ये चिट्ठी हमें एक रीडर ने भेजी है. नाम है अभिषेक दुबे. अभिषेक ने बताया कि वो कड़कड़डूमा के रेलवे रिजर्वेशन काउंटर पर गए थे. वहां एक मोहतरमा टिकट काट रही थीं. भाई ने एंट्री भरकर फार्म दिया. पेमेंट के लिए एटीएम कार्ड दिया और कहा पैसा काट लो. मैडम ने मशीन में रकम की गिनती डालकर पिन के लिए बढ़ाया. अभिषेक ने पिन डालकर आगे बढ़ाया. एक बार को लगा कि कहीं कुछ गलत हुआ है लेकिन फिर अभिषेक को लगा कि सामने वाली एक्सपीरिएंस्ड है.
काउंटर जैसे ही छोड़ा, टिकट देखा. उसमें काटने थे 505 रुपए और काटे गए थे 5.05 रुपए. रसीद भी इतने की मिली थी. फिर मैडम को गलती का अहसास हुआ और अभिषेक को बुलाया. अभिषेक ने भी बिना चूं चां किए सही रकम दे दी. ये भी लिखा है कि उनको मुंबई का केस याद आया जब रेलवे ने एक यात्री के 10 हजार की जगह एक लाख रुपए काट लिए थे और वापस करने में उसकी नानी मर रही थी. मतलब काम करने वाले भी इंसान ही हैं, उनसे गलती हो सकती है लेकिन डिपार्टमेंट को तो ईमानदार रहना चाहिए न.
नीचे चिट्ठी के साथ संलग्न टिकट और रसीदें लगी हैं.

रसीद

टिकट
चलो अब रेलवे की बात तो हो गई. लखनऊ में कुछ दिन पहले हमारा शो था. वहां दो लोगों ने कॉमेडी की रेल चलाई. वीडियो देखो.
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