इसका ठीक-ठीक जवाब अभी किसी के पास नहीं है. हमें बस घटनाक्रम मालूम है. कि सारा मामला खेत में कटी हुई गाय मिलने से शुरू हुआ और इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह की मॉब लिंचिंग पर खत्म हुआ.
इस कटी गाय पर UP पुलिस के IG क्राइम एस के भगत ने एक बड़ी जानकारी
दी है. उन्होंने इंडिया टुडे को बताया कि गाय के ये कटे हिस्से ताज़े नहीं थे. तकरीबन दो दिन पुराने थे. उनके मुताबिक, महाव गांव के खेत में जो कटी हुई गाय मिली, वो लगभग 48 घंटे पहले काटी गई थी. उन्होंने कहा-
शुरुआती जांच के मुताबिक, ग्राउंड ज़ीरो (यानी महाव गांव का वो खेत) से बरामद गाय के अवशेष कम से कम 48 घंटे पुराने थे. जांच अभी जारी है. जांच पूरी हो जाने के बाद सारी चीजें साफ हो जाएंगी.

ये गोकशी वाली उस FIR की कॉपी है, जो योगेश ने लिखवाई थी. ये वाली FIR दर्ज हुई दोपहर 12.43 बजे. इसके करीब 45 मिनट बाद, दिन के डेढ़ बजे SHO सुबोध कुमार सिंह की लिंचिंग हुई.
बजरंग दल वाले योगेश राज ने FIR में क्या लिखवाया था? खुद को इस कथित गोकशी का चश्मदीद बताने वाले बजरंग दल के नेता योगेश राज
ने अलग ही कहानी सुनाई थी. उसने गोकशी वाली FIR में लिखवाया था-
आज दिनांक 03-12-2018 को समय करीब प्रात: नौ बजे सुबह हम लोग योगेश राज, शिखर कुमार, सौरभ आदि लोग घूमने के लिए ग्राम महाव के जंगलों में आए थे. तभी हमने देखा सुदेफ चौधरी, इल्यास, शराफत, अनस, शाजिद, परवेज, सरफुद्दीन (निवासी नया बांस) आदि लोग थाना स्याना निवासी गायों को काट रहे थे. हमें देखकर, हमारे शोर मचाने पर उपरोक्त लोग मौके से भाग गए. सूचना पर थाना स्याना की पुलिस व उपजिलाधिकारी स्याना आ गए हैं. उपरोक्त लोगों ने गायों को बुरी तरह से काटा है. जिससे हमारी हिंदू धर्म की भावनाएं आहत हुई हैं.

योगेश ने कहा था कि जो सात लोग गाय काट रहे थे, वो सबको जानता था. उसने सातों का नाम बताया पुलिस को. सातों मुस्लिम थे. जिस गांव का योगेश है, उसी गांव के हैं सातों. इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि जिन लोगों का नाम लिखवाया गया है, उनमें से कुछ तो NCR में रहकर नौकरी करते हैं.
यानी योगेश ने गोकशी वाली FIR में झूठी तहरीर दी थी? पुलिस की जांच और योगेश का बयान, एकदम उलट हैं.
इससे तो यही लगता है कि योगेश ने उस दिन FIR में जो लिखवाया, सब झूठ था. इस FIR के लिखे जाने के तकरीबन 40-45 मिनट बाद ही इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह भीड़ के हाथों मार दिए गए थे. योगेश ने गोकशी वाली इस FIR में सात लोगों का नाम लिखवाया था. इनमें एक 10 साल का बच्चा भी है. पुलिस ने नाबालिग होने की वजह से उसका नाम इस FIR से हटा दिया है.
क्या इस साज़िश का लिंक घटना वाले दिन खत्म हो रहे मुस्लिमों के इज्तमा कार्यक्रम से था? या 6 दिसंबर को बाबरी मस्जिद को गिराए जाने की बरसी के दिन को सोचकर कोई प्लानिंग की गई थी? क्या इसके पीछे दंगा भड़काने की कोई चाल थी?
उत्तर प्रदेश पुलिस के प्रमुख ओ पी सिंह कह चुके हैं कि शायद ये पूरी घटना किसी साज़िश का नतीजा है. इस केस की जांच कर रही SIT भी सारे मुमकिन ऐंगल्स की तफ़्तीश कर रही है. सारी चीजों को साथ मिलाकर देखने पर साज़िश वाली बात मुमकिन तो लगती है. गांव के कई लोग भी इसकी शंका जता चुके हैं. जिस राजकुमार नाम का शख्स के खेत में गाय के कटे हिस्से मिले, उस खेत के बगल में रहने वाले प्रेम जीत सिंह ने मीडिया से बात की है. कहा है कि 2 दिसंबर की रात तक खेत में ऐसा कुछ नहीं था. न ही उन्होंने किसी को गाय काटते हुए देखा.
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