बिलकिस बानो के 11 बलात्कारियों के खिलाफ दायर जनहित याचिका (PIL) का गुजरात सरकार ने विरोध किया है. बुधवार, 9 अगस्त को गुजरात सरकार की तरफ से इस मामले में एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू पेश हुए. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के आदेश पर किसी तीसरे पक्ष द्वारा सवाल नहीं उठाया जा सकता, क्योंकि सजा की माफ़ी का फैसला सजा को कम करने के लिए लिया गया है. और किसी कैदी की सजा के पहलू पर कोई PIL नहीं दायर की जा सकती. उनके मुताबिक इस मामले में किसी थर्ड पार्टी का कोई दखल नहीं हो सकता है, क्योंकि ये पूरी तरह से अदालत और अभियुक्त के बीच का मामला है.
'इससे नई मिसाल बनेगी... ' गुजरात सरकार ने बिलकिस के रेपिस्ट के पक्ष में अब क्या नई दलील दी है?
बिलकिस बानो के बलात्कारियों के वकील और गुजरात सरकार दोनों ने जनहित याचिका पर कौन से सवाल उठा दिए?


एसवी राजू की इस दलील का कोर्ट ने तुरंत जवाब दिया. जस्टिस बीवी नागरत्ना और उज्जल भुइयां की पीठ ने उनसे कहा कि ये कोई क्रिमिनल केस नहीं है. ये एक प्रशासनिक आदेश है. और कोर्ट प्रशासनिक कानून के दायरे में आते हैं. बेंच ने राजू से ये भी पूछा कि वो इस बात का सबूत दिखाएं कि किसी प्रशासनिक आदेश को जनहित याचिका में चुनौती नहीं दी जा सकती?
बिलकिस के बलात्कारियों ने क्या दलील दी?वहीं, बिलकिस बानो केस के दोषियों ने भी सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार किए जाने का विरोध किया है. केस के एक दोषी की पैरवी कर रहे एडवोकेट ऋषि मल्होत्रा का कहना है कि सजा को कम करने से याचिकाकर्ताओं के किसी मौलिक अधिकार का उल्लंघन नहीं हो है और इस आदेश का उन लोगों से कोई संबंध नहीं है .
लाइव लॉ की एक रिपोर्ट के मुताबिक एडवोकेट ऋषि मल्होत्रा ने कोर्ट से आगे कहा कि अगर अदालत इस जनहित याचिका को स्वीकार करती है, तो इससे एक खतरनाक मिसाल पेश होगी. फिर भविष्य में इस तरह की याचिकाओं की बाढ़ सी आ जाएगी. और उनमें जो लोग केस से जुड़े नहीं हैं, वो भी जनहित याचिकाओं के जरिए किसी भी व्यक्ति को सजा माफी को चुनौती देने लगेंगे. मल्होत्रा के मुताबिक अगर कोई पीड़ित अदालत के पास आता है तो बात समझ में आती है, लेकिन जो लोग उस केस से जुड़े ही नहीं हैं, वो याचिका दायर करते हैं, तो ये बात तर्क से परे लगती है. समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार, 10 अगस्त को भी इस मामले की सुनवाई जारी रहेगी.
किन लोगों ने PIL दायर की है?बता दें कि 2002 के गुजरात दंगों के दौरान 11 लोगों ने बिलकिस बानो के साथ गैंगरेप किया था. इन्हें बिलकिस के परिवार के सात लोगों की हत्या के लिए भी दोषी ठहराया गया था. लेकिन, कई साल जेल में रहने के बाद गुजरात सरकार ने साल 2022 में इन्हें माफी देकर रिहा कर दिया. इसके विरोध में बिलकिस बानो समेत कई लोगों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है. सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर करने वालों में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी की नेता सुभाषिनी अली, पत्रकार रेवती लॉल, लखनऊ यूनिवर्सिटी की पूर्व वाइस चांसलर रूपरेखा वर्मा और तृणमूल कांग्रेस की सांसद मोहुआ मोइत्रा शामिल हैं.
वीडियो: 'आज बिलकिस बानो तो कल कोई और...'सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को क्या सुना डाला?
















