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6000 रुपये की सरकारी नौकरी पर लगा था, अब रेड में 97 प्लॉट, 5 बिल्डिंग, दो फार्म हाउस और मार्केट कॉम्प्लेक्स मिले

Odisha engineer disproportionate assets case: भुवनेश्वर सबर ने 20 साल की उम्र में ओडिशा सरकार में जूनियर इंजीनियर के तौर पर काम शुरू किया था. तब उनकी आय 6 हजार रुपये थी. समय के साथ उनकी स्किल बढ़ी, प्रमोशन हुए और वे जूनियर इंजीनियर से एग्जीक्यूटिव इंजीनियर बन गए.

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भुवनेश्वर सबर पर आय से ज्यादा संपत्ति का आरोप लगा है. (फोटो-Pexels)

ओडिशा सरकार में एग्जीक्यूटिव इंजीनियर भुवनेश्वर सबर को गिरफ्तार किया गया है. उन पर भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति रखने का आरोप लगा है. उनके पास से कथित तौर पर पांच बहुमंजिला इमारतें, 97 प्लॉट में फैली 83 एकड़ जमीन, 17 एकड़ में फैले दो फार्म हाउस और एक मार्केट कॉम्प्लेक्स मिला है. 

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इससे अलग ओडिशा विजिलेंस डिपार्टमेंट ने उनसे जुड़े 6 ठिकानों पर छापा मारा. इस रेड में अधिकारियों ने उनके पास से 10.72 लाख रुपये की जमा राशि, एक फोर-व्हीलर, नकद और लगभग 20 लाख रुपये का घरेलू सामान भी जब्त किया. एक सरकारी इंजीनियर के लिए करोड़ों रुपये की एसेट का मालिक होना खटकने वाली बात थी, जिसके चलते उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 2018 के तहत केस दर्ज किया गया.  

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, भुवनेश्वर सबर ने 20 साल की उम्र में ओडिशा सरकार में जूनियर इंजीनियर के तौर पर काम शुरू किया था. तब उनकी आय 6 हजार रुपये थी. समय के साथ उनकी स्किल बढ़ी, प्रमोशन हुए और वे जूनियर इंजीनियर से एग्जीक्यूटिव इंजीनियर बन गए. 

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सबर की संपत्तियों का मूल्यांकन जारी

लेकिन इस प्रोग्रेस के बीच सिर्फ उनकी आय ही नहीं बढ़ी, बल्कि संपत्तियों की भी लाइन लगती चली गई. जब राज्य विजिलेंस डिपार्टमेंट के अधिकारियों ने उनसे सवाल किया. उनकी आय का सोर्स पूछा, तो वे सही-सही या कहें संतोषजनक जवाब नहीं दे सके. जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया. अब एक टेक्निकल विंग उनकी संपत्तियों का मूल्यांकन कर रही है. 

एक्सप्रेस से बात करते हुए डिपार्टमेंट के एक अधिकारी ने बताया,

“सबर ने पहली बार 1999 में जॉइन किया था. तब उन्हें ओडिशा के कोरापुट जिले के सुनाबेड़ा में सड़क और भवन विभाग में तैनात किया गया. 2013 में उनका प्रमोशन हुआ और वे असिस्टेंट इंजीनियर बन गए. मार्च 2024 में उन्हें फिर प्रमोट करके एग्जीक्यूटिव इंजीनियर बनाया गया. ”

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अधिकारियों ने बताया कि सबर कालाहांडी जिले के मूल निवासी हैं. 2007 से उनका अपने गृह जिले से बाहर ट्रांसफर नहीं हुआ है, जबकि उन्हें दो प्रमोशन मिल चुके हैं. सबर की ज्यादातर प्रॉपर्टी या तो कालाहांडी में है या नबरंगपुर जिले में. यानी जहां वे पहले तैनात थे. आगे मामले की जांच चल रही है. 

इंजीनियर के घर हुई छापेमारी ओडिशा सरकार की भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम का एक हिस्सा है. 2025 में ओडिशा विजिलेंस ने 339 लोगों के खिलाफ 205 मामले दर्ज किए, जिनमें 53 क्लास-I अधिकारी और 39 क्लास-II अधिकारी शामिल थे. इन 205 मामलों में से 49 मामले DA (आय से अधिक संपत्ति) जमा करने के और 98 ट्रैप केस थे.

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