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कोरोना डायरीज: इस पुलिसवाली ने शादी रुकवाकर जो कहा, सुनकर सेल्यूट करोगे

होने वाले पति ने पीएम मोदी को चिट्ठी लिखकर कहा था, ‘मेरे घरवालों को समझाओ’

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कोरोना महामारी ने जहां एक तरफ़ देश भर का काम काज ठप्प किया है तो वहीं दूसरी ओर ज़रूरी सेवाओं के लोगों पर अचानक बहुत ज़्यादा भार आ गया है (बाएं सोनी कुमारी, दाएं पुलिस की की सांकेतिक तस्वीर)
सोनी कुमारी
सोनी कुमारी

नाम- सोनी कुमारी
काम – बिहार पुलिस
पता -  बिहार

मेरा नाम सोनी कुमारी है. मैं बिहार पुलिस में हूं. पुलिस की नौकरी मेरे लिए नौकरी बाद में है, पहले ये मेरा ज़िन्दगी जीने का तरीका है. अगर सिर्फ़ नौकरी ही करनी होती तो कोई और नौकरी भी कर सकती थी. लेकिन पुलिस में काम करना मेरा हमेशा से सपना था. सोसायटी के लिए कुछ कर सकूं ये सोच थी मेरी. बचपन से महिलाओं की हालत देखती आई हूं. सुबह अखबार उठाते ही महिलाओं के प्रति समाज की सोच दिख जाती है. पूरा न्यूज़ पेपर महिलाओं पर हो रहे अपराध से भरा रहता है.

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इसलिए मैं पुलिस में आई. ताकि अपने हिस्से की लड़ाई अपने बल पर लड़ सकूं. लेकिन हमारे यहां किसी महिला का पुलिस में काम करना आम बात नहीं है. आमतौर पर माना जाता है कि महिला होने का मतलब है आपकी गृहस्थी होना. बेटी को बचपन से खाना बनाना सिखाया जाता है ताकि वो बड़ी होकर ससुराल में नाम ना ख़राब करे.


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शादी पूरे भारत में एक ऐसा संस्कार है जिसके लिए परिवार जीवन भर तैयारी करता है. मेरे परिवार में भी इसकी ख़ूब तैयारी हुई है. 1 मई को मेरी शादी तय हुई थी. जब शादी तय हुई थी तब देश में कोरोना नहीं आया था. शुरू में लग रहा था कि हम सुरक्षित हैं. चीन में ही रह जाएगा कोरोना. लेकिन जब पहला लॉकडाउन हुआ तब लगा कि मामला गंभीर है. पुलिस दिन रात की ड्यूटी के लिए तैयार कर दी गई. लॉकडाउन का पालन कराने की ज़िम्मेदारी हम पर ही है. साथ ही भोजन और आवास संबंधी कोई इमर्जेंसी हो तो भी पुलिस को ही मोर्चा संभालना है. हम लोग पूरी तरह तैनात हैं. हफ़्तों से लोग घर नहीं गए. मेरे घरवालों ने पूछा कि कैसे भी करके तय तारीख़ पर शादी हो जाए. घर के दो चार लोग ही हों.

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लेकिन जब देश इतनी बड़ी विपत्ति में है तो मैं शादी कैसे करूं? मैं नहीं चाहती कि जीवन का अगला पड़ाव इतनी बड़ी महामारी के साथ शुरू करूं. इसलिए घरवालों को साफ़ कह दिया कि पहले कोरोना महामारी को हराउंगी, इसके बाद ही शादी करूंगी. जब मेरे अपने महकमे के लोग अपना सब कुछ छोड़कर इस महामारी से लड़ाई लड़ रहे हैं तो मैं कैसे उन्हें शादी की मिठाई खिलाऊं?


कोरोना के चलते देश रुका हुआ है और पुलिस पर लॉकडाउन का पालन कराने की बड़ी ज़िम्मेदारी है
कोरोना के चलते देश रुका हुआ है और पुलिस पर लॉकडाउन का पालन कराने की बड़ी ज़िम्मेदारी है

ऐसा तो है नहीं कि देश में एक मेरी ही शादी रुकी है. पूरा देश रुका हुआ है. किसान-मजदूर सबके काम ठप्प पड़े हुए हैं. तो ऐसे में ये शादी मेरे पेशे के साथ और मेरी आत्मा के साथ न्याय नहीं होती. इसलिए शादी के लिए साफ़ मना कर दिया. जब देश कोरोना के इस संकट से बाहर निकलेगा, तभी मैं अपने नए घर में पांव रखूंगी. कोरोना से लड़ाई में होने वाले पति ने भी बहुत साथ दिया. उन्होंने ना सिर्फ़ मेरे फ़ैसले का समर्थन किया बल्कि ख़ुद भी पीएम मोदी को एक चिट्ठी लिखी. जिसमें लिखा कि घरवालों को समझाएं कि शादी में भीड़ ना करें. गिने चुने लोगों के साथ ही शादी का कार्यक्रम करें.

# कोट-
इस महामारी को जब तक हराएंगे नहीं तब तक इस देश की सच्ची जीत नहीं होगी.

कोरोना डायरीज. अलग अलग लोगों की आपबीती. जगबीती. ताकि हम पढ़ें. संवेदनशील और समझदार हों. ये अकेले की लड़ाई नहीं है. इसलिए अनुभव साझा करना जरूरी है. आपका भी कोई खास एक्सपीरियंस है. तस्वीर या वीडियो है. तो हमें भेजें. corona.diaries.LT@gmail.com

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