''अगले जन्म में मैं ब्राह्मण पैदा होना चाहता हूं और मंदिर में पुजारी बनके भगवान की सेवा करना चाहता हूं.''
कौन है ये बीजेपी सांसद, जिसने कहा कि वो अगले जन्म में बाह्मण पैदा होना चाहता है
जिस मंदिर का पुजारी बनने की चाहत, वहां महिलाओं की एंट्री पर बैन है.
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मलयालम फिल्मों के सुपरस्टार और राज्यसभा एमपी विवादों में आ गए हैं.
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'मैं सबरीमाला मंदिर का सर्वोच्च पुजारी बनके भगवान को छूना चाहता हूं. उनको नहलाना चाहता हूं, भजन गाना चाहता हूं. ये नहीं तो मैं कम से कम इस मंदिर में आम पुजारी तो बनना ही चाहूंगा.'मलयाली एक्टर और बीजेपी के राज्यसभा सांसद सुरेश गोपी ने 23 सितंबर को बिना पूछे ही ये बता दिया है. वो यहीं नहीं रुके, आगे बोले, 'एक परम भक्त की तरह मैं जनेऊधारी ब्राह्मणों को ही भगवान मानता हूं. अगर कोई मुझसे पूछे कि क्या मैंने साक्षात भगवान को देखा है तो मैं कहूंगा कि मंदिरों के पुजारी ही मेरे लिए भगवान हैं.' उन्होंने कहा, सुरेश गोपी केरल के नंबूदरी ब्राह्मणों के एक संगठन योगेक्षमा सभा के वार्षिक समारोह में बोल रहे थे. तिरुवनंतपुरम में हुए इस कार्यक्रम में उन्होंने अगले जनम की प्लानिंग तो बता दी. इस जनम में उन्होंने क्या किया है, वो भी जान लेते हैं.
# पूरा नाम सुरेश गोपीनाथन. जाने सुरेश गोपी के नाम से जाने जाते हैं. एक्टिंग, सिंगिंग तो करते ही थे, अब नेतागिरी करने लगे हैं. असर आपने ऊपर देखा होगा. उन्हें मलयाली सिनेमा का सुपरस्टार माना जाता है. करीब 200 फिल्मों में काम कर चुके हैं.

केरल पहुंचे पीएम का सुरेश गोपी ने किया था स्वागत.
# जन्म 26 जून 1959 को केरल के नीलेश्वरम में एक फिल्म डिस्ट्रीब्यूटर गोपीनाथन पिल्लई के यहां हुआ था. सो लाज़िमी है फिल्मों का चस्का बचपन से ही लग गया था. छह साल की ही उम्र में मौका भी मिल गया एक्टिंग का. 1965 में आई फिल्म ओडायिल निन्नू में बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट के रूप में फिल्मी करियर शुरू हो गया.
# 1986 में सुरेश जवान हुए और उनका असल फिल्मी करियर शुरू हुआ. फिल्म 'टीपी बालागोपालन एमए' में एक दूल्हे का रोल मिला. इसके बाद भी उन्हें कई रोल मिले, मगर विलेन या साइड एक्टर के. काफी स्ट्रगल के बाद 1992 में उन्हें 'थलास्तानम' में बतौर लीड एक्टर ब्रेक मिला. फिल्म सुपरहिट हो गई और सुरेश के दिन बहुर गए.

गोपी के बतौर पुलिस अफसर वाले कई रोल काफी हिट रहे.
# 1998 में फिल्म कलियट्टम के लिए सुरेश को बेस्ट एक्टर का नेशनल फिल्म अवॉर्ड मिला. ईमानदार और गुस्सैल पुलिस अफसर के तौर पर उनके कई रोल काफी हिट रहे हैं.
# अप्रैल 2016 में सुरेश को केंद्र की बीजेपी सरकार ने राज्यसभा के लिए एक्टर कैटेगरी में नामित किया. उस वक्त सुरेश ने इस फैसले को गैर राजनीतिक करार दिया था. अपने आप को बड़ा समाजसेवी दिखाने की कोशिश की. कहा कि वो सेवा करने के लिए राज्यसभा जा रहे हैं. फिर 18 अक्टूबर 2016 का दिन आया और वो भगवाधारी हो गए यानी बीजेपी जॉइन कर ली.

