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कौन है बुलंदशहर में दरोगा सुबोध के कत्ल वाली घटना का मुख्य आरोपी योगेश राज

इस घटना के कई आरोपी बजरंगदल, वीएचपी आदि संगठनों से जुड़े बताए जा रहे हैं...

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बाईं तरफ योगेश राज की फोटो है. दाहिनी तरफ स्याना के थाना प्रभारी सुबोध कुमार सिंह की कफ़न में लिपटी लाश रखी है. 3 दिसंबर, 2018 को भीड़ ने सुबोध को मार डाला. इस मामले का मुख्य आरोपी है योगेश. वो बजरंग दल का जिला संयोजक बताया जा रहा है. इस केस का एक और आरोपी शिखर अग्रवाल बीजेपी की युवा विंग का लीडर है.
बुलंदशहर में 3 दिसंबर को भीड़ ने एक दरोगा को मार डाला. बुलंदशहर घटना में की FIR में सबसे ऊपर नाम है योगेश राज का.
योगेश बजरंग दल कार्यकर्ता है. खबरों के मुताबिक, वो जिला संयोजक है बुलंदशहर का. उसके ऊपर भीड़ को भड़काने का इल्जाम है.
न्यूज़ चैनल आज तक का स्क्रीनशॉट, जिसमें बाईं तरफ योगेश और दाईं तरफ इंस्पेक्टर सुबोध हैं
न्यूज़ चैनल आज तक का स्क्रीनशॉट, जिसमें बाईं तरफ योगेश और दाईं तरफ इंस्पेक्टर सुबोध हैं

इस घटना से जुड़े कुछ वीडियोज़ में योगेश SHO सुबोध कुमार सिंह के साथ बहस करता दिखता है. वो भीड़ में सबसे आगे है. पुलिस FIR में नौवें नंबर पर शिखर अग्रवाल का नाम है. शिखर बीजेपी युवा विंग का कार्यकर्ता है. स्याना का नगर अध्यक्ष रह चुका है. पुलिस का कहना है कि दोषियों की पहचान के लिए उनके पास पर्याप्त वीडियो फुटेज है.
ये है मुख्य आरोपी योगेश राज के फेसबुक अकाउंट का होमपेज. उसने अपने परिचय में खुद को बजरंग दल का जिला संयोजक बताया है. उसकी वॉल पर ज्यादातर पोस्ट भी इसी तरह के हैं. बजरंग दल के कार्यक्रमों से जुड़ी तस्वीरें और वीडियोज़ भी डाले हुए हैं उसने (फोटो: फेसबुक)
ये है मुख्य आरोपी योगेश राज के फेसबुक अकाउंट का होमपेज. उसने अपने परिचय में खुद को बजरंग दल का जिला संयोजक बताया है. उसकी वॉल पर ज्यादातर पोस्ट भी इसी तरह के हैं. बजरंग दल के कार्यक्रमों से जुड़ी तस्वीरें और वीडियोज़ भी डाले हुए हैं उसने (फोटो: फेसबुक)

बीजेपी नेता ने माना, शिखर अग्रवाल उनका कार्यकर्ता हमने शिखर अग्रवाल के बारे में बुलंदशहर में बीजेपी के जिला अध्यक्ष हिमांशु मित्तल से पूछा. हिमांशु ने माना कि शिखर उनकी पार्टी का मेंबर है. मगर उन्होंने कहा कि शिखर का नाम पुलिस FIR में है, इस बात की फिलहाल उन्हें कोई जानकारी नहीं है. हिमांशु का ये भी कहना है कि इस मामले के मुख्य आरोपी योगेश राज को बजरंग दल का कार्यकर्ता बताए जाने वाली खबरें भी गलत हैं. इस केस से जुड़ा एक और आरोपी- उपेंद्र राघव भी विश्व हिंदू परिषद का बताया जा रहा है. मगर हिमांशु मित्तल इस बात से भी इनकार करते हैं. ये पुलिस द्वारा दर्ज की गई FIR की कॉपी है. इसमें जहां आरोपियों के नाम दर्ज हैं, उसमें सबसे ऊपर है योगेश. उपेंद्र राघव का नाम लिस्ट में 5वें नंबर पर है. 9वें नंबर का आरोपी है शिखर अग्रवाल, जो कि बीजेपी युवा विंग का लीडर है. 
ये पुलिस द्वारा दर्ज की गई FIR की कॉपी है. इसमें जहां आरोपियों के नाम दर्ज हैं, उसमें सबसे ऊपर है योगेश. उपेंद्र राघव का नाम लिस्ट में 5वें नंबर पर है. 9वें नंबर का आरोपी है शिखर अग्रवाल, जो कि बीजेपी युवा विंग का लीडर है.

