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बिलकिस के बलात्कारियों की रिहाई का समर्थन करने वालों को SC की ये बात बहुत चुभेगी!

सुप्रीम कोर्ट का सवाल- बिलकिस केस के दोषियों को क्यों छोड़ा?

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सुप्रीम कोर्ट ने वो फाइलें मांगी, जिनमें दोषियों को छोड़े जाने की वजह लिखी है | फाइल फोटो: आजतक

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार, 18 अप्रैल को बिलकिस बानो की उस याचिका पर सुनवाई की, जिसमें गुजरात सरकार पर रेप और सामूहिक हत्या के मामले के दोषियों को समय से पहले रिहा करने का आरोप लगाया गया था. जस्टिस केएम जोसेफ और बीवी नागरत्ना की बेंच ने मामले की सुनवाई की.

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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जिस तरह से अपराध किया गया वो भयावह है, इस मामले में एक गर्भवती महिला के साथ सामूहिक बलात्कार किया गया था, उसकी तुलना मानक धारा 302 (हत्या) के मामले से नहीं की जा सकती. बेंच ने आगे कहा,

ये एक ऐसा मामला है, जहां एक गर्भवती महिला के साथ गैंगरेप किया गया और उसके सात रिश्तेदारों की हत्या कर दी गई. आप सेब की तुलना संतरे से कैसे कर सकते हैं? आप एक व्यक्ति की हत्या की तुलना सामूहिक हत्या से कैसे कर सकते हैं? यह एक समुदाय और समाज के खिलाफ अपराध है. हमारा मानना है कि आप अपनी शक्ति और विवेक का इस्तेमाल जनता की भलाई के लिए करें. दोषियों को रिहा करके आप क्या संदेश दे रहे हैं?

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दोषियों की ओर से पेश वकील सिद्धार्थ लूथरा ने कहा कि कोर्ट का इसे एक गंभीर अपराध कहना सराहनीय कदम है, लेकिन दोषी 15 साल हिरासत में रहे हैं.

इस पर बेंच ने कहा कि जब समाज को बड़े पैमाने पर प्रभावित करने वाले ऐसे जघन्य अपराधों में छूट देने पर विचार किया जाता है, तो सार्वजनिक हित को ध्यान में रखते हुए शक्ति का प्रयोग किया जाना चाहिए. जस्टिस जोसेफ ने राज्य सरकार से कहा कि अच्छा आचरण होने पर दोषियों को छूट देने को अलग रखना चाहिए. इसके लिए बहुत उच्च पैमाना होना चाहिए. भले ही आपके पास शक्ति हो, लेकिन उसकी वजह भी होनी चाहिए.

'रिहाई का कारण बताइए, फाइलें लेकर आइए'

बेंच ने सरकार से दोषियों की रिहाई का कारण पूछा. कोर्ट ने कहा कि आज ये बिलकिस के साथ हुआ है, कल किसी के साथ भी हो सकता है.

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कोर्ट ने केंद्र और गुजरात सरकार से दोषियों की रिहाई की वजह पूछते हुए कहा कि दोषियों को समय से पहले रिहाई देने से जुड़ी फाइलें कोर्ट में पेश की जानी चाहिए. अगर दोषियों को रिहा करने की वजह नहीं बताई जाती है तो कोर्ट अपना निष्कर्ष निकालेगा.

कोर्ट ने मामले में केंद्र और राज्य सरकार से 1 मई तक फाइलें पेश कर जवाबी हलफनामा दाखिल करने को कहा है. मामले की अगली सुनवाई 2 मई को दोपहर 2 बजे होगी.

कोर्ट में सरकार की तरफ से पेश हुए ASG एसवी राजू पेश हुए. उन्होंने कोर्ट को बताया कि फाइलें तैयार हैं, लेकिन दोनों सरकारें (राज्य और केंद्र) कोर्ट में फाइलें पेश करने के आदेश पर रिव्यु पिटीशन (पुनर्विचार याचिका) दायर करना चाहती हैं. हालांकि, ये पूरी तरह से तय नहीं किया गया है कि पुनर्विचार याचिका दायर की जाएगी या नहीं.

15 अगस्त को रिहा हुए थे दोषी

2002 में हुए गोधरा कांड के दौरान बिलकिस बानो से रेप किया गया था और उसके परिवार के लोगों की हत्या कर दी गई थी. इस मामले में 11 लोगों को दोषी ठहराया गया था. 15 अगस्त, 2022 को गुजरात सरकार ने सभी दोषियों को जेल से रिहा कर दिया.

इसके बाद बिलकिस बानो ने 30 नवंबर 2022 को इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए याचिका दायर की थी. इसके अलावा सामाजिक कार्यकर्ता सुभाषिनी अली और TMC सांसद महुआ मोइत्रा ने मामले के 11 दोषियों को रिहा करने के गुजरात सरकार के आदेश को रद्द करने की मांग की थी.

वीडियो: बिलकिस बानो कांड का दोषी बीजेपी सांसद-विधायक के साथ मंच पर, मच गया बवाल

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