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ईरान पर सबसे बड़े अटैक का फैसला हुआ, फिर इस वजह से ट्रंप ने सारे अटैक रुकवा दिए

US Iran War: बीते दो हफ्तों में यह पहली बार हुआ जब Donald Trump ने अमेरिकी सेना को ईरानी ठिकानों पर हमला करने से रोक दिया. यह तब हुआ जब वो सबसे बड़े हमले का फैसला कर चुके थे.

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डॉनल्ड ट्रंप को ईरान पर हमला ना करने पर मजबूर होना पड़ा. (PTI)

पाकिस्तान ने मेडिएटर बनकर ईरान और अमेरिका के बीच लड़ाई रुकवा दी थी. बस फाइनल एग्रीमेंट होना बाकी रह गया था. लेकिन, मामला बिगड़ गया और दोनों देशों के बीच जंग फिर शुरू हो गई. बीते दो हफ्तों से ताबड़तोड़ हमले हुए. अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ने माना कि अभी ईरान को तगड़ी चोट नहीं पहुंची. ट्रंप ईरान पर अब तक के सबसे ज्यादा कहर बरपाने वाले हमले पर फैसला लेने वाले थे. लेकिन रुक गए. उन्हें किसने रोका? आगे यही बात समझते हैं.

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23 जुलाई को ईरान पर लगातार 13वीं रात हमले करने से कुछ घंटे पहले डॉनल्ड ट्रंप ने मीडिया से बात की. उन्होंने बताया कि तेहरान को अभी तक उतना झटका नहीं मिला, जितना मिलना चाहिए था. ट्रंप को कतई चिंता नहीं थी कि ईरान पर लगातार बमों की बौछार करने से तनाव पहले से ज्यादा बढ़ जाएगा. ट्रंप ईरान को नुकसान पहुंचाने पर आमदा थे. उन्होंने कोई हिचकिचाहट नहीं दिखाई.

डॉनल्ड ट्रंप क्या बोले?

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, डॉनल्ड ट्रंप ने मीडिया से कहा,

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"मैं बड़ा अटैक करने की सोच रहा हूं. अब तक का सबसे बड़ा (अटैक). मैं इस पर फैसला लेने के बहुत करीब हूं. हम इसके लिए बिल्कुल तैयार हैं."

अमेरिका आगे बढ़ा और 13वीं रात को ईरान पर हमला कर दिया. लेकिन 14वीं रात को अमेरिका को अपने कदम पीछे खींचने पड़े. ईरान पर हमला नहीं हुआ. ट्रंप के ईरान पर सबसे बड़ा अटैक करने के 'उतावलेपन' को हवा नहीं मिल सकी. 24 घंटे में कुछ ऐसा हुआ कि ट्रंप को पीछे हटना पड़ा.

क्यों पीछे हटे ट्रंप?

अमेरिकी मीडिया संस्थान Axios की रिपोर्ट बताती है कि अमेरिकी सेंट्रल कमांड के हेड एडमिरल ब्रैड कूपर ने राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप को जमीनी हालात से रूबरू कराया. उन्होंने ट्रंप से होर्मुज स्ट्रेट के आसपास बमबारी को रोकने की सलाह दी.

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एडमिरल ब्रैड कूपर ने जोर दिया कि ईरान पर हमलों से उसे जितना नुकसान पहुंचना था, उतना पहुंच चुका है. रिपोर्ट में उनकी बात से वाकिफ दो सोर्स का हवाला दिया गया. उनकी सलाह समेत अन्य कारणों से डॉनल्ड ट्रंप ने शुक्रवार, 24 जुलाई को ईरान पर बमबारी बंद करने का फैसला किया.

Commander Admiral Brad Cooper
एडमिरल ब्रैड कूपर. (centcom.mil)

ब्रैड कूपर ने ट्रंप को समझाया कि मिलिट्री हमलों से एक हद तक ही कामयाबी मिल सकती है, जो पहले ही मिल चुकी है. खासकर हवाई हमलों से. बीते दो हफ्तों में यह पहली बार हुआ जब डॉनल्ड ट्रंप ने अमेरिकी सेना को ईरानी ठिकानों पर हमला करने से रोक दिया. इस फैसले के बाद सीनियर एडवाइजर्स और मिलिट्री अधिकारियों ने ट्रंप को स्ट्राइक का नया प्लान भी बताया.

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रिपोर्ट के मुताबिक, एडमिरल ब्रैड कूपर ने कहा कि अगला मुमकिन कदम 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' के दौरान पहचाने गए बाकी 20 परसेंट टारगेट पर हमला करना हो सकता है, जो उस समय हिट नहीं हुए थे. हालांकि, उन्होंने जोर देकर कहा कि पिछले दो हफ्तों के बमबारी कैंपेन को जारी रखने का कोई मतलब नहीं है.

अमेरिका के पास हथियारों की कमी?

सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट में बताया गया कि जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन ने निजी तौर पर पीट हेगसेथ और ट्रंप को चेतावनी दी थी कि एयर डिफेंस इंटरसेप्टर की कमी से इस इलाके में अमेरिकी सेना और उसके सहयोगियों की सुरक्षा करने की काबिलियत पर असर पड़ सकता है. द न्यूयॉर्क टाइम्स ने इसे रिपोर्ट किया था. माने, अमेरिका के पास हथियारों का जखीरा कम हो रहा है, जिससे ईरान पर बमबमारी जारी रखना मुश्किल है.

वीडियो: ईरान के पिकऐक्स माउंटेन को उड़ाना क्यों चाहते हैं ट्रंप?

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