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अब कई तरह की सरकारी नौकरियों के लिए एक परीक्षा, एक नोडल एजेंसी

कॉमन एलिजिबिटी टेस्ट और नेशनल रिक्रूटमेंट एजेंसी क्या है?

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केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर (दाएं) ने पीसी करके बताया कि कॉमन एलिजिबिलिटी टेस्ट कराने की ज़िम्मा नेशनल रिक्रूटमेंट एजेंसी पर होगा. (फोटो- Social Media)
अलग-अलग सरकारी नौकरी के लिए अलग-अलग परीक्षा देने का प्रावधान अब खत्म होने वाला है. अब कुछ सेवाओं के लिए होने वाली परीक्षाओं को मिलाकर एक कॉमन टेस्ट होगा- कॉमन एलिजिबिलटी टेस्ट (Common Eligibility Test) यानी कि सीईटी. सीईटी की परीक्षा कराने का ज़िम्मा भी एक ही एजेंसी का होगा- नेशनल रिक्रूटमेंट एजेंसी (National Recruitment Agency) यानी कि एनआरए. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट मीटिंग में ये फैसला लिया गया है. केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर और जितेंद्र सिंह ने 19 अगस्त को प्रेस कॉन्फ्रेस करते हुए ये जानकारियां दीं. ये सब क्यों किया जा रहा है केंद्र सरकार का तर्क है कि अभी अभ्यर्थियों को अलग-अलग सेवाओं के लिए अलग-अलग फॉर्म भरने पड़ते हैं. अलग-अलग परीक्षाएं, अलग-अलग फीस सबमिशन. फिर अगर चार-पांच परीक्षाओं के भी फॉर्म भरे हैं, तो सबके लिए अलग तैयारी. चार-पांच बार अलग-अलग जगहों पर जाकर परीक्षा देना. इसके अलावा इतनी परीक्षाएं कराने में एजेंसियों को, व्यवस्थापकों को भी बार-बार व्यवस्था करनी पड़ती है. इन्हीं चकल्लस को कम करने के मकसद से कॉमन एलिजिबिलिटी टेस्ट शुरू किया जा रहा है. सीईटी कराने का ज़िम्मा होगा- एनआरए पर. ये एक नोडल एजेंसी की तरह काम करेगी, जो सरकारी सेवाओं की ग्रुप-बी और ग्रुप-सी (नॉन टेक्निकल) पोस्ट के लिए भर्ती परीक्षा कराएगी. अब हर सर्विस के लिए सीईटी ही देना होगा? देश में केंद्र के अंतर्गत अलग-अलग सरकारी सेवाओं के लिए 20 रिक्रूटमेंट एजेंसी हैं. अभी इन सबको सीईटी के दायरे में नहीं लाया गया है. अभी सिर्फ तीन एजेंसियों को इसके दायरे में लाया जा रहा है- स्टाफ सेलेक्शन कमीशन यानी SSC, रेलवे रिक्रूटमेंट बोर्ड यानी RRB और इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग पर्सनल सेलेक्शन यानी कि IBPS. धीरे-धीरे बाकी परीक्षाओं को भी सीईटी के दायरे में लाया जाएगा. इसके अलावा परीक्षा देने जाने में आसानी हो, इसके लिए हर जिले में कम से कम एक एग्ज़ाम सेंटर रखने की योजना है. सीईटी देकर चयन पक्का हो जाएगा? नहीं. ये स्पष्ट तौर पर लिखा गया है कि सीईटी ‘फर्स्ट लेवल एग्ज़ाम’ होगा. इससे आपको एक सीईटी स्कोर मिलेगा. इस स्कोर के आधार पर आगे दूसरे या तीसरे लेवल की परीक्षाएं भी क्वालिफाई करनी होंगी. ये परीक्षाएं एनआरए नहीं, बल्कि रिक्रूटमेंट एजेंसी ही कराएगी. उदाहरण के लिए- अगर मैं एसएससी की तैयारी कर रहा हूं, तो सीईटी दूंगा. ये परीक्षा एनआरए कराएगी. इससे कैंडिडेट शॉर्टलिस्ट हो जाएंगे. सीईटी स्कोर मिलेगा. स्कोर के आधार पर फिर मेरी दूसरे, तीसरे लेवल की परीक्षा एसएससी ही लेगा. इसके अलावा परीक्षा अलग-अलग 12 भाषाओं (संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल) में होगी, जिससे कि सबको बराबर मौके मिल सकें. अटेंप्ट करने की कोई तय सीमा नहीं होगी. अधिकतम उम्र तक कितनी भी बार सीईटी दे सकते हैं. हां, अधिकतम उम्र की सीमा में एससी/एसटी/ओबीसी वर्ग को छूट ज़रूर मिलेगी. इसके अलावा आपका सीईटी स्कोर रिज़ल्ट आने की तारीख़ से तीन साल तक के लिए वैलिड रहेगा. अगर एक से ज़्यादा बार अटेंप्ट किया है, तो आपका बेस्ट स्कोर ही आपका करेंट स्कोर होगा.
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