गुलाम नबी आजाद के इस्तीफे के बाद कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने भी पार्टी के नेतृत्व पर सवाल उठाया है. मनीष तिवारी के मुताबिक, अगर पार्टी नेतृत्व कई विधानसभा चुनावों में हार के बाद आत्मनिरीक्षण करता तो इस्तीफे को रोका जा सकता था. उन्होंने कहा कि 20 से ज्यादा कांग्रेस नेताओं ने पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी को लिखा था कि अगर दिसंबर 2020 में हुई बैठक में बनी सहमति को लागू किया जाता तो ऐसी स्थिति नहीं आती. मनीष तिवारी पंजाब के आनंदपुर साहिब से लोकसभा सांसद हैं.
आजाद के इस्तीफे पर मनीष तिवारी बोले, ‘कल तक जो कांग्रेस नेताओं के चपरासी थे, आज ज्ञान दे रहे'
मनीष तिवारी ने कहा कि उन्हें किसी से सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं है.


मनीष तिवारी कांग्रेस के उन 23 नेताओं में शामिल थे जिन्होंने सोनिया गांधी को पत्र लिखकर नेतृत्व पर सवाल उठाए और पार्टी में बदलाव की मांग की थी. इन नेताओं के समूह को 'G-23' कहा गया था. बाद में इस समूह के कई नेताओं ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया था.
किसी से सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं- मनीषपूर्व केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी ने गुलाम नबी आजाद के इस्तीफे के बाद समाचार एजेंसी ANI से बात की. उन्होंने कहा,
"भारत और कांग्रेस के बीच 1885 से ही एक सामंजस्य बना हुआ था, जिसमें अब दरार जैसी दिख रही है. आत्मनिरीक्षण की जरूरत है. दो साल पहले, हम 23 नेताओं ने सोनिया गांधी को लिखा था कि पार्टी की स्थिति चिंताजनक है. इसे गंभीरता से लेने की जरूरत है. उस लेटर के बाद कांग्रेस पार्टी सारे विधानसभा चुनाव हारी है. अगर कांग्रेस और भारत की सोच एक जैसी है, तो अब लगता है कि किसी एक ने अलग तरीके से सोचना शुरू कर दिया है."
पार्टी में अपनी स्थिति को लेकर मनीष तिवारी ने कहा कि उन्हें किसी से सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं है. उन्होंने कहा,
"मैंने 42 साल पार्टी को दिए हैं. मैंने पहले भी कहा है कि हम कांग्रेस में किरायेदार नहीं हैं, बल्कि इसके सदस्य हैं. अगर आप धक्के मारकर बाहर करने की कोशिश करेंगे तो अलग बात है और तब देखा जाएगा."
पूर्व राज्यसभा सांसद गुलाम नबी आजाद के इस्तीफे पर उन्होंने कहा कि वे आजाद के पत्र की मेरिट पर नहीं जाएंगे. इसे तो वही (आजाद) सही से स्पष्ट कर सकते हैं. मनीष तिवारी ने कहा कि जो लोग वार्ड का चुनाव तक नहीं जीत सकते... कल तक जो कांग्रेस नेताओं के ‘चपरासी’ बने रहे आज पार्टी को लेकर 'ज्ञान' दे रहे हैं, यह हास्यास्पद है.
26 अगस्त को गुलाम नबी आजाद ने पार्टी से इस्तीफा देते हुए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को 5 पेज लंबा पत्र लिखा. आजाद ने कहा कि इस समय 'चापलूसों का एक गिरोह' पार्टी को चला रहा है और सोनिया गांधी सिर्फ 'नाम की अध्यक्ष' बनी हुई हैं. आजाद ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी 'अपरिपक्व' हैं और उन्होंने पार्टी के पुराने विचार-विमर्श के ढांचे को धराशायी किया है. उन्होंने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि साल 2019 के चुनाव के बाद से पार्टी की स्थिति और खराब हुई है.
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