मुख्तार अब्बास नकवी ने गोपी को जॉइन करवाई थी पार्टी.
# 2016 में केरल के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने सुरेश को तिरुवनंतपुरम की सीट से लड़ने को कहा था, मगर वो राजी नहीं हुए. फिर इस सीट से क्रिकेटर श्रीसंत ने चुनाव लड़ा था. सुरेश ने प्रचार भी किया था. मगर श्रीसंत हार गए और तीसरे नंबर पर रहे.
विश्व के दस सर्वाधिक लोकप्रिय धार्मिक तीर्थस्थलों में है सबरीमाला मंदिर
केरल के पथानमथिट्टा जिले में पश्चिम घाट पर्वतों की सह्याद्रि शृंखला है. इसी के बीचो-बीच घने जंगल में स्थित है सबरीमाला मंदिर. सबरीमाला को सबसे लोकप्रिय तीर्थस्थलों में से एक माना जाता है. फोर्ब्स ट्रेवेलर ने 'विश्व के दस सर्वाधिक लोकप्रिय धार्मिक तीर्थस्थल' की सूची जारी की थी, उसमें भी इसका नाम था. यहां सालाना करीब छह करोड़ देसी-विदेशी सैलानी आते हैं.
केरल में पहाड़ियों के बीच है सबरीमाला मंदिर.
यह मंदिर भगवान अय्यप्पा का है. भगवान अय्यप्पा की कहानी भी अनूठी है. उनका एक नाम 'हरिहरपुत्र' है. हरि यानी विष्णु और हर यानी शिव के पुत्र. हरि के मोहनी रूप को ही अय्यप्पा की मां माना जाता है. सबरीमाला का नाम शबरी के नाम पर पड़ा है. जी हां, वही रामायण वाली शबरी जिसने भगवान राम को जूठे फल खिलाए थे. यही कारण है कि सबरीमाला मंदिर को शैव और वैष्णवों के बीच की अद्भुत कड़ी माना जाता है.
इतिहासकारों के मुताबिक, पंडालम के राजा राजशेखर ने अय्यप्पा को पुत्र के रूप में गोद लिया. लेकिन भगवान अय्यप्पा को ये सब अच्छा नहीं लगा और वो महल छोड़कर चले गए. आज भी यह प्रथा है कि हर साल मकर संक्रांति के अवसर पर पंडालम राजमहल से अय्यप्पा के आभूषणों को संदूकों में रखकर एक भव्य शोभायात्रा निकाली जाती है. ये नब्बे किलोमीटर की यात्रा तय करके तीन दिन में सबरीमाला पहुंचती है.
मंदिर से जुड़ा विवाद भी है
सबरीमाला मंदिर में दस से 50 साल तक की महिलाओं (जिनको मासिक धर्म होता है) के प्रवेश पर पाबंदी है. इसके पीछे की मान्यता यह है कि इस मंदिर के मुख्य देवता अय्यप्पा ब्रह्मचारी थे. ऐसे में इस तरह की महिलाओं के मंदिर में जाने से उनका ध्यान भंग होगा. केरल हाई कोर्ट ने 1991 और 2015 में इस परंपरा के पक्ष में कहा था कि सबरीमाला मंदिर को अपनी परंपराएं जारी रखने का अधिकार है.
महिलाएं मंदिर में जा सकेंगी या नहीं, ये सुप्रीम कोर्ट को तय करना है.
फिलहाल यह मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है. कोर्ट ने इस मामले में कुछ महीने पहले महिलाओं के हक में अहम टिप्पणी की थी. कहा था कि केरल के ऐतिहासिक सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर बैन को सही ठहराना लैंगिक न्याय को खतरे में डालता है. वह वर्तमान प्रचलित परंपराओं से नहीं बल्कि संवैधानिक सिद्धातों के आधार पर सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश के अधिकार पर फैसला करेगा. इसकी सुनवाई चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के नेतृत्व वाली बेंच कर रही है.
सोशल मीडिया पर मौज भी ली जा रही है-
साउथ के एक बड़े नेता की कहानी इस वीडियो में देखिए-
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