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SIR में नाम नहीं तो कैसे बनें अग्निवीर? बंगाल के आकाश सरकार ने मिसाल पेश की

पश्चिम बंगाल में 20 साल के एक नौजवान ने अग्निवीर भर्ती परीक्षा के सारे टेस्ट पास कर लिए. लेकिन फिर भी उसकी जॉइनिंग पर संकट के बादल मंडराने लगे, क्योंकि बंगाल पुलिस ने उसको पुलिस क्लियरेंस सर्टिफिकेट देने से इनकार कर दिया. वजह जान आप भी परेशान हो जाएंगे.

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कलकत्ता हाई कोर्ट ने आकाश सरकार को नौकरी दिलाने में मदद की. (इंडिया टुडे)

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  • पश्चिम बंगाल के कूच बिहार जिले के आकाश सरकार ने अग्निवीर भर्ती परीक्षा के सभी टेस्ट पास करने के बाद पुलिस क्लियरेंस सर्टिफिकेट (PCC) के लिए आवेदन किया लेकिन पुलिस ने वोटर लिस्ट से नाम हटने के कारण सर्टिफिकेट देने से इनकार कर दिया।
  • पुलिस के PCC न देने का कारण यह था कि पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान आकाश और उनके पिता का नाम वोटर लिस्ट से हटा दिया गया था, जबकि उनका क्रिमिनल बैकग्राउंड नहीं था।
  • कलकत्ता हाई कोर्ट की मांग पर ट्रिब्यूनल ने 25 जून को आकाश और उनके पिता के नाम वोटर लिस्ट में दोबारा शामिल किए, जिसके बाद पुलिस ने PCC जारी किया और आकाश ने अग्निवीर के रूप में सेना में शामिल होकर नौकरी शुरू की।

पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद भी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) से फैला रायता सिमटता नहीं नजर आ रहा. कूच बिहार जिले के आकाश सरकार ने अग्निवीर भर्ती परीक्षा के सारे टेस्ट क्लियर कर लिए. लेकिन बात पुलिस क्लियरेंस सर्टिफिकेट (PCC) को लेकर अटक गई. पुलिस सर्टिफिकेट देने को तैयार नहीं थी, क्योंकि SIR में उसका नाम वोटर लिस्ट से कट गया था.

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पुलिस ने PCC देने से इनकार कर दिया

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, 20 साल के आकाश ने साल 2025 में अग्निवीर की भर्ती के लिए होने वाली लिखित परीक्षा, फिजिकल टेस्ट और मेडिकल टेस्ट पास कर लिया. इसके बाद नवंबर 2025 में पुलिस क्लियरेंस सर्टिफिकेट (PCC) भी बनवा लिया. लेकिन अगले छह महीने में उसकी जॉइनिंग नहीं हुई. PCC की मियाद छह महीने ही होती है.

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अब आकाश ने जॉइनिंग के लिए जून 2026 में फिर से PCC के लिए आवेदन किया. लेकिन इस बार पुलिस ने सर्टिफिकेट देने से इनकार कर दिया. कारण बताया कि बंगाल में SIR के दौरान आकाश और उनके पिता का नाम वोटर लिस्ट से हटा दिया गया था.

कलकत्ता हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया

अब PCC के बिना जॉइनिंग संभव नहीं थी. नौकरी पर खतरा देख आकाश ने कलकत्ता हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. उन्होंने कोर्ट को बताया कि वे और उनके पिता दोनों ने वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने को ट्रिब्यूनल में चुनौती दी है. जहां उनकी अपील पेंडिंग है. आकाश ने तर्क दिया कि उनका किसी भी तरह का क्रिमिनल बैकग्राउंड नहीं है, फिर भी पुलिस इसलिए क्लियरेंस सर्टिफिकेट नहीं दे रही क्योंकि उनका नाम वोटर लिस्ट से हटा दिया गया है. 

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एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स बनाम इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया और मोस्तारी बानू बनाम इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया केस में सुप्रीम कोर्ट का जजमेंट है कि SIR के दौरान वोटर लिस्ट से नाम हटाना नागरिकता तय करने का पैमाना नहीं है.

आकाश सरकार ने हाई कोर्ट में इन दोनों फैसलों का रेफरेंस देते हुए कहा कि क्लियरेंस सर्टिफिकेट रोकने का पुलिस का फैसला ठीक नहीं है. दूसरी तरफ सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने हाई कोर्ट को बताया कि SIR की अपील पर फैसला होने तक पुलिस PCC नहीं जारी कर सकती. हालांकि राज्य सरकार ने ये भी बताया कि अपील का निपटारा होते ही कानून के मुताबिक सर्टिफिकेट जारी कर दिया जाएगा.

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ट्रिब्यूनल की सुनवाई के बाद मिला सर्टिफिकेट

राज्य सरकार की दलील सुनने के बाद जस्टिस विवास पट्टनायक ने 17 जून को अपील की सुनवाई करने वाली ट्रिब्यूनल से जल्दी से जल्दी आकाश और उनके पिता की अपील पर सुनवाई करने की रिक्वेस्ट की. हाई कोर्ट के रिक्वेस्ट पर, ट्रिब्यूनल ने आकाश की अपील पर सुनवाई की. 25 जून को आकाश और उनके पिता दोनों के नाम वोटर लिस्ट में दोबारा से शामिल कर लिया गया. इसके बाद पुलिस ने PCC जारी कर दी. और आकाश की सरकारी नौकरी के रास्ते का कांटा निकला. अब वे अग्निवीर के तौर पर सेना की नौकरी में शामिल हो गए हैं. 

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