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बिहार की स्कूल प्रिंसिपल ने ऑफिस को बना डाला बेडरूम, बोलीं- 'बेघर हूं! क्लास पर कब्जा नहीं किया'

स्कूल में पहली से आठवीं तक के करीब डेढ़ सौ बच्चों की क्लास सिर्फ तीन कमरों में चल रही है. ऑफिस का इस्तेमाल बच्चों की क्लास चलाने के लिए भी किया जा सकता था, मगर वहां प्रिंसिपल साहिबा परिवार समेत रह रही हैं.

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स्कूल प्रिंसिपल का कहना है कि पास के गांव में उनका घर बन रहा है (सांकेतिक तस्वीर - India Today)

अगर किसी स्कूल में जाएं. तो क्या देखने को मिलेगा? बेंच, कुर्सी, मेज या फिर ब्लैक बोर्ड वगैरह. जाहिर सी बात है स्कूल में और क्या ही देखने मिल सकता है. लेकिन जरा ठहरिए तकिया, गद्दा, बेड, अलमारी और स्टोव ये सब भी स्कूल में देखने मिल सकता है. या कहें मिला है. बिहार के एक स्कूल में प्रिंसिपल ने स्कूल को ही बेडरूम-किचन अपार्टमेंट बना डाला (Bihar principal bedroom in school). साथ ही गृहस्थी का सामान भी जुटा डाला.

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ऑफिस से काम करने का दौर जा चुका है? अब घर से काम करने का दौर है यानी ‘वर्क फ्राम होम’. लेकिन बिहार की एक प्रिंसिपल ने स्कूल को ही घर बना डाला. TOI की रिपोर्ट के मुताबिक बिहार के जमुई जिले के बारदौन (बादरौन) में मिडल स्कूल का ये वाक्या है. दरअसल प्रिंसिपल शीला हेम्ब्रम के मुताबिक उनके पास घर नहीं है. वो बेघर हैं, उनका नया घर पास के गांव में बन रहा है.

स्कूल की ऑफिस की फोटो वायरल होने के बाद उन्होंने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि मैंने किसी क्लास में कब्जा नहीं किया है. मैं अपने ऑफिस में रह रही हूं. वायरल तस्वीरों में स्कूल के ऑफिस में फ्रिज, बेड-गद्दा, गैस-स्टोव. यहां तक बाकायदा बक्सा और फ्रिज के ऊपर किसी ‘बड़े काम’ के लिए मिली ट्रॉफी भी देखी जा सकती है.

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स्कूल में बने घर की वायरल तस्वीर

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तीन कमरों में 1 से 8 तक की कक्षाएं चल रही हैं

बताया जा रहा है, स्कूल में 150 छात्र-छात्राएं हैं. जो 1 से लेकर 8 तक की क्लास में हैं. जिनकी क्लास अब सिर्फ तीन कमरों में चल रही हैं. क्लास 1-3 तक एक कमरे में, 4-5 दूसरे में और 6-8 तीसरे कमरे में चल रही हैं. इसकी वजह स्कूल में जगह की कमी बताई जा रही है. हालांकि ऑफिस की जगह को स्कूल के काम के लिए इस्तेमाल किया जा सकता था लेकिन वहां ‘मजबूर’ बेघर टीचर का बेडरूम है. जहां वो परिवार के साथ पिछले चार महीनों से रह रही हैं.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रिंसिपल के घर के कंस्ट्रक्शन का सामान भी क्लास रूम में रखा गया था. यहां तक बच्चों को भी इस काम में लगाया जा रहा था. जिला शिक्षा अधिकारी (District education officer) कपिल देव तिवारी के  मुताबिक मामले को संज्ञान में लिया गया है. अगर प्रिंसिपल को दोषी पाया गया तो उन पर कारर्वाई की जाएगी. 

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