"एक महिला से उम्मीद की जाती है कि वो अपने पति के लिए ‘पवित्र कर्तव्य’ निभाए. पति का शारीरिक और भावनात्मक रूप से ख्याल रखे. उसके लिए प्रार्थना करे. अगर वह ऐसा नहीं कर सकती, तो बच्चे का भविष्य उसके साथ ‘सुरक्षित नहीं’ है. बाप-बेटे के रिश्ते को बचाने के लिए बेहतर है कि वो अपने पिता के साथ रहे."
फैमिली कोर्ट में बच्चे की कस्टडी का केस आया, जज ने मां के लिए जो कहा वो बड़ी बहस छेड़ सकता है
Pune Family court Child custody case: पुणे फैमिली कोर्ट के इंचार्ज गणेश घोले ने एक बच्चे की कस्टडी से जुड़े मामले में पत्नी की ड्यूटी पर टिप्पणी की. कहा कि जो महिलाएं अपना कर्तव्य नहीं निभातीं, उनके साथ बच्चे का भविष्य ठीक नहीं है.


पुणे के एक फैमिली कोर्ट के इंचार्ज जज गणेश घोले ने एक बच्चे की कस्टडी से जुड़े मामले में ये टिप्पणी की. पति ने नाबालिग बेटे की कस्टडी के लिए कोर्ट में याचिका दायर की थी. सुनवाई के दौरान जज ने माना कि इस केस में 'अधिकतर' गलती महिला की है. क्योंकि ना तो उसने अपनी ड्यूटी निभाई और बेटे-पिता के रिश्ते में भी 'जहर' घोल रही है.
महिला ने पति पर कई आरोप लगाए थे. 16 जून को कोर्ट ने कहा,
“पत्नी ने इतने मुकदमे दायर किए हैं कि ऐसा लगता है जैसे वो भूल गई कि याचिकाकर्ता भी उनके बच्चे का पिता है. वो पति से काफी आर्थिक सहायता की उम्मीद कर रही है. मगर रिश्ता सुधारने या समझौते की इच्छा जाहिर नहीं की. ”
Live Law की रिपोर्ट के मुताबिक, आगे कोर्ट ने पत्नी की ड्यूटी का हवाले देते हुए कहा,
वो घर की देखभाल करना, सम्मान बनाए रखना आदि से अनजान लगती है. पत्नी से शादी की कसमें निभाना, पति का शारीरिक और भावनात्मक रूप से ख्याल रखना, उनके लिए प्रार्थना करना और हर चीज में उनकी भलाई चाहना जैसी उम्मीदें होती हैं. लेकिन महिला ने पति और उनके परिवार के साथ ऐसा व्यवहार किया जैसे वे सात पीढ़ियों के दुश्मन हों. इसलिए ऐसी महिला के साथ बच्चे का भविष्य सुरक्षित नहीं है.
पत्नी पर आरोप लगा कि उसने बच्चे को धमकी दी थी कि अपने पिता को मैसेज करे कि वो उनसे नहीं मिलना चाहता. अगर ऐसा नहीं किया तो वह खुद की जान ले लेगी. जज ने माना कि ऐसी बातें बच्चे के मन में उसके पिता के लिए जहर घोलने का काम कर सकती हैं. बच्चे के उज्ज्वल भविष्य की रक्षा के लिए, उसे तुरंत मां से दूर करना जरूरी है. वर्ना महिला अपने अहंकार के कारण बच्चे का इस्तेमाल पिता के खिलाफ एक हथियार के तौर पर कर सकती है.
जज का कहना है कि पूरे केस में महिला सिर्फ भौतिक संपत्ति के लिए पूरी ताकत से लड़ रही है. ऐसे में उसकी कस्टडी में बच्चे का भविष्य अच्छा नहीं दिखता.
सिंगापुर में बच्चे की कस्टडी पिता को मिलीरिपोर्ट के मुताबिक, बच्चे की कस्टडी से जुड़ा मामला सिंगापुर में भी चला था. 2022 से बेटा अपने माता-पिता के साथ विदेश में रह रहा था. कुछ समय पहले उसकी मां उसे वापस इंडिया ले आई थी. लेकिन सिंगापुर की एक अदालत ने ex-parte order (एक तरफा आदेश) में पत्नी को बच्चे की कस्टडी उसके पिता को सौंपने का आदेश दिया था. मगर महिला याचिकाकर्ता की कानूनी कस्टडी से बेटे को भारत लेकर आ गई थी.
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जज ने इस पर भी बात की. कहा कि पत्नी ने उस आदेश को चुनौती नहीं दी और आदेश का 'उल्लंघन' करती रही. वह भूल गई कि बच्चा दोनों का है. पति-पत्नी के बीच कानूनी लड़ाई में वह बच्चे का इस्तेमाल मोहरे की तरह कर रही है. आदेश न मानना जानबूझकर किया गया था या नहीं, इस पर पूरी जांच के बाद विचार किया जाएगा.
पत्नी ने पति पर आरोप एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर का आरोप भी लगाया था. इस पर जज ने कहा कि अगर एक पल के लिए मान भी लिया जाए कि पति का चरित्र ठीक नहीं, तो क्या इसका मतलब ये हुआ कि वो बुरा पिता है. इसके बाद जज ने बच्चे की कस्टडी पिता को सौंप दी.
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