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कलकत्ता हाई कोर्ट ने बंगाल सरकार की अपील ठुकराई, NHRC करेगा हिंसा के मामलों की जांच

पश्चिम बंगाल सरकार ने हाई कोर्ट में की थी अपील.

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बाएं से दाएं. TMC और BJP के झंडे. सुप्रीम कोर्ट. कोर्ट पहले ही West Bengal Violence पर केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी कर चुका है. (फोटो: PTI)
पश्चिम बंगाल में चुनाव परिणामों के बाद विरोधियों के ख़िलाफ़ सत्तारूढ़ पार्टी TMC कार्यकर्ताओं द्वारा राजनीतिक हिंसा की खबरों ने काफ़ी सुर्ख़ियां बटोरी थीं. सोमवार यानी कि 21 जून को कलकत्ता उच्च न्यायालय ने इस कथित हिंसा पर 18 जून के आदेश को वापस लेने की अपील ख़ारिज कर दी. ये अपील पश्चिम बंगाल सरकार ने दायर की थी. 18 जून के आदेश में उच्च न्यायालय ने नेशनल ह्यूमन राइट्स कमीशन (NHRC) को हिंसा की घटनाओं की जांच के आदेश दिए गए थे. आज 21 जून को हाई कोर्ट के बाहर दो लोग मीडिया से मुख़ातिब हुए. ममुनि साहा और उनके पति रबि साहा, जो फैसले की घोषणा के बाद कलकत्ता उच्च न्यायालय के बाहर खड़े थे. उन्होंने आरोप लगाया कि वे 2 मई के विधानसभा चुनाव परिणाम के बाद कोलकाता के भवानीपुर इलाके में अपने घर नहीं लौट पाए हैं. उन्होंने दावा किया कि उनकी वहां एक दुकान थी जहां वे चिकन बेचते थे. उनका आरोप है कि परिणाम के दिन TMC समर्थकों ने वहां तोड़फोड़ की थी. बताते चलें कि भवानीपुर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का विधानसभा क्षेत्र रहा है. और ऐसा माना जा रहा है कि वो यहां से फिर उप चुनाव लड़ सकती हैं. 'फ्री मांग रहे थे 10 किलो चिकन' टीवी न्यूज़ चैनल इंडिया टुडे से बात करते हुए इन दोनों ने आरोप लगाया कि उन्हें TMC में शामिल होने के लिए मजबूर किया जा रहा था. लेकिन क्योंकि वो तीन साल पहले ही BJP में शामिल हो गए इस वजह से वो TMC से नहीं जुड़े, न ही उन्होंने ये बात किसी को भी बताई कि वो BJP के सदस्य हैं. रबि साहा बताते हैं कि डेढ़ साल पहले इलाके में TMC समर्थकों को इस बात का पता चला और उन्होंने दंपति को डराया धमकाया. जिसके बाद रबि घर छोड़कर कर चले गए और लौट कर वापस नहीं आए. रबि कहते हैं, “मैं घर नहीं लौट पाया. जब मैं भवानीपुर थाने में शिकायत दर्ज कराने गया तो पुलिस ने यह कहते हुए शिकायत नहीं ली कि उनके हाथ बंधे हुए हैं.” हालांकि उनकी पत्नी ममुनि साहा इस इलाके में रहती रहीं लेकिन मार्च में होली के वक़्त उन्हें भी धमकी दी गई. ममुनि के मुताबिक़ उन्होंने TMC समर्थकों को 10 किलो चिकन मुफ़्त में देने से इनकार कर दिया था. जिस वजह से उन्हें धमकाया गया था. ममुनि ने कहा,
“वे तब से हमें परेशान कर रहे हैं. उन्होंने 2 मई को दुकान में तोड़फोड़ की और अब दुकान के सामने बैरिकेडिंग कर दी गई है. मैं घर नहीं लौट पा रही हूं."
ममुनि और उनके पति रबि अब कोलकाता के टालीगंज इलाक़े में रहते हैं. 'फिर धमकी दे रहे TMC समर्थक' वहीं पूर्व बर्धमान जिले के खंडघोष विधानसभा क्षेत्र की राखी रॉय भी हाई कोर्ट के बाहर मौजूद थीं. उन्हें तीन दिन पहले पुलिस की मदद से अपने घर लौटने की अनुमति दी गई थी. राखी ने आरोप लगाया कि उन्हें एक बार फिर से TMC समर्थक धमकी दे रहे हैं. रॉय का आरोप है कि TMC समर्थक कथित तौर पर उनके घर में आए और रविवार की रात उन्हें पीटा, उनके कपड़े फाड़े और घर छोड़ने देने की धमकी दी. कहा कि अगर वो ऐसा नहीं करती हैं तो ये उनके जीवन का आखिरी दिन होगा. उन्होंने ये भी दावा किया कि सोमवार की सुबह TMC समर्थक लौटे कर आए और कथित तौर पर फिर उनकी पिटाई की, यहां तक की उनके बच्चों को भी नहीं बख्शा गया. उन्होंने यौन उत्पीड़न के आरोप भी लगाए. राखी ने कहा, “उन्होंने मुझे पीटा और मुझे गलत तरीके से छुआ. उन्होंने मुझे बुरी तरह पीटा, जिससे मेरी पीठ पर निशान पड़ गया.” राखी रॉय का ये भी आरोप है कि उन्हें सोमवार 21 जून की शाम तक घर छोड़ने की धमकी दी गई है. अगर वो ऐसा नहीं करती हैं तो उनके पति को मार दिया जाएगा. कोर्ट में क्या हुआ? राज्य सरकार की अपील पर सोमवार 21 जून को कलकत्ता उच्च न्यायालय की पांच न्यायाधीशों की पीठ ने सुनवाई की. पीठ ने सवाल किया कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सामने 541 शिकायतें क्यों दर्ज की गईं जबकि राज्य मानवाधिकार आयोग में एक भी शिकायत दर्ज नहीं की गई. राज्य सरकार ने कोर्ट में कहा था कि पश्चिम बंगाल कानूनी सेवा प्राधिकरण को 3423 शिकायतों मिली थीं जो 10 जून को राज्य सरकार को मिलीं. लेकिन समय के अभाव में सरकार इन पर कोई कदम नहीं उठा पाई. अदालत ने इस बात को संज्ञान में लिया कि राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण (एसएलएसए) को शिकायतें मिली थीं. इस आधार पर कोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा तीन दिन पहले के आदेश को वापस लेने के लिए दी गई दलीलों को ठुकराते हुए पुराने आदेश को बरकरार रखा.

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