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सिंधु जल संधि रद्द करने के बाद भारत का अगला कदम, हाइड्रो प्रोजेक्ट की क्षमता बढ़ाने पर काम में शुरू

India starts work on hydro projects: भारत ने जम्मू-कश्मीर में दो जलविद्युत परियोजनाओं में पानी रखने की क्षमता को बढ़ाने के लिए काम शुरू कर दिया है.

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सिंधु जल समझौता रद्द करने के बाद भारत सरकार का अगला कदम. (फ़ाइल फ़ोटो - इंडिया टुडे)

पहलगाम हमले (Pahalgam Attack) के बाद भारत का पाकिस्तान के साथ तनाव (India Pakistan tension) चल रहा है. इस सिलसिले में पहले भारत ने पाकिस्तान के साथ जल-बंटवारे के सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) समझौते को रद्द कर दिया. लेकिन पानी पाकिस्तान न पहुंचे, इसके लिए सबसे ज़रूरी है कि भारत पानी को रोककर रखने की क्षमता रखे. अब भारत ने इस संबंध में भी काम शुरू कर दिया है.

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इंटरनेशनल न्यूज़ एजेंसी रॉयटर्स की ख़बर के मुताबिक़, भारत ने जम्मू-कश्मीर में दो जलविद्युत परियोजनाओं (Hydro Projects) में पानी रखने की क्षमता को बढ़ाने के लिए काम शुरू कर दिया है. भारत की जलविद्युत कंपनी नेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कॉर्पोरेशन (NHPC) गाद हटाने के लिए ‘जलाशय फ्लशिंग’ (Reservoir Flushing) शुरू कर चुका है.

रॉयटर्स ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि सलाल और बगलिहार परियोजनाओं में 1 मई से काम शुरू हुआ. जम्मू-कश्मीर के अधिकारी और पुलिस ये काम कर रहे हैं. एक सूत्र ने रॉयटर्स को बताया,

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ये पहली बार है जब इस तरह का अभ्यास किया गया है. इससे ज़्यादा अच्छे से विद्युत उत्पादन में मदद मिलेगी. टर्बाइनों को होने वाली क्षति को भी रोका जा सकेगा.

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सूत्रों के मुताबिक़, जलविद्युत परियोजनाओं को प्रवाहित करने के लिए गाद को बाहर निकालने के लिए जलाशय को लगभग खाली करना पड़ता है. क्योंकि गाद का जमाव उत्पादन में गिरावट का एक प्रमुख कारण है.

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उदाहरण के लिए 690 मेगावाट की सलाल परियोजना द्वारा उत्पादित बिजली, इसकी क्षमता से काफी कम है. क्योंकि पाकिस्तान ने इस प्रकार की फ्लशिंग को रोक दिया था. जबकि 900 मेगावाट की बगलिहार परियोजना में भी गाद जमने से उत्पादन प्रभावित हुआ है. एक सूत्र ने बताया,

फ्लशिंग कोई आम बात नहीं है. क्योंकि इससे बहुत ज़्यादा पानी बर्बाद होता है. अगर इससे बाढ़ आती है, तो निचले इलाक़ों में रहने वाले लोगों को सूचित किया जाता है.

रॉयटर्स की रिपोर्ट बताती है कि पाकिस्तान अपनी सिंचाई और जल विद्युत के लिए भारत से होकर बहने वाली नदियों पर निर्भर है. ऐसे में भारत के इस फ़ैसले से पाकिस्तान को तत्काल आपूर्ति के लिए खतरा तो नहीं होगा. लेकिन अगर अन्य प्रोजेक्ट्स भी इसी प्रकार की कोशिशें शुरू कर दें, तब प्रभाव ज़रूर पड़ेगा.

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