श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पहले चीफ एक्जिक्यूटिव ऑफिसर (CEO) के नाम का ऐलान हो गया है. रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को यह जिम्मेदारी दी गई है. एयर मार्शल मिश्रा ऑपरेशन सिंदूर के दौरान वेस्टर्न कमांड की कमान संभाल रहे थे. वहीं कारगिल युद्ध में वे स्क्वाड्रन लीडर के तौर पर उस टीम का हिस्सा थे, जिसने मिराज 2000 एयरक्राफ्ट से बॉम्बिंग को संभव बनाया था.
वायुसेना के रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा राम मंदिर ट्रस्ट के पहले CEO बने
रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का पहला चीफ एक्जिक्यूटिव ऑफिसर (CEO) बनाया गया है. 2 सिंतबर को राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक में ये फैसला लिया गया. मंदिर के CEO पद के लिए 5 हजार से ज्यादा आवेदन आए थे, जिसमें से जितेंद्र मिश्रा के नाम पर मुहर लगी.

कौन हैं एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा?
रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा ने 39 साल से ज्यादा समय तक भारतीय वायु सेना में अपनी सेवाएं दी हैं. 31 दिसंबर, 2024 को एयर फोर्स में उनका कार्यकाल खत्म हुआ. उन्होंने वेस्टर्न एयर कमांड के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ के तौर पर काम किया. इससे पहले उन्होंने इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ (ऑपरेशन्स) के डिप्टी चीफ के तौर पर काम किया था. वे इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ में डॉक्ट्रिन, ऑर्गनाइजेशन और ट्रेनिंग के डिप्टी चीफ भी रह चुके हैं.
एयर मार्शल मिश्रा पुणे के नेशनल डिफेंस एकेडमी, एयर फोर्स एकेडमी, डुंडीगुल, एयर फोर्स टेस्ट पायलट्स स्कूल, एयर कमांड एंड स्टाफ कॉलेज, यूएस और ब्रिटेन स्थित रॉयल कॉलेज ऑफ डिफेंस स्टडीज के पूर्व छात्र रहे हैं.
साल 1986 में मिला एयर फोर्स में कमीशन
मिश्रा को 6 दिसंबर 1986 को एयर फोर्स एकेडमी से भारतीय वायुसेना की फाइटर स्ट्रीम में कमीशन मिला था. उनकी नियुक्ति फ्लाइट लेफ्टिनेंट के तौर पर हुई थी. इसके बाद वे लगातार आगे बढ़ते हुए विंग कमांडर, ग्रुप कैप्टन, एयर कमोडोर, एयर वाइस मार्शल और आखिरकार एयर मार्शल के पद तक पहुंचे. 39 साल से ज्यादा के करियर में उनको 3,000 घंटे से ज्यााद का फ्लाइट एक्सपीरियंस है. उन्होंने 18 से ज्यादा तरह के फाइटर, ट्रासंपोर्ट एयरक्राफ्ट और हेलीकॉप्टर उड़ाए हैं.
कारगिल युद्ध में अहम भूमिका
एयर मार्शल मिश्रा स्क्वाड्रन लीडर के तौर पर उस टीम का हिस्सा थे, जिसने कारगिल युद्ध की शुरुआत में मिराज 2000 एयरक्राफ्ट पर लेजर-गाइडेड बमों को ऑपरेशनल बनाया था. इन बमों का इस्तेमाल ऑपरेशन सफेद सागर के दौरान टाइगर हिल, तोलोलिंग और मुंथो ढालो पर हुए हमलों में किया गया था. एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को उनकी काबिलियत और नेतृत्व क्षमता के लिए कई बार सम्मानित किया गया है. भारत के राष्ट्रपति से उनको अति विशिष्ट सेवा पदक और विशिष्ट सेवा पदक मिल चुका है.
5500 से ज्यादा आवेदन आए
राम मंदिर के पहले CEO पद के लिए 5585 आवेदन आए. स्क्रीनिंग कमेटी ने इनमें से 111 उम्मीदवारों को ऑनलाइन इंटरव्यू के लिए शॉर्टलिस्ट किया. इसके बाद सोलह उम्मीदवारों को अयोध्या में फिजिकल इंटरव्यू के लिए बुलाया गया. स्क्रीनिंग कमेटी में रिटायर्ड जस्टिस प्रमोद कोहली, रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल वीके चतुर्वेदी और साइंटिस्ट-बिजनेसमैन सुरेश हावरे शामिल थे. इसकी अध्यक्षता जस्टिस कोहली कर रहे थे. ये तीनों 1 सितंबर की देर रात अयोध्या पहुंचे. इन्होंने ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास को तीन नामों वाला एक सीलबंद लेटर सौंपा.
2 सितंबर को CEO की नाम पर मुहर लगाने के लिए राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक हुई. बैठक में ट्रस्ट के अध्यक्ष नृत्य गोपाल दास, स्वामी कमलनयन दास, अंतरिम महासचिव डॉ. कृष्म मोहन, ट्रस्टी महंत दीनेंद्र दास और कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि समेत दूसरे लोग मौजूद रहे.
इस बैठक में सीईओ के तौर पर रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा के नाम पर मुहर लगी. ट्रस्ट ने तीन नए सदस्यों की नियुक्ति की भी घोषणा की है. ये सदस्य हैं- अयोध्या के सीनियर वकील मदन मोहन पांडे, दिल्ली के महेश भागचंदका और अयोध्या की निर्मला यादव. अब तक ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे गोविंददेव गिरी को महामंत्री की जिम्मेदारी मिली है. उनकी जगह पर महेश भागचंदका को कोषाध्यक्ष बनाया गया है.
वीडियो: राम मंदिर चंदा चोरी पर SIT की रिपोर्ट में बड़े खुलासे, ‘जेब-मोज़े में नोट छिपाते थे’













