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चंद्रनाथ रथ हत्याकांड में पुलिस से बड़ी गलती, मेन शूटर समझ किसी और धर लिया

Chandranath Rath Murder: पश्चिम बंगाल के सीएम शुभेंदु अधिकारी के PA चंद्रनाथ रथ की हत्या के आरोप में पुलिस ने गलत शख्स को मेन शूटर समझकर गिरफ्तार कर लिया है. मेन शूटर राज सिंह नहीं बल्कि राजकुमार सिंह है. उसे राज सिंह भी कहा जाता है.

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पुलिस ने PA चंद्रनाथ रथ की हत्या में गलत आरोपी को पकड़ लिया था. (फोटो-इंडिया टुडे)

पश्चिम बंगाल के सीएम शुभेंदु अधिकारी के PA चंद्रनाथ रथ की हत्या के आरोपी को पकड़ने में पुलिस से एक बड़ी गलती हो गई. पुलिस ने गलत शख्स को मेन शूटर समझकर गिरफ्तार कर लिया है, जबकि असली शूटर राजकुमार सिंह बलिया का रहने वाला बताया गया है.

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बंगाल चुनाव नतीजे आने के दो दिन बाद 6 मई की रात 9 बजकर 58 मिनट पर चंद्रनाथ रथ की हत्या कर दी गई. हमलावरों ने उनकी कार रुकवाकर कई राउंड फायरिंग की. चंद्रनाथ को सीने और पेट में 3 गोलियां लगी थीं. मामला सीधे राजनीतिक गलियारों तक पहुंचा इसलिए जांच CBI को सौंप दी गई.

शुरुआत में पुलिस ने बिहार के बक्सर से दो लोगों विक्की मौर्य और मयंक मिश्रा को गिरफ्तार किया. पूछताछ हुई तो दोनों ने एक तीसरे नाम का खुलासा किया, राज सिंह. पुलिस को लगा कि यही मेन शूटर है. तुरंत कार्रवाई हुई. राज सिंह को पकड़ लिया गया और कोर्ट से 13 दिन की कस्टडी भी मिल गई.

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लेकिन कहानी यहीं से पलट गई. पूछताछ के दौरान कई ऐसी बातें सामने आने लगीं जो मैच नहीं कर रही थीं. जांच अधिकारियों को शक हुआ कि कहीं गलत आदमी तो नहीं पकड़ लिया गया. अब पुलिस के सामने बड़ी दिक्कत ये थी कि जिसको मेन आरोपी बताकर गिरफ्तार किया गया है उसके खिलाफ सबूत कमजोर पड़ने लगे.

राज सिंह को मिली क्लीन चिट

CBI ने जांच का दायरा बढ़ाया. इसी दौरान एक नया नाम सामने आया राजकुमार सिंह, जिसे लोग राज सिंह के नाम से जानते थे. पुलिस के मुताबिक इसलिए ही गिरफ्तारी में ये कंफ्यूजन हुआ. राजकुमार सिंह बलिया का रहने वाला बताया गया. एजेंसी को इनपुट मिला कि राजकुमार हरिद्वार से लौट रहा है. इसी बीच CBI ने मुजफ्फरनगर के छपार टोल प्लाजा के पास जाल बिछा दिया.

18 मई की सुबह जैसे ही एक गाड़ी टोल पर पहुंची, टीम अलर्ट हो गई. राजकुमार को वहीं पकड़ लिया गया. काफी देर तक उससे पूछताछ हुई. फिर CBI के CO राजेश कुमार उसे कोर्ट लेकर पहुंचे जहां से 24 घंटे की रिमांड मिल गई. वहीं पहले गिरफ्तार किए गए राज सिंह को CBI की तरफ से क्लीन चिट मिल गई है. अब एजेंसी ये पता लगाने में जुटी है कि हत्या की साजिश किसने रची? इसमें और कौन-कौन शामिल हैं?

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कौन हैं राजकुमार सिंह?

राजकुमार बलिया के एक साधारण परिवार से आता है. उसके पिता त्रिभुवन नारायण सिंह अयोध्या में नौकरी करते थे और मार्च में रिटायर हुए हैं. परिवार में दो बेटे और एक बेटी है. राजकुमार ने बीए फर्स्ट ईयर तक पढ़ाई की. लेकिन पढ़ाई में मन नहीं लगा तो कॉलेज छोड़ दिया. इसके बाद मुंबई चला गया और वहां क्रेन हेल्पर का काम करने लगा. हालांकि करीब 8 महीने पहले वो काम छोड़कर वापस गांव आ गया था.

बताया जा रहा है कि वो विदेश जाने की तैयारी कर रहा था. पासपोर्ट भी बनवा रहा था ताकि बाहर जाकर काम कर सके. लेकिन इसी बीच उसका नाम इस हाई प्रोफाइल मर्डर केस में सामने आ गया. वैसे ये पहला मामला नहीं है जब राजकुमार विवादों में आया हो. 

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक करीब तीन साल पहले बलिया के रत्तोपुर गांव में हरिजन समाज के लोगों से हुए झगड़े में भी उसका नाम आया था और तब उसे जेल भी जाना पड़ा था. अब सबसे बड़ा सवाल यही है क्या राजकुमार ही असली शूटर है? अगर हां, तो पुलिस ने पहले गलत आदमी कैसे पकड़ लिया? और अगर नहीं तो इस केस में अभी और कितने ट्विस्ट बाकी हैं? फिलहाल CBI इन्हीं सवालों के जवाब ढूंढने में लगी हुई है.

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