महिला ने भारत के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई पर यौन उत्पीड़न के इल्जाम लगाए हैं. महिला ने आरोप लगाया है कि चीफ जस्टिस ने बीते साल 10 और 11 अक्टूबर को उनके साथ छेड़छाड़ की थी. महिला सुप्रीम कोर्ट में जूनियर कोर्ट असिस्टेंट के तौर पर काम करती थीं. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के 22 जजों को हलफनामा भेजकर अपना पक्ष रखा है. महिला के आरोपों पर 20 अप्रैल, शनिवार के दिन सुप्रीम कोर्ट में विशेष सुनवाई हुई. सुनवाई वाली बेंच में खुद चीफ जस्टिस रंजन गोगोई शामिल थे. उन्होंने आरोपों को बेबुनियाद बताया. उन्होंने कहा कि ये आरोप फर्जी हैं और इन्हें खारिज करना भी बहुत नीचे गिरने जैसा होगा जो वो नहीं करना चाहेंगे. गोगोई ने कहा कि न्यायपालिका खतरे में है. अगले हफ्ते कई अहम मामलों की सुनवाई होनी है. इसीलिए जानबूझकर ऐसे आरोप लगाए गए हैं.
सुनवाई करने वाली बेंच और जस्टिस गोगोई ने क्या बोला ये हम आगे जानेंगे. पहले जान लेते हैं मामला क्या है?
रिपोर्ट के अनुसार इस मामले की जानकारी केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह और दिल्ली पुलिस के कमिश्नर अमूल्य पटनायक को भी दी गई थी. 11 जनवरी, 2019 को.
आरोप लगाने वाली महिला 2014 से सुप्रीम कोर्ट में काम कर रही थीं. महिला के मुताबिक वो गोगोई के चीफ जस्टिस बनने से पहले उनके स्टाफ में काम करने लगी थीं. हलफनामे में आरोप लगाया गया है कि चीफ जस्टिस का पद संभालते ही महिला की निजी और प्रोफेशनल लाइफ में विशेष दिलचस्पी लेनी शुरू कर दी गई थी. बाद में महिला को चीफ जस्टिस के तीस जनवरी रोड स्थित आवासीय ऑफिस में ट्रांसफर कर दिया गया. जहां चीफ जस्टिस के साथ काम करने के लिए कहा गया.
महिला का दावा है कि यहां दो अलग-अलग मौकों पर चीफ जस्टिस ने इच्छा के विरुद्ध उन्हें छुआ और गले लगाया. ऐसी घटना की वजह से "मुझे अपने हाथों से उनको धक्का देने के लिए मजबूर होना पड़ा."
इस पूर्व कर्मचारी का दावा है कि गोगोई ने बाद में कहा कि वो इस घटना के बारे में किसी को कुछ न बताए. वरना गंभीर नतीजे भुगतने पड़ेंगे.
तीन बार ट्रांसफर किया गया कारवां की रिपोर्ट के मुताबिक महिला ने आरोप लगाया कि इन घटनाओं के चार हफ्ते के भीतर सुप्रीम कोर्ट के ही अलग-अलग सेक्शन में उनका तीन बार ट्रांसफर किया गया. और नवंबर के आखिर में उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई अमल में लाई गई. उन पर आरोप लगाया गया कि अपने तबादलों के बारे में पूछताछ करके महिला ने अनुशासन तोड़ा है. साथ ही बाहरी दबाव डालने की कोशिश की. एक और आरोप लगा. वो ये कि महिला ने एक सहकर्मी से ये पूछा कि क्या उनकी क्षमताओं में कमी की वजह से उनकी बार-बार पोस्टिंग की गई. कि महिला ने शनिवार को आकस्मिक अवकाश लिया और ये सब करके काम में समर्पण का अभाव और अनुशासनहीनता दिखाई है.
इन आरोपों के बाद 21 दिसंबर, 2018 को महिला को सुप्रीम कोर्ट से बर्खास्त कर दिया गया. साल के अंत तक उनके पति और पति के भाई को सस्पेंड कर दिया गया. वे दोनों दिल्ली पुलिस में काम करते थे.
महिला पर घूस लेने का आरोप
कारवां में छपी रिपोर्ट के मुताबिक इस साल मार्च में हरियाणा के झज्जर निवासी नवीन कुमार ने दिल्ली के तिलक मार्ग थाने में महिला के खिलाफ एक एफआईआर दर्ज कराई. नवीन कुमार ने आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट की पूर्व कर्मचारी ने उसके साथ धोखाधड़ी की है. उसने 50,000 रुपए लिए हैं. ये रुपए सुप्रीम कोर्ट में नौकरी लगवाने के नाम पर घूस के तौर पर लिए गए हैं. अपने हलफनामे में पूर्व महिला कर्मचारी ने कहा है कि 'ये आरोप पूरी तरह मनगढ़ंत हैं. और मुझे और मेरे परिवार को प्रताड़ित करने के लिए लगाए गए हैं.'
