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'BJP 3 मुख्यमंत्रियों को हटाना चाहती है', अखिलेश ने CM योगी के अलावा और किसका नाम लिया?

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव पर जमीन खरीद के आरोपों के बीच अखिलेश यादव ने इसे बीजेपी की अंदरूनी साजिश बताया. उन्होंने दावा किया कि बीजेपी मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री बदलने की तैयारी कर रही है.

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अखिलेश यादव (बाएं) ने मोहन यादव (दाएं) को लेकर बीजेपी पर निशाना साधा है. (फोटो- India today)

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  • सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने दावा किया है कि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव पर जमीन खरीद को लेकर लगे आरोप भाजपा की साजिश का हिस्सा हैं और इसका मकसद मुख्यमंत्री को बदनाम करना है।
  • मध्य प्रदेश में मोहन यादव और उनके परिवार पर उज्जैन के आसपास 168 एकड़ जमीन खरीदने के आरोप हैं, जिनके बाद वहां नए सरकारी प्रोजेक्ट बने, जिससे जमीन की कीमतें बढ़ीं और राजनीतिक विवाद शुरू हुआ।
  • भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने स्पष्ट किया कि मोहन यादव और परिवार ने 2023 के बाद कोई जमीन नहीं खरीदी है, और आरोपों में जिन संबंधित व्यक्तियों का zikr है, उनका मुख्यमंत्री से कोई संबंध नहीं है।

सपा मुखिया अखिलेश यादव क्या मोहन यादव के समर्थन में उतर आए हैं? जमीन खरीद को लेकर बीजेपी सरकार के सीएम मोहन यादव और उनके परिवार पर गंभीर आरोप लगे हैं. अखिलेश यादव ने आरोप लगाया है कि बीजेपी अपने ही मुख्यमंत्री को बदनाम करने के लिए ऐसे आरोप लगा रही है. 

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सपा प्रमुख का दावा है कि बीजेपी तीन जगहों पर मुख्यमंत्री बदलना चाहती है. मोहन यादव पर ऐसे आरोप लगना, उसी सिलसिले का पहला कदम है. अखिलेश का इशारा यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर था. अखिलेश ने कहा कि ये सब यूपी के मुख्यमंत्री को हटाने की साजिश चल रही है. 

क्या है मामला?

मोहन यादव सवालों के घेरे में हैं. क्योंकि दावा किया जा रहा है कि जब से वो सीएम बने हैं, उनके परिवार ने उज्जैन और उसके आसपास ऐसी जगहों पर तकरीबन 168 एकड़ की जमीनें खरीदीं, जहां से बाद में सड़कें, हाईवे और दूसरे सरकारी प्रोजेक्ट्स निकल आए. इससे जमीनों का दाम कुछ ही समय में आसमान छूने लगा. ये खरीदारी मध्य प्रदेश की सियासत में बहस का मुद्दा बन गई है. अखिलेश यादव से इसी मुद्दे पर सवाल किया गया था. पहले तो लगा कि अखिलेश बीजेपी के सीएम का समर्थन करने लगे हैं, लेकिन बात आगे बढ़ी तो लगा कि उनका निशाना कहीं और है. हमेशा की तरह उन्होंने बात को उत्तर प्रदेश और यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ की तरफ घुमा दिया.

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पहले अखिलेश ने कहा कि मोहन यादव पर जो भी आरोप लगे हैं, वो उन्हें बदनाम करने की बीजेपी की साजिश है. आगे उन्होंने कहा, 

अगर मोहन यादव पर ऐसा आरोप है तो उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री (योगी आदित्यनाथ) ने तो 300-600 एकड़ जमीन ली है. आप लोग समझते नहीं बात को. ये कोई नई बात थोड़ी है कि उन्होंने कोई जमीन ली है. वो रियल एस्टेट का काम करते थे. आप ये क्यों भूल जाते हैं कि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव पहले से जमीनों का काम करते थे. क्या ये बीजेपी नहीं जानती कि वो जमीनों के काम करते थे?

