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बिहार में अधिकारियों ने 10 साल पहले बनवाया करोड़ों का अस्पताल, फिर भूल गए!

Bihar के Muzaffarpur में बने इस अस्पताल की जानकारी स्वास्थ्य विभाग को भी नहीं. जब इसे बनाया जा रहा था तब स्थानीय निवासियों में उम्मीदें जगी थीं. लेकिन 10 सालों में ये शुरु ही नहीं हो पाया.

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अस्पताल का भवन. (तस्वीर: इंडिया टुडे)
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मणि भूषण शर्मा

बिहार (Bihar) के मुजफ्फरपुर (Muzaffarpur) में एक ऐसे सरकारी अस्पताल के भवन का पता चला है जिसके बारे में स्वास्थ्य विभाग को जानकारी ही नहीं है. सालों पहले बने इस 30 बेड के अस्पताल को विभाग ने टेक ओवर ही नहीं किया. इसके कारण एक भी मरीज का इलाज हुए बगैर ही ये अस्पताल खंडहर में बदल गया. हालत ऐसी है कि हॉस्पिटल की खिड़की, चौखट, दरवाजे, ग्रिल, गेट, आलमारी, बिजली की वायरिंग सहित अन्य उपकरणों की चोरी हो चुकी है. और अस्पताल अब असामाजिक तत्वों का अड्डा बन गया है.

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इंडिया टुडे से जुड़े मणि भूषण शर्मा ने इस मामले को रिपोर्ट किया है. रिपोर्ट के मुताबिक, इस अस्पताल को बनाने में 5 करोड़ रुपये लगे थे. करीब 10 साल पहले 2015 में इसका निर्माण पूरा हुआ था. पारू प्रखंड के सरैया पंचायत के चांद पुरा का मामला है. हॉस्पिटल का निर्माण 6 एकड़ जमीन में किया गया था. इसमें आधुनिक उपकरण भी लगाए गए थे. इसके कैंपस में तीन भवन बनाए गए. एक भवन में जांच केंद्र बना था. कैंपस में ही हेल्थ वर्कर्स के लिए आवास की भी व्यवस्था की गई थी.

Muzaffarpur Hospital
अस्पताल के आसपास जंगल जैसी स्थिती हो गई है. (तस्वीर: इंडिया टुडे)

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स्थानीय निवासी सुधीर कुमार ने बताया कि ये इलाका बाढ़ प्रभावित है. और इलाके की जनसंख्या करीब 1 लाख है. अस्पताल के लिए जब भवन बनाया जा रहा था तब ग्रामीणों में इसकी भव्यता को देखकर उम्मीद जगी थी. सुधीर ने बताया कि ग्रामीणों को लगा था कि अब उन्हें इलाज के लिए 50 किलोमीटर दूर शहर में नहीं जाना होगा. लेकिन अस्पताल कभी चालू ही नहीं हो पाया. उलटे इसके आसपास जंगल हो गया है जिसके कारण गांव वालों को इधर आने में डर लगता है.

Muzaffarpur
अस्पताल की हालत. (तस्वीर: इंडिया टुडे)

SDO पश्चिमी ने इस मामले को गंभीर बताया है और कहा है कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी. जिलाधिकारी ने इस मामले की जांच के लिए टीम बनाई है. साथ ही सिविल सर्जन और अन्य अधिकारी भी अपने स्तर से जांच कर रहे हैं.

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