में 5% लोग मान सकते हैं इनकी संख्या दिखाकर ही आईटी सेक्टर की कंपनियां प्रोजेक्ट उठाती हैं. मेरी क्या स्थिति है ऐसे समझें कि, हमारी कंपनी के नोएडा और गुड़गांव ऑफिस मिला के दो हजार लोग काम करते होंगे. रैंडम देखा जाए तो पहले मेरे नोएडा ऑफिस में 20-30 लोग एक सप्ताह तक बेंच पर रहते थे. अब एक महीने से 300 से ज्यादा लोग बेंच पर हैं. मैं खुद हूं. मैं आठ साल से जॉब कर रहा हूं. कभी एक सप्ताह से ज्यादा बेंच पर नहीं रहा. अब एक महीना होने जा रहा है. 2008 की मंदी देखी है मैंने. वैसे ही वाइव्स हैं.
काम- वेबसाइट डेवलपर
जगह- नोएडा

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मेरा काम वेबसाइट्स डेवलपर का है. फ्रंटएंड डेवलपर. जैसे मान लीजिए आप कोई वेबसाइट खोलते हैं तो सबसे पहले क्या आता है? या कहीं क्लिक किया तो कौन सा पेज खुलेगा. ये सब काम मै करता हूं. कलर से लेकर कंटेंट तक सब बनाना और फिर क्लांइट को दिखाना, यही काम है. मेरा एक प्रोजेक्ट 13 मार्च को खत्म हुआ था. तब से मैं बेंच पर था. हम तो घर से काम कर लें लेकिन काम आए तब तो.

यह तस्वीर भी सांकेतिक है.
मेरे रुटीन पर तो असर पड़ा ही है. इवन सब पर थोड़ा बहुत पड़ा है. मेरे ऑफिस का रुटीन था कि सुबह साढ़े आठ से शाम साढ़े पांच तक का ऑफिस ऑवर था. थोड़ा फ़्लेक्सबल भी था. सुबह देर से जाते थे तो लौटते भी काम खत्म करने के बाद थे. अब मेरा रुटीन ही नहीं है कोई. यहां नोएडा में मां हैं. कैंसर पेशेंट हैं. दवा वगैरह के लिए थोड़ी दिक्कत भी हो रही. वाइफ, यूपी के गाजीपुर में प्राइमरी में टीचर हैं. वो लोग अलग लॉकडाउन में हैं. थोड़ा डिस्टर्बिंग है. लगता है कभी कि कब सब ठीक होगा और काम पहले जैसा शुरु हो सकेगा. आठ साल से आईटी इंडस्ट्री में हूं. पहले जैसा नहीं रह जाएगा इतना तो समझ आ रहा है. लंबा खिंचा तो नौकरी पर भी खतरा है. कोई बैठा के आखिर क्यों खिलाएगा? और कब तक खिलाएगा?
# कोट-
मेरा बस यही अनुरोध है कि आप सब पर आश्रित हर उस शख्स की मदद में आगे रहें जो इस लॉकडाउन से पहले आपके काम आ रहा था. चाहें मेड हों या माली. हर किसी की मदद करनी होगी. शुक्रिया.
कोरोना डायरीज. अलग अलग लोगों की आपबीती. जगबीती. ताकि हम पढ़ें. संवेदनशील और समझदार हों. ये अकेले की लड़ाई नहीं है. इसलिए अनुभव साझा करना जरूरी है. आपका भी कोई खास एक्सपीरियंस है. तस्वीर या वीडियो है. तो हमें भेजें.