ये भी पढ़ेंः जहां CM मोहन यादव के परिवार ने खरीदी 168 एकड़ जमीन, वहीं सरकार बना रही हाईवे-सड़कें

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अखिलेश के मुताबिक, ये आरोप इसलिए लगाया जा रहा है क्योंकि बीजेपी रास्ता खोज रही है कि मुख्यमंत्री कैसे बदलें? इसलिए ऐसे आरोप लगवा रही है. उन्होंने कहा कि जब जमीन की रजिस्ट्री हुई होगी, क्या तब बीजेपी के लोगों को नहीं पता था. 

अखिलेश ने दावा किया कि बीजेपी मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री हटाना चाहती है. उसे राजस्थान के मुख्यमंत्री (भजनलाल शर्मा) को हटाना है. उन्होंने कहा,

इन दो (मोहन यादव और भजनलाल शर्मा) को इसलिए हटा रहे हैं कि उन्हें उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को हटाना है. ये हटाने की साजिश चल रही है. आप बात ही नहीं समझ पा रहे हो. 

अखिलेश ने कहा कि पहले बीजेपी के लोग बदनाम करते हैं. मोहन यादव को बदनाम करने के लिए ये कर रहे हैं. बीजेपी का प्लान है कि एक तो मध्य प्रदेश का सीएम हटा दो. एक राजस्थान का हटा दो और साथ में यूपी का भी हटा दो.

मोहन यादव ने क्या कहा

इस बीच जमीन खरीद के आरोपों पर मध्य प्रदेश के सीएम मोहन यादव की भी सफाई आई है. उनके दफ्तर से कहा गया कि मुख्यमंत्री मोहन यादव ने दिसंबर 2023 में सीएम बनने के बाद कोई जमीन नहीं खरीदी है. ⁠मुख्यमंत्री मोहन यादव की पत्नी सीमा यादव ने भी अपने पति के मध्य प्रदेश के सीएम बनने के बाद कोई जमीन नहीं खरीदी है. सीएमओ ने यह भी कहा कि वो बाद में विस्तार से इस बारे में और जानकारी देगा. 

थोड़ी देर बाद बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल का बयान आया. उन्होंने कहा, "आज कांग्रेस पार्टी के द्वारा हमारे लोकप्रिय मुख्यमंत्री मोहन यादव जी पर जो आरोप लगाए गए, वे पूरी तरह गलत हैं... मैं बताना चाहता हूं कि हमारे मुख्यमंत्री के द्वारा 2023 में जो नामांकन दाखिल किया गया था, उस स्थिति में उनके पास 17 एकड़ जमीन थी, जिसमें आज तक कोई परिवर्तन नहीं हुआ है. उनकी पत्नी सीमा यादव के नाम से 12.29 एकड़ जमीन थी, इसमें भी 2026 तक कोई परिवर्तन नहीं हुआ."

खंडेलवाल ने आगे कहा, "एक सिद्धि विनायक कंपनी, जिसका आरोपों में जिक्र किया गया है, उसके पास 2023 में 68 एकड़ जमीन थी, जो जून में घटकर मात्र 65 एकड़ रह गई. इसमें भी मुख्यमंत्री के द्वारा 2017 में इसके डायरेक्टर पद से इस्तीफा दे दिया गया था. उनके पुत्र वैभव के पास भी 2023 के पूर्व 16 एकड़ जमीन थी. उनके मुख्यमंत्री बनने के बाद उसमें किसी तरह का कोई परिवर्तन नहीं आया. और यह सारी जमीन मास्टर प्लान लागू होने के पहले की थी. उनकी पुत्रवधू शालिनी यादव के द्वारा जरूर 10 एकड़ कृषि भूमि खरीदी गई थी, जो कि विकसित मास्टर प्लान एरिया के बाहर की थी."

हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि आरोपों में रिश्तेदारों का जिक्र किया गया है जो कि पूरी तरह से गलत है. मुख्यमंत्री और उनके परिवार का उससे कोई लेना-देना नहीं है. उनके रिश्तेदारों का अपना स्वतंत्र अस्तित्व है.

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