The Lallantop

विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ाने की तरकीब काम कर गई, इस स्कीम में NRIs ने झोंके 9.5 लाख करोड़

विदेशों में रह रहे भारतीयों की तरफ से खूब डॉलर आने से भारत का विदेशी मुद्रा भंडार रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है

Advertisement
post-main-image
ईरान युद्ध शुरू होने के बाद भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में भारी गिरावट आई थी (फोटो क्रेडिट: India Today)

Quick AI HighlightsClick here to view more

  • भारतीय रिजर्व बैंक ने एफसीएनआर(बी) योजना के तहत NRIs से 100 अरब डॉलर के विदेशी मुद्रा निवेश प्राप्त करने के बाद इस निवेश योजना को नियत समय से एक महीने पहले समाप्त कर दिया।
  • भारत के घटते विदेशी मुद्रा भंडार और मध्य पूर्व में युद्ध तथा तेल की कीमतों में अस्थिरता के कारण RBI ने जून में NRIs के लिए FCNR(B) योजना शुरू की ताकि विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ाया जा सके।
  • FCNR(B) योजना के तहत विदेशी मुद्रा निवेश में वृद्धि से भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में सुधार हुआ है, और RBI ने इस योजना को समय से पूर्व बंद करने का निर्णय लिया है।

कुछ महीने पहले भारत के घटते विदेशी मुद्रा भंडार को लेकर सवाल उठ रहे थे. इसे देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने NRIs के लिए एक स्कीम लॉन्च की. इसकी स्कीम का नाम FCNR(B) था. इसका मकसद विदेशी मुद्रा निवेश लाना है. 

Advertisement

इंडिया टुडे में छपी एक रिपोर्ट बताती है कि RBI की यह स्कीम NRIs ने खूब पसंद आई है. इस स्कीम के जरिये 100 अरब डॉलर (करीब 9.49 लाख करोड़ रुपये) का निवेश आया है. यह योजना इतनी सफल रही है कि सरकार ने इसे तय समय से एक महीने पहले ही खत्म करने का फैसला लिया है. NRIs यानी Non-Resident Indian. वे लोग जो भारतीय हैं और विदेश में नौकरी या बिजनेस वगैरा करते हैं. इनकी नागरिकता भारत की ही होती है.

FCNR (B) योजना क्या है?

FCNR(B) का पूरा नाम फॉरेन करेंसी नॉन रेजीडेंट (बैंक) है. यह एक ऐसी योजना है जो NRI को अपनी विदेशी कमाई को भारत में अमेरिकी डॉलर जैसी विदेशी मुद्राओं में जमा करने की अनुमति देती है. इससे उन्हें अपने डॉलर भारतीय रुपये में बदलने की जरूरत नहीं पड़ती. एफएनसीआर (बी) योजना के तहत मूलधन और ब्याज दोनों का भुगतान विदेशी मुद्रा में किया जाता है. इससे जो NRI इसमें पैसा जमा करता है उसे रुपये में उतार-चढ़ाव के कारण होने वाला नुकसान नहीं होता है.

Advertisement

ये भी पढ़ें: प्लास्टिक नोट आपके हाथ में कब आएंगे, RBI ने बता दिया

विदेशी मुद्रा भंडार रिकॉर्ड ऊंचाई पर

विदेशों में रह रहे भारतीयों की तरफ से खूब डॉलर आने से भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 729.3 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है. यह ऐसे समय में हुआ है जब मिडिल ईस्ट में युद्ध और कच्चे तेल की कीमतों में काफी उठापटक देखने को मिल रही है. इस वजह से विदेशों से आयात के लिए भारत को ज्यादा डॉलर खर्च करने पड़ रहे हैं.

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में फाइनेंशियल एक्सप्रेस की एक खबर का हवाला देते हुए बताया गया कि RBI ने जून में फॉरेन करेंसी नॉन-रेजिडेंट (बैंक) या एफसीएनआर(बी) योजना शुरू की थी. 31 अगस्त तक इस स्कीम के जरिये 100 अरब डॉलर का निवेश आ चुका था. 

Advertisement

RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​ने इस योजना से लगभग 80 अरब डॉलर निवेश की उम्मीद जताई थी. RBI ने एफसीएनआर(बी) विंडो को तय तारीख 30 सितंबर से एक महीने पहले ही बंद कर दिया.

ब्रिटेन स्थित फाइनेंशियल टाइम्स ने अगस्त की शुरुआत में बताया था कि 28 फरवरी को ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से देश के विदेशी मुद्रा भंडार में 46 अरब डॉलर की कमी आई है. 24 जुलाई तक कुल विदेशी मुद्रा भंडार 682 अरब डॉलर रह गया था. अखबार ने यह भी बताया था कि अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 6% कमजोर होकर, भारतीय रुपया एशिया की सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाली मुद्राओं में से एक बन गया है.

वीडियो: यूएस सैनिक पहुंचे थाईलैंड, सेक्स वर्कर्स पर हुआ ये एक्शन

Advertisement