योगेश पर क्या आरोप है? FIR में दिए गए ब्योरे के मुताबिक, योगेश अपने कुछ दोस्तों के साथ मिलकर भीड़ को भड़का रहा था. ये वही भीड़ थी, जो पुलिस चौकी को घेरने पहुंची थी. भीड़ अपने साथ ईंट-पत्थर और लाठी-डंडे ही नहीं लाई थी, बल्कि तमंचे भी साथ लाई थी. इन लोगों ने इंस्पेक्टर सुबोध की पिस्टल, उनका मोबाइल फोन भी छीन लिया. पुलिस टीम के वायरलेस सेट को भी तोड़ दिया. पुलिस अभी तक इन चीजों को बरामद नहीं कर पाई है.
ये राखी पर बजरंग दल और VHP की तरफ से निकाला गया एक पर्चा देखिए. इसपर भी योगेश राज के नाम के साथ जिला संयोजक लिखा है.
ये राखी, स्वतंत्रता दिवस और जन्माष्टमी पर बजरंग दल और VHP की तरफ से निकाला गया एक बधाई पर्चा देखिए. इसपर भी योगेश राज के नाम के साथ जिला संयोजक लिखा है.

SHO संतोष की बहन ने कहा, दादरी कांड की वजह से हुई हत्या बुलंदशहर के जिलाधिकारी ने बताया कि सिर में गोली लगने से सुबोध कुमार सिंह की मौत हुई.
उनपर तेज धारदार चीजों से भी हमला किया गया था. सुबोध की बहन का कहना है कि उनके भाई की हत्या की साजिश की गई. उनके मुताबिक, अखलाक मॉब लिंचिंग केस के साथ जुड़े होने की वजह से सुबोध को मारा गया है. सुबोध अखलाक केस के पहले इन्वेस्टिगेटिंग ऑफिसर (IO) थे. घटना के समय वो दादरी में ही पोस्टेड थे. उनका परिवार पिछले दो साल से ग्रेटर नोएडा की गौड़ सिटी में रहता है. कुछ ही वक्त पहले उनका तबादला बुलंदशहर हुआ था. अखलाक वाले केस में उनका नाम गवाहों की लिस्ट में भी मौजूद है.
ADG ने किसी संगठन का नाम लेने से इनकार किया ADG आनंद कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए कहा,
अभी इस मामले में किसी संगठन का नाम नहीं है. केवल लोगों के नाम हैं. वीडियो के आधार पर आरोपियों की गिरफ्तारी की जा रही है. SIT की जांच से ज्यादा चीजें पता चलेंगी कि कैसे क्या हुआ. पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट, वीडियो फुटेज से भी कई चीजें साफ होंगी. सुबोध सिंह को कोई पत्थर लगा, वो गिर गए. कुछ पुलिसवालों ने उन्हें गाड़ी से अस्पताल ले जाने की कोशिश की. भीड़ ने वहां पथराव किया. फिर गाड़ी तोड़ दिए जाने के बाद पुलिसवालों ने दूसरी गाड़ी अरेंज की और उससे अस्पताल ले गए. बाकी जांच में पता चलेगा.



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