एफआईआर दर्ज होने के पांचवें दिन 8 मार्च को तिलक मार्ग थाने की पुलिस महिला को राजस्थान से पकड़कर ले आई. महिला ने अपने हलफनामे में लिखा है कि जैसा कि पुलिस को निर्देशित किया गया था. उनके और उनके परिवार के साथ अत्याचार किया गया. एसएचओ ने महिला का एक पैर बांध दिया. रात भर बैठाए रखा. लातों से मारा पीटा गया और गालीगलौच की गई. उसके बाद तिहाड़ जेल भेज दिया गया. 12 मार्च को उन्हें जमानत मिली. महिला का कहना है कि उसके बाद भी परेशान किया जाता रहा.

अक्टूबर 2018 में राष्ट्रपति भवन में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया के पद की शपथ लेने के दौरान रंजन गोगोई.
शनिवार को सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ? महिला के आरोपों और कुछ वेबसाइट्स में प्रकाशित इस खबर के बाद सुप्रीम कोर्ट में 20 अप्रैल को ही अवकाश होने के बावजूद तीन जजों की बेंच बैठी. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली इस बेंच में जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस संजीव खन्ना शामिल थे.
बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक चीफ जस्टिस ने चार वेबसाइटों का नाम लिया. स्क्रॉल, लीफलेट, द वायर और कारवां. कहा कि इन्होंने आपराधिक इतिहास वाली इस महिला के असत्यापित आरोपों को प्रकाशित किया है. इनके तार आपस में जुड़े हैं. न्यूज़ एजेंसी एएनआई के मुताबिक चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने ये बातें बोली -
1. ये अविश्वसनीय है. मैं इतना नीचे नहीं गिरना चाहूंगा कि इन बातों को खारिज करने के लिए भी जवाब दूं. 2. जो मैं इस देश के नागरिकों से कहना चाहता हूं वो ये कि देश की न्यायपालिका एक बहुत बहुत गंभीर खतरे का सामना कर रही है. 3. मैं इस बेंच पर बैठूंगा और अपने कर्तव्यों का निर्वहन बिना किसी भय या पक्षपात के करूंगा. 4. भला कोई समझदार आदमी जज क्यों बनना चाहेगा? हम लोगों के पास सिर्फ प्रतिष्ठा ही तो होती है. अब उस पर भी हमला हो रहा है. 5. जिस महिला ने सेक्शुअल हैरेसमेंट के आरोप लगाए हैं उसके पीछे कुछ बड़ी शक्तियां काम कर रही हैं. 6. मेरे खिलाफ जो आरोप लगाए गए हैं मैं उनसे बहुत आहत हूं. जिन चार मीडिया हाउस ने मेरे खिलाफ खबरें छापी हैं मैंने उन्हें जवाब दे दिया है. 7. मेरे पास सिर्फ 6,80,000 रुपये का बैंक बैलेंस है. 20 बरसों की सेवा और 6.80 लाख रुपये के बैंक बैलेंस के बाद देश के चीफ जस्टिस को ये पुरस्कार मिलता है. 8. अगर उस महिला के ऊपर आपराधिक मामले हैं तो उसने सुप्रीम कोर्ट सेवाओं में कैसे प्रवेश कर लिया? 9. चीजें हद से आगे बढ़ चुकी हैं और न्यायपालिका को अब और निशाना नहीं बनाया जा सकता.
इस मामले को लेकर विशेष बेंच ने बहुत बड़ा दावा किया और मामले के पीछे भारी साजिश बताई. बेंच ने कहा -
"न्यायपालिका की स्वतंत्रता बहुत गंभीर खतरे में है. ये न्यायपालिका को अस्थिर करने की एक 'बड़ी साजिश' है. इस मामले पर विचार करने के बाद हम लोग इस मौके पर, इस मामले पर कोई न्यायिक आदेश नहीं देना चाहेंगे. हम इसे मीडिया के विवेक पर छोड़ते हैं कि वे संयम का प्रदर्शन करें, जिम्मेदारी से काम करे जैसी कि उनसे उम्मीद की जाती है. और उसके बाद तय करें कि क्या प्रकाशित होना चाहिए और क्या नहीं. क्योंकि ऐसे बेसिर-पैर के और स्कैंडलनुमा आरोप न्यायपालिका की स्वतंत्रता को नकारते हैं, उसकी साख को इतना नुकसान पहुंचा देते हैं जिसे फिर ठीक कर पाना संभव नहीं हो पाता. इसलिए इस पल में हम इसे मीडिया के ऊपर छोड़ते हैं कि वे इस अवांछित मटीरियल को कैसे लेते हैं."
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