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डॉक्टर ने कैंसर के नाम पर डराया, फिर 115 औरतों के प्राइवेट पार्ट्स को गलत तरह से छुआ

सबसे कम उम्र की पीड़िता 15 साल की, डॉक्टर मनीष शाह को उम्रकैद

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मनीष शाह (फोटो- ट्विटर)

ब्रिटेन के लंदन में भारतीय मूल के एक डॉक्टर को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है. डॉक्टर पर यौन शोषण के 115 मामले दर्ज थे. ये मामले उसकी महिला मरीजों ने दर्ज कराए थे. डॉक्टर का नाम है मनीष शाह. मनीष लंदन के रॉमफोर्ड में मॉने रोड मेडिकल प्रैक्टिस में जनरल प्रैक्टिशनर हैं.

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हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक मनीष शाह अपने मरीजों को कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी होने आशंका जता कर डराते थे. इसके बाद वो एंजेलिना जोली और रियलिटी टीवी स्टार जेड गुडी जैसी मशहूर स्टार्स के उदाहरण देकर मरीजों के प्राइवेट पार्ट्स की जांच करते थे.

साल 2018 में कैंसर का खतरा होने के कारण एंजेलिना जोली की डबल मास्टेक्टॉमी सर्जरी हुई थी. मनीष शाह अपने मरीजों को जोली का उदाहरण देकर उनके ब्रेस्ट की जांच करते थे. इसके अलावा वो बिग ब्रदर शो की एक्ट्रेस जेड गुडी का भी उदाहरण देते थे. जेड गुडी की साल 2009 में सर्वाइकल कैंसर के कारण मौत हो गई थी.

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कमजोर महिलाओं को निशाना बनाते थे

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक इस मामले में अभियोजक रील कार्मी जोन्स ने अदालत को बताया कि शाह कमजोर महिलाओं का चयन करते थे. और उनका विश्वास हासिल कर उनकी प्रशंसा करते थे. दो दर्जन से भी ज्यादा पीड़िताओं में सबसे कम उम्र की पीड़िता 15 साल की है. इनमें से कई पीड़ित ऐसे थे जिन्हें अपना घर तक बदलना पड़ा, जिससे वो डॉक्टर मनीश शाह को दोबारा न देख पाएं. कोर्ट ने ये भी बताया कि शाह महिलाओं के मेडिकल रिकॉर्ड्स के साथ भी छेड़छाड़ करते थे.

महिलाओं के रिश्ते तक टूट गए

सोमवार, 9 जनवरी को ओल्ड बेली कोर्ट में जज रूक ने मनीष शाह को आजीवन कारावास की सजा सुनाई. सजा सुनाते हुए जज ने कहा कि मनीष शाह अपने मरीजों का विश्वास हासिल कर उनके प्राइवेट पार्ट्स की जांच करते थे. जज ने ये भी कहा कि मनीष शाह मरीजों को धोखा देने में मास्टर हैं. वो मरीजों की जांच करते वक्त उन्हें गलत तरीके से छूते थे.

कोर्ट ने सजा सुनाते हुए ये भी बताया कि यौन शोषण की वजह से कई महिलाओं के रिश्ते तक टूट गए.

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एक पीड़िता का बयान पढ़ते हुए कोर्ट ने कहा,

“मिस्टर शाह आपने जो किया, उस चीज ने मुझे 12 साल तक सताया. जिससे मेरे जीवन का बहुत महत्वपूर्ण समय बर्बाद हुआ.”

रिपोर्ट के मुताबिक शाह ने साल 1993 में लंदन यूनिवर्सिटी से MBBS किया था. लेकिन, शाह के इस सर्टिफिकेट को साल 2020 में मेडिकल प्रैक्टिश्नर ट्रिब्यूनल सर्विस ने रद्द कर दिया था. ट्रिब्यूनल ने ये पाया था कि उन्होंने बिना किसी मेडिकल आवश्यकता के कई मरीजों के प्राइवेट पार्ट्स की जांच की थी. इस मामले में मनीष शाह कम से कम दिसंबर 2033 तक जेल में रहेंगे. 

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